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UPI पर ₹2,000 से ऊपर भी दुकानदार आपसे फीस नहीं ले सकता

By Gagariya Editorial Desk•Published 6 Nov 2026 IST•5 min read•Reviewed by the Gagariya editorial team
UPI पर ₹2,000 से ऊपर भी दुकानदार आपसे फीस नहीं ले सकता
Photo: Own or licensed by the publisher

3 नवंबर को National Payments Corporation of India (NPCI) ने सुप्रीम कोर्ट में 100 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया। इसमें कहा गया है कि ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान पर लगने वाला Merchant Discount Rate (MDR) दुकानदार ग्राहक से नहीं वसूल सकता। यह रोक बाध्यकारी निर्देश है, सिर्फ भरोसा नहीं।

MDR कितना लगेगा, किस पर लगेगा

NPCI के हलफनामे के मुताबिक, 0.4% से ज्यादा MDR नहीं लगेगा, और वह भी सिर्फ ₹2,000 से ऊपर के दुकानदार भुगतानों (P2M) पर। इससे कुल दुकानदार लेनदेन का करीब 4% ही प्रभावित होगा, बाकी करीब 96% पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। व्यक्ति से व्यक्ति को भेजा गया पैसा (P2P) किसी भी रकम पर मुफ्त रहेगा।

छोटे दुकानदारों को भी छूट है: जो दुकानदार UPI QR से महीने में ₹1 लाख तक पाते हैं, वे P2PM श्रेणी में आते हैं और उन पर MDR नहीं लगेगा। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि आदान में ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर ₹5 का फ्लैट शुल्क लगेगा। शेयर-ब्रोकर जैसे पूंजी बाजार के भुगतानों पर 0.02% लगेगा, जिसकी ऊपरी सीमा ₹300 है। वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक, सामान्य भुगतानों पर शुल्क ₹300 से ऊपर नहीं जाएगा, यानी ₹75,000 या उससे बड़े भुगतान पर भी ₹300 ही देना होगा।

भुगतान MDR
₹2,000 तक, किसी भी दुकानदार को मुफ्त
₹2,000 से ऊपर, सामान्य दुकानदार 0.4%, अधिकतम ₹300
₹2,000 से ऊपर, रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन, कृषि आदान ₹5 फ्लैट
₹2,000 से ऊपर, पूंजी बाजार 0.02%, अधिकतम ₹300
व्यक्ति से व्यक्ति (P2P), कोई भी रकम मुफ्त
छोटा दुकानदार (महीने में ₹1 लाख तक) मुफ्त

ग्राहक से पैसा वसूला तो क्या होगा

NPCI ने हलफनामे में साफ किया है कि MDR ग्राहक पर न डालने का निर्देश बैंकों और UPI सेवा देने वाली कंपनियों पर बाध्यकारी है। उल्लंघन करने वाला बैंक, पेमेंट ऐप या थर्ड-पार्टी ऐप अपने समझौते का उल्लंघन करेगा और उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, जिसमें UPI सदस्यता और सुविधाएँ खत्म करना भी शामिल है।

NPCI ने कहा है कि UPI ऐप चलाने वाली कंपनियाँ ग्राहकों से प्लेटफॉर्म फीस या कोई और शुल्क नहीं ले सकतीं।

हिसाब: ₹3,000 के भुगतान पर कितना शुल्क

0.4% पूरे भुगतान पर लगता है, सिर्फ ₹2,000 से ऊपर वाले हिस्से पर नहीं। ₹3,000 पर दुकानदार को ₹12, ₹10,000 पर ₹40 और ₹50,000 पर ₹200 देना होगा। ₹75,000 पर 0.4% ठीक ₹300 होता है, इसलिए उससे बड़े हर भुगतान पर भी शुल्क ₹300 ही रहेगा। ₹2,000 के भुगतान पर शून्य। यह रकम दुकानदार देगा, ग्राहक नहीं।

NPCI का तर्क: मुफ्त UPI अब नहीं चल सकता

NPCI का कहना है कि UPI का मुफ्त मॉडल अब टिकाऊ नहीं रहा। अगस्त 2026 में UPI से 24.51 अरब लेनदेन हुए, कीमत ₹29.82 लाख करोड़। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 241.62 अरब लेनदेन हुए, कीमत ₹314 लाख करोड़।

संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने कहा था कि 2026-27 का ₹2,000 करोड़ का आवंटन उद्योग की असली लागत का सिर्फ 11% और संभावित MDR वसूली का 14% ही पूरा करता है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, उद्योग की सालाना परिचालन लागत ₹20,700 करोड़ है। समिति ने आत्मनिर्भर और स्तरबद्ध राजस्व मॉडल की सिफारिश की थी।

NPCI का कहना है कि MDR कोई टैक्स या सरकारी वसूली नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था चलाने की लागत है, जो हिस्सेदारों में बंटती है। छोटे दुकानदारों को UPI से जोड़ने के लिए एक फंड भी बनेगा, जिसमें हर संस्था अपने MDR हिस्से का 5% देगी। यह फंड ₹20 लाख तक सालाना टर्नओवर वाले दुकानदारों के लिए होगा।

मामला कोर्ट में कैसे पहुंचा

यह मामला Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है। संशोधन Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 से हुआ, फिर वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर को अधिसूचना जारी की और NPCI ने सर्कुलर से MDR ढांचा लागू किया। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को अंतरिम रोक से इनकार कर दिया था और केंद्र व NPCI से जवाब मांगा था।

NPCI ने शुरुआती आपत्ति भी उठाई है कि वह संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य नहीं है, इसलिए उसके खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत याचिका नहीं चल सकती। उसका कहना है कि Payment and Settlement Systems Act की धाराएँ 20 और 21 उसे शुल्क तय करने का अधिकार देती हैं। RBI ने अगस्त 2016 में उसे UPI चलाने के लिए अधिकृत किया था।

टाइमलाइन

  • 14 सितंबर 2026: वित्त मंत्रालय की अधिसूचना
  • NPCI का सर्कुलर, MDR ढांचा जारी; शुरुआत 15 अक्टूबर तय
  • 28 सितंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक से इनकार किया
  • 13 अक्टूबर 2026: UPI स्टीयरिंग कमेटी ने दिवाली के बाद तक टाला
  • 3 नवंबर 2026: NPCI ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया
  • 8 नवंबर 2026: दिवाली

एक मतभेद: 70% का आंकड़ा

70% का आंकड़ा दो जगह अलग तरह से लिखा गया है। एक जगह कहा गया है कि कुल UPI लेनदेन में करीब 70% व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन हैं। दूसरी जगह यही 70% कुल लेनदेन की कीमत के हिस्से के रूप में बताया गया है। किसी एक को अंतिम नहीं कहा जा सकता, पर P2P हिस्सा बड़ा है और वह मुफ्त रहेगा।

ग्राहकों और दुकानदारों के लिए जरूरी बातें

  • ₹2,000 तक का हर UPI भुगतान मुफ्त रहेगा।
  • ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर ग्राहक को कुछ नहीं देना; शुल्क दुकानदार देगा।
  • कोई दुकानदार या ऐप आपसे UPI पर अलग से फीस या प्लेटफॉर्म चार्ज नहीं मांग सकता।
  • महीने में ₹1 लाख तक UPI से पाने वाले छोटे दुकानदार पूरी तरह मुक्त हैं।

आगे क्या होगा

दिवाली 8 नवंबर को है, और NPCI कह चुका है कि MDR दिवाली के तुरंत बाद लागू होगा, तारीख अलग से बताई जाएगी। हलफनामे के समय तक कोई नई तारीख घोषित नहीं हुई थी। पहले NPCI की नई तारीख की घोषणा, फिर सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका की अगली सुनवाई पर नजर रहेगी।

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📷 फोटो: Shalu Sharma, Wikimedia Commons (CC BY 2.0)

Questions people ask

क्या UPI से भुगतान पर अब ग्राहक को फीस देनी होगी?
नहीं। NPCI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि MDR दुकानदार देगा, ग्राहक से इसे वसूला नहीं जा सकता। UPI ऐप कंपनियाँ ग्राहकों से प्लेटफॉर्म फीस भी नहीं ले सकतीं।
₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर कितना शुल्क लगेगा?
0.4%, अधिकतम ₹300। ₹3,000 के भुगतान पर ₹12, ₹50,000 पर ₹200 और ₹75,000 या उससे ऊपर के हर भुगतान पर ₹300 लगेगा। यह शुल्क दुकानदार देगा।
छोटे दुकानदारों पर MDR लागू होगा?
नहीं। जो दुकानदार UPI QR से महीने में ₹1 लाख तक पाते हैं, वे P2PM श्रेणी में आते हैं और उन पर MDR नहीं लगेगा।
MDR कब से लागू होगा?
पहले 15 अक्टूबर तय था, फिर 13 अक्टूबर को इसे दिवाली के बाद तक टाल दिया गया। दिवाली 8 नवंबर को है, लेकिन लागू होने की नई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
अगर दुकानदार UPI पर अलग से फीस मांगे तो क्या करें?
NPCI के निर्देश के मुताबिक दुकानदार ऐसा नहीं कर सकता। उल्लंघन पर बैंक या पेमेंट ऐप के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, जिसमें UPI सदस्यता खत्म करना भी शामिल है।

Editorial note: This story was researched from public sources and drafted with the help of AI tools. It was then read, checked against those sources and approved by the Gagariya editorial team before publication. How we work.

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