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प्रलय मिसाइल परीक्षण सफल, सेना में शामिल होने के करीब

By Gagariya Editorial Desk•Published 6 Nov 2026 IST•4 min read•Reviewed by the Gagariya editorial team
प्रलय मिसाइल परीक्षण सफल, सेना में शामिल होने के करीब
Photo: Own or licensed by the publisher

5 नवंबर 2026 की सुबह 11:10 बजे, ओडिशा तट के पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एक मिसाइल उठी और अपने तय लक्ष्य की ओर बढ़ गई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार प्रलय मिसाइल के इस परीक्षण में सभी तय उद्देश्य पूरे हुए। चांदीपुर स्थित Integrated Test Range के instruments से मिले data ने परीक्षण की सफलता की पुष्टि की।

क्या हुआ

यह परीक्षण user evaluation trials के तहत हुआ, यानी अब मिसाइल को वे लोग परख रहे हैं जो उसे इस्तेमाल करेंगे। परीक्षण के दौरान वरिष्ठ DRDO अधिकारी, रक्षा उद्योग के प्रतिनिधि और सशस्त्र बलों के जवान मौजूद थे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस सफल परीक्षण के बाद मिसाइल का सशस्त्र बलों में शामिल होना अब करीब है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, सशस्त्र बलों और उद्योग साझेदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मिसाइल की उन्नत तकनीकें उभरते खतरों के खिलाफ सेना की तकनीकी क्षमता और तैयारी को मजबूत करेंगी। अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भी परीक्षण में शामिल टीमों को बधाई दी।

प्रलय क्या है

प्रलय एक स्वदेशी, solid-propellant, canisterised, surface-to-surface quasi-ballistic मिसाइल है। इसे हैदराबाद स्थित Research Centre Imarat (RCI) ने अन्य DRDO प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर विकसित किया है। Bharat Dynamics Limited (BDL) इसका development-cum-production partner है और इसने system का निर्माण किया है।

Quasi-ballistic का मतलब है कि यह मिसाइल पारंपरिक ballistic मिसाइल की तरह ऊंची चाप में नहीं उड़ती। यह निचली ऊंचाई पर उड़ती है और उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है, जिससे दुश्मन की air-defence के लिए इसे रोकना कठिन हो जाता है। इसमें advanced guidance और navigation तकनीक लगी है, जिससे यह सटीक हमला कर सकती है।

कार्यक्रम के घोषित आंकड़ों के अनुसार प्रलय की रेंज 150 से 500 km है, यह 500 से 1,000 kg तक का payload ले जा सकती है और terminal speed Mach 6.1 तक पहुंच सकती है। एक बात साफ रहे: ये आंकड़े कार्यक्रम के घोषित आंकड़े हैं। इस उड़ान के लिए रक्षा मंत्रालय ने कोई अलग रेंज या payload आंकड़ा जारी नहीं किया है।

यह परीक्षण क्यों अहम है

पहली बात, user evaluation trials का मतलब है कि मिसाइल अब विकास के आखिरी चरण में है। जब सेना खुद किसी हथियार का परीक्षण करती है, तो वह induction से पहले का कदम होता है।

दूसरी बात, प्रलय भारत की conventional precision-strike क्षमता को मजबूत करती है। यह मिसाइल mobile launcher से छोड़ी जा सकती है, जिससे इसे ले जाना और तैनात करना आसान होता है।

तीसरी बात, यह आत्मनिर्भर भारत की कहानी है। मिसाइल स्वदेशी है, इसे हैदराबाद की प्रयोगशाला ने बनाया है और इसका उत्पादन भारतीय कंपनी कर रही है।

2021 से 2026 तक क्या बदला

प्रलय का पहला उड़ान परीक्षण 22 दिसंबर 2021 को भी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ही हुआ था। तब यह एक विकासात्मक परीक्षण था; 5 नवंबर 2026 का परीक्षण user evaluation trials के तहत हुआ, यानी अब मिसाइल को सेना के इस्तेमाल के लिहाज़ से परखा जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सभी तय उद्देश्य पूरे हुए, इसलिए induction अब पहले से कहीं करीब है — लेकिन औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।

समयरेखा

  • 22 दिसंबर 2021: प्रलय का पहला उड़ान परीक्षण, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से। मिसाइल ने तय quasi-ballistic रास्ता अपनाया और लक्ष्य को सटीकता से भेदा।
  • 5 नवंबर 2026: user evaluation trials के तहत सफल परीक्षण, सुबह 11:10 बजे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सभी तय उद्देश्य पूरे हुए और induction अब करीब है।

शब्दावली

  • Quasi-ballistic मिसाइल: ऐसी मिसाइल जो ballistic मिसाइल जैसी ऊंची चाप में नहीं, बल्कि निचली ऊंचाई पर उड़ती है और रास्ता बदल सकती है।
  • Canisterised: मिसाइल एक sealed container में रखी जाती है, जिससे उसे संभालना, ले जाना और छोड़ना आसान होता है।
  • User evaluation trials: वह परीक्षण जिसमें सेना खुद हथियार को परखती है, ताकि induction से पहले उसकी क्षमता जांची जा सके।

आगे क्या

अब सबकी नजर induction की औपचारिक घोषणा पर है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि induction करीब है, लेकिन कोई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। जब घोषणा होगी, तो यह साफ होगा कि प्रलय पहले सेना में शामिल होगी या वायुसेना में, और BDL को कितने system बनाने हैं। तब तक यह परीक्षण इस बात का संकेत है कि भारत की स्वदेशी मिसाइल क्षमता अब तैनाती के दरवाजे पर खड़ी है।

स्रोत

📷 फोटो: Ministry of Defence, Government of India, Wikimedia Commons (GODL-India) — यह तस्वीर 22 दिसंबर 2021 के प्रलय परीक्षण की है, 5 नवंबर 2026 के परीक्षण की नहीं।

Questions people ask

प्रलय मिसाइल क्या है?
यह DRDO की स्वदेशी, solid-propellant, canisterised, surface-to-surface quasi-ballistic मिसाइल है। इसे हैदराबाद की RCI ने विकसित किया है और BDL इसका उत्पादन साझेदार है।
5 नवंबर का परीक्षण क्यों खास था?
यह user evaluation trials के तहत हुआ, यानी अब सेना खुद मिसाइल को परख रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सभी तय उद्देश्य पूरे हुए और induction अब करीब है।
प्रलय की रेंज कितनी है?
कार्यक्रम के घोषित आंकड़ों के अनुसार रेंज 150 से 500 km है और payload 500 से 1,000 kg तक है। इस उड़ान के लिए मंत्रालय ने कोई अलग आंकड़ा जारी नहीं किया है।
मिसाइल सेना में कब शामिल होगी?
रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि induction करीब है, लेकिन कोई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। औपचारिक घोषणा का इंतजार है।

Editorial note: This story was researched from public sources and drafted with the help of AI tools. It was then read, checked against those sources and approved by the Gagariya editorial team before publication. How we work.

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