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कैबिनेट: ₹14,500 करोड़ से 92 GWh एनर्जी स्टोरेज

By Gagariya Editorial Desk•Published 6 Nov 2026 IST•4 min read•Reviewed by the Gagariya editorial team
कैबिनेट: ₹14,500 करोड़ से 92 GWh एनर्जी स्टोरेज
Photo: Own or licensed by the publisher

92 GWh नई भंडारण क्षमता आज की कुल ग्रिड-स्तर क्षमता की करीब 170% है — कैबिनेट ने 4 नवंबर 2026 को इसे बनाने के लिए ₹14,500 करोड़ की Viability Gap Funding योजना को मंज़ूरी दी। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसले की जानकारी दी।

बात सीधी है। सूरज दिन में चमकता है और हवा कभी भी चल सकती है, पर बिजली की ज़रूरत रात में भी उतनी ही रहती है। भंडारण वह पुल है जो दिन की सौर बिजली को रात तक पहुँचाता है। अभी भारत के पास इस पुल की क्षमता कम है, और कैबिनेट का फैसला उसी कमी को भरने का है।

कैबिनेट ने क्या मंज़ूर किया

योजना का नाम है Viability Gap Funding Scheme for Development of Grid-Scale Energy Storage Systems। सरकार वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच ₹14,500 करोड़ की मदद देगी। मदद उन्हीं परियोजनाओं को मिलेगी जो अभी चालू नहीं हुई हैं, यानी 92 GWh पूरी तरह नई क्षमता होगी।

इसमें कुल करीब ₹97,600 करोड़ का निवेश आने का अनुमान है। यानी सरकार की हर ₹1 मदद के पीछे करीब ₹6.70 का कुल निवेश आएगा। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियाँ (डिस्कॉम) बैटरी और पंप्ड हाइड्रो, दोनों तरह की परियोजनाओं के लिए इस मदद की पात्र होंगी।

92 GWh का बँटवारा

तकनीक क्षमता
हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज (PSP) 60 GWh
बैटरी एनर्जी स्टोरेज (BESS) 30 GWh
वैकल्पिक तकनीक 2 GWh
कुल 92 GWh

सबसे बड़ा हिस्सा पंप्ड हाइड्रो का है। इसमें पानी को नीचे के जलाशय से ऊपर पंप किया जाता है और ज़रूरत पड़ने पर नीचे गिराकर बिजली बनाई जाती है। बैटरी का हिस्सा 30 GWh है, और 2 GWh उन तकनीकों के लिए रखा गया है जो अभी नई हैं।

पहले क्या था, अब क्या बदलेगा

विज्ञप्ति के अनुसार 92 GWh की नई क्षमता देश की मौजूदा ग्रिड-स्तर भंडारण क्षमता की करीब 170% है। इस हिसाब से आज की क्षमता करीब 54 GWh बैठती है, यानी पाँच साल में भंडारण क्षमता करीब 2.7 गुना हो जाएगी।

2031-32 तक देश को 411 GWh भंडारण क्षमता की ज़रूरत पड़ेगी। नई योजना उस ज़रूरत का करीब पाँचवाँ हिस्सा पूरा करेगी — बाकी के लिए और योजनाएँ या निजी निवेश चाहिए होगा।

पहले की बैटरी VGF योजनाओं की रफ़्तार धीमी रही है। संसद में दिए गए जवाब के अनुसार 23 जुलाई 2026 तक पहले की योजनाओं में 13.8 GWh क्षमता पर काम आगे बढ़ा था, जिसमें से सिर्फ 0.5 GWh चालू हो पाई थी। नई योजना का दायरा उससे कई गुना बड़ा है, इसलिए इसकी बोली और क्रियान्वयन पर नज़र रहेगी।

बिजली बिल और आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा

सीधा असर तीन जगह दिखेगा। पहला, घरों और दुकानों के लिए: जब सौर बिजली दिन में बनती है और रात में इस्तेमाल हो पाती है, तो बिजली कंपनियों को महंगी पीक-आवर बिजली कम खरीदनी पड़ती है। लंबी अवधि में यही बचत दरों पर दबाव कम कर सकती है। पर यह असर तुरंत नहीं दिखेगा; क्षमता 2030-31 तक बनेगी।

दूसरा, रिन्यूएबल डेवलपरों के लिए: भंडारण के साथ सौर और पवन परियोजनाएँ ज़्यादा भरोसेमंद हो जाती हैं, क्योंकि उनकी बिजली अब सिर्फ धूप या हवा के घंटों तक सीमित नहीं रहती।

तीसरा, राज्यों के लिए: जिन राज्यों में सौर और पवन क्षमता ज़्यादा है, वहाँ भंडारण से ग्रिड स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

बैटरी परियोजनाओं में एक शर्त भी है — कम से कम 40% घरेलू सामग्री इस्तेमाल करनी होगी। इससे भारतीय बैटरी निर्माताओं को काम मिलेगा, पर परियोजना की लागत पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह बोली के नतीजों से ही पता चलेगा। क्षमता का आवंटन टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली से होगा, यानी सबसे कम टैरिफ देने वाली परियोजना को पहले मौका मिलेगा।

लिथियम-निकेल की ₹2,814 करोड़ वाली योजना

उसी कैबिनेट बैठक में एक दूसरी योजना भी मंज़ूर हुई — क्रिटिकल मिनरल प्रसंस्करण के लिए ₹2,814 करोड़ की Capex Support Scheme। इसके तहत चार संयंत्र लगेंगे: दो लिथियम और दो निकेल के।

लिथियम संयंत्र की कम से कम क्षमता 30 किलो टन होगी और उसे अधिकतम ₹500 करोड़ की मदद मिलेगी। निकेल संयंत्र की कम से कम क्षमता 50 किलो टन होगी, अधिकतम मदद ₹900 करोड़। निकेल संयंत्र से कोबाल्ट भी उप-उत्पाद के रूप में मिलेगा। दोनों धातुओं पर पात्र निवेश की 30% पूंजी सब्सिडी मिलेगी।

दोनों योजनाएँ एक ही कड़ी से जुड़ी हैं। भंडारण के लिए बैटरी चाहिए, बैटरी के लिए लिथियम और निकेल चाहिए, और आज भारत इन धातुओं के प्रसंस्करण के लिए आयात पर निर्भर है। भंडारण की योजना माँग बनाएगी और मिनरल योजना आपूर्ति की घरेलू जड़ें मजबूत करेगी। यह योजना राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत आती है।

शब्दावली

  • VGF (Viability Gap Funding): सरकार की वह मदद जो किसी परियोजना को आर्थिक रूप से चलने लायक बनाती है, जब परियोजना अपने दम पर मुनाफ़ा नहीं दे सकती।
  • GWh (गीगावाट-घंटा): ऊर्जा की इकाई।
  • BESS: बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम — बैटरी में बिजली जमा करके बाद में इस्तेमाल करना।
  • पंप्ड हाइड्रो (PSP): पानी को ऊपर पंप करके ऊर्जा जमा करना और ज़रूरत पर टरबाइन से बिजली बनाना।
  • क्रिटिकल मिनरल: वे खनिज जो बैटरी, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए ज़रूरी हैं और जिनकी आपूर्ति कुछ ही देशों के हाथ में है।

पहली बोली और चार संयंत्र: क्या देखना होगा

पहली बोली कब निकलेगी, यह अब सबसे बड़ा सवाल है। योजना वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होगी, इसलिए बोली की रूपरेखा और दिशा-निर्देश अगले कुछ महीनों में आने चाहिए। चारों मिनरल संयंत्र कहां लगेंगे और उन्हें कौन सी कंपनियाँ चलाएँगी, यह भी अभी घोषित नहीं हुआ है।

gagariya बोली के ऐलान और पहले आवंटन पर नज़र रखेगा। जब तक पहली परियोजनाएँ चालू नहीं होतीं, यह योजना कागज़ पर एक बड़ा वादा है — असली परीक्षा पहली बोलियों से शुरू होगी।

📷 फोटो: Takver, Wikimedia Commons (CC BY-SA 2.0) — वेल्स का डिनॉर्विग पंप्ड-हाइड्रो संयंत्र, तकनीक का उदाहरण

Questions people ask

VGF क्या है?
Viability Gap Funding सरकार की वह आर्थिक मदद है जो किसी ज़रूरी परियोजना को चलने लायक बनाती है, जब वह अपने दम पर मुनाफ़ा नहीं दे सकती। इस योजना में सरकार ₹14,500 करोड़ देगी और बाकी निवेश निजी और सार्वजनिक कंपनियों से आएगा।
92 GWh क्षमता कितनी बड़ी है?
यह देश की मौजूदा ग्रिड-स्तर भंडारण क्षमता की करीब 170% है। इस हिसाब से आज की क्षमता करीब 54 GWh है, और पाँच साल में यह करीब 2.7 गुना हो जाएगी। फिर भी 2031-32 तक ज़रूरी 411 GWh का यह करीब पाँचवाँ हिस्सा ही है।
मेरे बिजली बिल पर क्या असर पड़ेगा?
तुरंत कोई असर नहीं। क्षमता 2030-31 तक बनेगी। लंबी अवधि में भंडारण से बिजली कंपनियों को महंगी पीक-आवर बिजली कम खरीदनी पड़ेगी, जिससे दरों पर दबाव कम हो सकता है।
बैटरी में 40% घरेलू सामग्री की शर्त क्यों है?
इससे भारतीय बैटरी निर्माताओं को काम मिलेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी। पर इससे परियोजना की लागत पर क्या असर पड़ेगा, यह बोली के नतीजों से पता चलेगा।
लिथियम-निकेल योजना का भंडारण से क्या लेना-देना है?
बैटरी बनाने के लिए लिथियम और निकेल चाहिए। भारत आज इनके प्रसंस्करण के लिए आयात पर निर्भर है। ₹2,814 करोड़ की योजना से चार घरेलू संयंत्र लगेंगे — दो लिथियम और दो निकेल के।

Sources

  1. PIB release: Cabinet approves VGF scheme for 92 GWh grid-scale energy storage, 4 Nov 2026 — via The Hindu BusinessLine (thehindubusinessline.com)
  2. The Hindu BusinessLine: Cabinet approves scheme to promote processing of critical minerals (thehindubusinessline.com)
  3. IANS: Cabinet okays Rs 14,500 crore viability gap funding for grid-scale energy storage systems (ianslive.in)
  4. EnergyWatch: Cabinet approves Rs 14,500 cr viability gap funding for 92 GWh grid-scale energy storage (energywatch.in)
  5. WebIndia123: Cabinet approves Rs 2,814-crore capex scheme for domestic lithium and nickel processing (news.webindia123.com)
  6. Lok Sabha Unstarred Q.697 — Implementation of VGF Scheme for BESS, Ministry of Power (23 July 2026) (sansad.in)

Editorial note: This story was researched from public sources and drafted with the help of AI tools. It was then read, checked against those sources and approved by the Gagariya editorial team before publication. How we work.

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