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VISTAR क्या है: ₹4,371 करोड़ से बदलेगा भारत का डेटा

By Gagariya Editorial Desk•Published 7 Nov 2026 IST•5 min read•Reviewed by the Gagariya editorial team
VISTAR क्या है: ₹4,371 करोड़ से बदलेगा भारत का डेटा
Photo: Own or licensed by the publisher

देश के बारे में आँकड़े जुटाने का तरीका बदलने वाला है। 16वें वित्त आयोग चक्र में सर्वे की संख्या 43 से बढ़कर 59 हो जाएगी, और जिला स्तर के अनुमान भी जारी होंगे। यह बदलाव VISTAR योजना के तहत होगा, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने मंज़ूरी दी है। प्रधानमंत्री ने इसके बाद कहा कि बेहतर डेटा का मतलब बेहतर फैसले और बेहतर नीतियाँ हैं।

VISTAR है क्या

VISTAR का पूरा नाम Viksit Bharat Initiative for Statistical Transformation, Analytics and Research है। यह सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की योजना है। प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार यह योजना मंत्रालय के सभी सांख्यिकीय और डेटा प्रबंधन कार्यों को अपने दायरे में लेगी। इसका मकसद एक ऐसी सरकारी आँकड़ा व्यवस्था बनाना है जो तेज़, बारीक, एक-दूसरे से जुड़ी हुई और AI के लिए तैयार हो। यह काम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा गया है। सरल शब्दों में कहें तो सरकार यह तय कर रही है कि देश के बारे में आँकड़े कैसे जुटाए जाएँ, कितनी जल्दी जारी किए जाएँ और अलग-अलग विभागों के आँकड़े आपस में कैसे मेल खाएँ। अभी कई सर्वे धीमे होते हैं, आँकड़े देर से आते हैं और राज्य स्तर पर बारीक जानकारी की कमी रहती है। VISTAR इसी कमी को दूर करने के लिए बनी है।

तीन हिस्से, तीन काम

योजना के तीन घटक हैं। हर घटक का काम अलग है।

घटक क्या होगा
Comprehensive Statistical Operations and Strengthening of Ecosystem 16वें वित्त आयोग चक्र में 59 सर्वे, पहले के 43 बड़े सर्वे की तुलना में ज़्यादा; आँकड़ों का पूरी तरह डिजिटलीकरण; AI और मशीन लर्निंग से डेटा की जाँच और विश्लेषण
Support for Statistical Strengthening (SSS) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को धन, नई डिलिवरेबल-आधारित व्यवस्था (SSS 2.0); जिला स्तर के अनुमान और दस लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहरों के अनुमान
Economic Census (EC) 8वीं आर्थिक गणना, राज्यों के साथ मिलकर; गाँव पंचायत और वार्ड स्तर तक गैर-कृषि प्रतिष्ठानों और कामगारों का ब्योरा
पहले घटक में दो नए सूचकांक भी जारी करने की योजना है: Headline Index of Services Production और Index of Unincorporated Sector Enterprises। मंत्रालय मोबाइल फोन, स्कैनर और ई-कॉमर्स जैसे वैकल्पिक स्रोतों से भी आँकड़े लेने की कोशिश करेगा, ताकि सर्वे का बोझ कम हो और जानकारी की कमी भरे। छात्रों के लिए इंटर्नशिप योजना और शोध संस्थानों के शोध प्रस्तावों को भी इसमें जगह दी गई है।

पहले से तीन बड़े बदलाव

सबसे बड़ा बदलाव सर्वे की संख्या में है। 16वें वित्त आयोग चक्र में 59 सर्वे होंगे, जबकि पहले 43 बड़े सर्वे हुए थे। यानी 16 सर्वे ज़्यादा। मंत्रालय के अनुसार इससे अलग-अलग क्षेत्रों में जानकारी की कमी भरेगी और नीतिगत फैसले समय पर हो सकेंगे। दूसरा बदलाव तकनीक का है। आँकड़े जुटाने से लेकर जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। डेटा की प्रोसेसिंग, जाँच और विश्लेषण में AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल होगा। डेटा को सूचीबद्ध करना, मशीन से पढ़ने लायक बनाना और अलग-अलग विभागों के बीच साझा करना भी इस योजना का हिस्सा है। इससे योजनाओं का लक्ष्य तय करना आसान होगा और एक ही काम दो बार नहीं होगा। तीसरा बदलाव राज्यों की तरफ है। SSS 2.0 के तहत राज्यों को धन मिलेगा, लेकिन वह काम पूरा होने से जुड़ा होगा। मंत्रालय राज्यों को जिला स्तर के GDP और राज्य स्तर के IIP के आँकड़े तैयार करने में तकनीकी मदद देगा। PLFS, HCES और ASUSE जैसे बड़े सर्वे में जिला और बड़े शहरों के अनुमान भी जोड़े जाएँगे।

किसे क्या फायदा होगा

राज्य सरकारों को सबसे सीधा फायदा मिलेगा। जिला स्तर के आँकड़े मिलने से योजनाएँ ज़्यादा सटीक बनेंगी। शोधकर्ताओं और छात्रों को इंटर्नशिप और शोध प्रस्तावों के मौके मिलेंगे। नीति बनाने वालों को 8वीं आर्थिक गणना से असंगठित क्षेत्र की पूरी तस्वीर मिलेगी, क्योंकि गणना में हर गैर-कृषि प्रतिष्ठान और उसमें काम करने वाले लोग गिने जाएँगे। यह गणना National Statistical Business Register की नींव भी बनेगी, जिससे आगे उद्यमों पर लक्षित सर्वे करना आसान होगा। आम नागरिक के लिए इस योजना में कोई फॉर्म भरने या आवेदन करने की बात नहीं है। इसका असर परोक्ष होगा: महँगाई, रोज़गार और विकास के आँकड़े ज़्यादा तेज़ी और बारीकी से आएँगे, और नीतियाँ उन्हीं आँकड़ों पर बनेंगी।

अभी क्या तय नहीं हुआ

PIB की विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया है कि ₹4,371.10 करोड़ में से हर घटक को कितना मिलेगा। 8वीं आर्थिक गणना का मैदानी काम कब शुरू होगा, इसकी तारीख भी विज्ञप्ति में नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार सांख्यिकी सचिव ने दिसंबर 2025 में कहा था कि गणना 2027 में होगी, जनगणना के बाद। यह तारीख अभी सरकारी विज्ञप्ति में दर्ज नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले हुई सातवीं आर्थिक गणना के नतीजे सार्वजनिक नहीं हुए थे, इसलिए आठवीं गणना के आँकड़े कब और कैसे आएँगे, इस पर भी नज़र रहेगी। योजना की सफलता इस बात से मापी जाएगी कि सर्वे समय पर पूरे होते हैं या नहीं और आँकड़े कितनी जल्दी जारी होते हैं।

शब्दावली

  • MoSPI: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, देश के सरकारी आँकड़ों का नोडल मंत्रालय।
  • 16वाँ वित्त आयोग चक्र: वित्त आयोग की सिफारिशों से जुड़ा पाँच साल का चक्र, जिसमें सर्वे की योजना बनती है।
  • PLFS: Periodic Labour Force Survey, रोज़गार से जुड़ा बड़ा सर्वे।
  • HCES: Household Consumption Expenditure Survey, घरेलू खर्च का सर्वे।
  • ASUSE: Annual Survey of Unincorporated Sector Enterprises, असंगठित उद्यमों का सर्वे।
  • आर्थिक गणना: देश के सभी गैर-कृषि प्रतिष्ठानों और उनमें काम करने वालों की गिनती।
  • SBR: Statistical Business Register, उद्यमों का राष्ट्रीय रजिस्टर।

आगे क्या देखना होगा

अगले कदमों में तीन बातें देखने लायक हैं। पहली, 8वीं आर्थिक गणना के मैदानी काम की तारीख और तरीका कब घोषित होता है। दूसरी, राज्यों को SSS 2.0 के तहत पहला धन कब मिलता है और जिला स्तर के अनुमान कब जारी होते हैं। तीसरी, नए सेवा उत्पादन सूचकांक और असंगठित क्षेत्र सूचकांक कब जारी होते हैं। इन तीनों पर ही यह तय होगा कि VISTAR कागज़ पर बनी योजना रहती है या आँकड़ों की व्यवस्था वाकई बदलती है। 📷 Illustration: AI-generated

Questions people ask

VISTAR scheme kya hai?
VISTAR का पूरा नाम Viksit Bharat Initiative for Statistical Transformation, Analytics and Research है। यह सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की योजना है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने 4 नवंबर 2026 को मंज़ूरी दी। इसका मकसद सरकारी आँकड़ा व्यवस्था को तेज़, बारीक, एक-दूसरे से जुड़ी और AI के लिए तैयार बनाना है, ताकि नीतियाँ बेहतर आँकड़ों पर बनें।
VISTAR योजना में कितना पैसा खर्च होगा?
कुल ₹4,371.10 करोड़ खर्च होंगे, वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक, यानी पाँच साल में। यह रकम सर्वे, राज्यों की सांख्यिकीय क्षमता और 8वीं आर्थिक गणना पर खर्च होगी। PIB की विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया है कि हर घटक को कितना मिलेगा, इसलिए घटक-वार बँटवारा अभी तय नहीं है।
8वीं आर्थिक गणना कब होगी?
PIB की विज्ञप्ति में 8वीं आर्थिक गणना के मैदानी काम की तारीख नहीं दी गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार सांख्यिकी सचिव ने दिसंबर 2025 में कहा था कि गणना 2027 में होगी, जनगणना के बाद। यह तारीख अभी सरकारी विज्ञप्ति में दर्ज नहीं है, इसलिए आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार करना होगा।
VISTAR योजना से किसे फायदा होगा?
राज्य सरकारों को जिला स्तर के आँकड़े मिलने से योजनाएँ ज़्यादा सटीक बनेंगी। शोधकर्ताओं और छात्रों को इंटर्नशिप व शोध प्रस्तावों के मौके मिलेंगे। नीति बनाने वालों को 8वीं आर्थिक गणना से असंगठित क्षेत्र की पूरी तस्वीर मिलेगी। आम नागरिक को फायदा परोक्ष होगा, क्योंकि महँगाई, रोज़गार और विकास के आँकड़े तेज़ी व बारीकी से आएँगे।
MoSPI क्या है और VISTAR उससे कैसे जुड़ा है?
MoSPI यानी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय देश के सरकारी आँकड़ों का नोडल मंत्रालय है। VISTAR इसी मंत्रालय की योजना है और इसके सभी सांख्यिकीय व डेटा प्रबंधन कार्यों को एक ढाँचे में लाती है। इसका मकसद मंत्रालय के सर्वे, राज्यों की मदद और आर्थिक गणना को मज़बूत करना है।

Sources

  1. Cabinet approves VISTAR Scheme (PIB) (pib.gov.in)
  2. VISTAR scheme: what Rs 4,371 crore means for India's data (wirony.com)
  3. VISTAR Statistical Reform and The Test of Data Quality (abclive.in)
  4. Cabinet clears Rs 4,371-crore VISTAR scheme (thebusinessbytes.com)
  5. Cabinet approves scheme to promote processing of critical minerals (incl. VISTAR) (thehindubusinessline.com)
  6. India funds a new Economic Census; the last one was never published (transclew.com)

Editorial note: This story was researched from public sources and drafted with the help of AI tools. It was then read, checked against those sources and approved by the Gagariya editorial team before publication. How we work.

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