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साइबर ठगी पर मोदी: GSMA के साथ ग्लोबल तंत्र की अपील

By Gagariya Editorial Desk•9 Oct 2026 IST•6 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
साइबर ठगी पर मोदी: GSMA के साथ ग्लोबल तंत्र की अपील
Photo: Own or licensed by the publisher

मोदी की अपील: ठगी लोगों तक पहुंचने से पहले रुके

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के दसवें संस्करण का उद्घाटन किया। 'स्केल विदाउट बाउंड्रीज़' थीम वाले इस कार्यक्रम का आयोजन दूरसंचार विभाग और सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने मिलकर किया था। मंच से मोदी ने साइबर ठगी और डीपफेक जैसे डिजिटल खतरों से निपटने के लिए दुनिया को एक साझा ढांचे में लाने की बात कही। उनका कहना था कि सरकारों, टेक कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और वित्तीय संस्थानों को मिलकर एक ऐसा ग्लोबल तंत्र बनाना होगा जो डिजिटल धोखाधड़ी को जड़ से रोके।

उन्होंने सीधे GSMA और दुनिया भर के टेलीकॉम ऑपरेटरों को संबोधित किया। मोदी ने कहा, "मैं GSMA और दुनिया भर के टेलीकॉम ऑपरेटरों से आग्रह करता हूं: आइए, एक ऐसा ग्लोबल तंत्र बनाएं जो ठगी को लोगों तक पहुंचने से पहले रोक सके। भारत ने इस दिशा में काफी कुछ सीखा है, और भारत अपने अनुभव दुनिया से साझा करने के लिए हमेशा तैयार है।" उनका संदेश साफ था। टेक्नोलॉजी को स्केल तभी मिलती है, जब उसे लोगों का भरोसा मिलता है। ठगी से टूटा भरोसा डिजिटल इंडिया की नींव को ही हिला देता है।

सीमाएं तोड़ चुका अपराध

मोदी ने साइबर अपराध की नई भूगोल को एक ही वाक्य में समझाया। "एक देश में बैठा व्यक्ति, दूसरे देश के व्यक्ति की मदद से, तीसरे देश में अपराध कर सकता है।" उन्होंने कहा कि साइबर ठगी और साइबर अपराध सीमाएं नहीं मानते। ये सीमाएं पार कर चुके हैं। इसलिए ठगी रोकने का काम किसी एक देश की पुलिस या एक बैंक की क्षमता से बाहर हो चुका है।

डीपफेक पर उनकी चिंता खास थी। "हम देख रहे हैं कि डीपफेक कितनी बड़ी चुनौती बन गए हैं," मोदी ने कहा। उनका कहना था कि इन उभरते खतरों से निपटने के लिए देशों को ग्लोबल फ्रेमवर्क पर मिलकर काम करना होगा। आम उपयोगकर्ता के लिए डिजिटल भरोसे का मतलब भी उन्होंने रोजमर्रा की भाषा में बताया: फोन पर बोलने वाले की पहचान पता हो, संदेश असली है या नकली इसका पता चले, पेमेंट सुरक्षित हो और निजी डेटा भी सुरक्षित रहे।

भारत के अनुभव का जिक्र मोदी ने यूं ही नहीं किया। इसके पीछे एक ठोस कहानी है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार दूरसंचार विभाग ने मई 2025 में फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) लॉन्च किया था। इस टेलीकॉम-आधारित जोखिम प्रणाली ने बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्मों को 15 महीनों में 5,043.7 करोड़ रुपये के संदिग्ध धोखाधड़ी वाले लेनदेन रोकने में मदद की। प्रणाली मोबाइल नंबरों को मीडियम, हाई या वेरी हाई रिस्क रेटिंग देती है। चेतावनी सीधे बैंकों और UPI प्लेटफॉर्मों को मिलती है, ताकि वे ग्राहक को आगाह कर सकें या जोखिम भरे पेमेंट को रोक सकें। सूचना संचार साथी प्लेटफॉर्म और I4C के नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की शिकायतों के साथ टेलीकॉम और वित्तीय संस्थानों की खुफिया जानकारी जोड़ी जाती है। यह सब दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के जरिए साझा होता है, जिससे 1,600 से ज्यादा संगठन जुड़े हैं।

5G हर जिले तक, स्पीड दस गुनी

मोदी ने उसी मंच की याद दिलाई जहां से 2022 में 5G लॉन्च हुआ था और 2023 में इसके बड़े विस्तार की भविष्यवाणी की गई थी। उन्होंने घोषणा की कि 5.5 लाख से ज्यादा बेस स्टेशनों वाला 5G नेटवर्क अब देश के हर जिले तक पहुंच गया है। इंटरनेट की स्पीड दस गुना बढ़ गई है। यह वह आंकड़ा है जिसे सरकार अपनी डिजिटल कहानी के केंद्र में रखती है।

'कंज्यूमर से क्रिएटर' तक का दावा

उनका कहना था कि भारत अब टेक्नोलॉजी का सिर्फ उपभोक्ता नहीं रहा। बिज़नेसलाइन के अनुसार मोदी ने कहा कि देश अब पूरी ताकत से प्रोडक्ट डिजाइन, बुनियादी टेक्नोलॉजी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी पर घरेलू नियंत्रण की ओर बढ़ रहा है। यह दावा भारत के टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण की बदलती तस्वीर से जुड़ा है।

सुधारों पर बोलते हुए मोदी ने 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का जिक्र किया। उनके मुताबिक दशकों पुराने टेलीकॉम कानूनों का आधुनिकीकरण हुआ है और टेलिकॉम्युनिकेशंस एक्ट के जरिए आधुनिक नियामक ढांचा बनाया गया है। AGR और बैंक गारंटी जैसे संरचनात्मक बोझ को तर्कसंगत बनाने पर काम हो रहा है। गति शक्ति संचार पोर्टल ने राइट-ऑफ-वे की मंजूरियों को डिजिटल माध्यम से तेज किया है। मोदी ने कहा कि IMC को उन साझेदारियों, रिसर्च प्रोजेक्टों, उत्पादों और इनोवेशनों के लिए याद रखा जाना चाहिए जो यहां से दुनिया के लिए निकले।

सिंधिया के आंकड़े: 2030 तक एक अरब 5G यूजर

कार्यक्रम में मौजूद संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लक्ष्य बड़ा रखा। द हिंदू के अनुसार उन्होंने कहा कि भारत का 5G यूजर बेस 55 करोड़ से बढ़ाकर 2030 तक एक अरब किया जाएगा। सिंधिया का कहना था कि 4G में भारत दुनिया से पीछे था, 5G में दुनिया के साथ चला, और 6G में दुनिया का नेतृत्व करने का संकल्प है।

टेलीकॉम का मोर्चा 2014 आज
ब्रॉडबैंड ग्राहक 6 करोड़ 110 करोड़ से ज्यादा
मोबाइल ग्राहक … 135 करोड़
1GB डेटा की कीमत ₹268 ₹8 (दुनिया में सबसे सस्ती)
मोबाइल फोन उद्योग 2-3 अरब डॉलर 63 अरब डॉलर

(स्रोत: IMC 2026 में सिंधिया के बयान, द हिंदू के अनुसार)

6G को लेकर सिंधिया ने बताया कि भारत 6G एलायंस में 90 संस्थान शामिल हैं। अब तक 7,700 पेटेंट दर्ज हुए हैं, जिनमें 4,400 अंतरराष्ट्रीय हैं। ITU काउंसिल ने 2030 में प्लेनिपोटेंटियरी कॉन्फ्रेंस की मेजबानी का भारत का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। 2024 में ITU की वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्डाइजेशन असेंबली पहली बार भारत में हुई थी।

UPI के आंकड़े भी सिंधिया ने रखे। उनके अनुसार भारत के डिजिटल लेनदेन का 84 प्रतिशत UPI से होता है। दुनिया के डिजिटल लेनदेन का 49 प्रतिशत हिस्सा भारत में होता है। UPI साल में 260 अरब लेनदेन करता है, जिनकी कीमत 3.4 ट्रिलियन डॉलर है। यह टेक्नोलॉजी 11 देशों तक पहुंच चुकी है। भारतनेट कार्यक्रम के बारे में उन्होंने कहा कि 15 अरब डॉलर के इस सरकारी कार्यक्रम से करीब 2.6 लाख ग्राम पंचायतों को मिडिल-माइल कनेक्टिविटी मिलेगी। बाकी 3.8 लाख गांवों को मांग पर कनेक्टिविटी मिलेगी। हर घर को 100 Mbps का कनेक्शन देने का लक्ष्य है।

मोबाइल फोन निर्माण को लेकर सिंधिया ने कहा कि 2014 में उद्योग 2-3 अरब डॉलर का था, आज 63 अरब डॉलर का हो गया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक बन गया है। निर्यात करीब 29 अरब डॉलर पहुंच गया है।

भरोसे की कहानी: DBT के ₹50 लाख करोड़

मोदी ने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को शासन सुधार की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से करीब ₹50 लाख करोड़ सीधे लाभार्थियों के मोबाइल-लिंक्ड बैंक खातों में पहुंचे हैं। करीब ₹5 लाख करोड़ वह पैसा बचा है जो रिसाव में जा सकता था। असम ट्रिब्यून ने भी इन आंकड़ों की पुष्टि की है।

अब आगे क्या देखें

सबसे बड़ा सवाल यह है कि GSMA और वैश्विक टेलीकॉम ऑपरेटर इस अपील पर क्या जवाब देते हैं। फ्रेमवर्क कैसा होगा, इसमें सरकारों, टेक कंपनियों और बैंकों की भूमिका क्या होगी, यह अभी खुला है। उद्योग की पहली प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। COAI के डायरेक्टर जनरल एस.पी. कोचर ने कहा कि भारत का मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी, AI, 6G और उभरती टेक्नोलॉजी के भविष्य की मजबूत नींव है। बिज़नेसलाइन के अनुसार कोचर ने डीपफेक जैसे जोखिमों के प्रति जागरूकता को भी उतना ही अहम बताया, जितना भरोसा, सुरक्षा और जिम्मेदार इनोवेशन है।

दूसरी नजर ITU की 2030 प्लेनिपोटेंटियरी कॉन्फ्रेंस पर रहेगी। भारत की मेजबानी का प्रस्ताव स्वीकार हो चुका है। अगर ग्लोबल फ्रेमवर्क आकार लेता है, तो ठगी रोकने का काम फोन पर कॉल आने के बाद नहीं, नेटवर्क पर ही हो सकेगा। ठगी के पीड़ित के खाते से पैसा निकलने से पहले रुक जाए, यही असली जीत होगी।

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मोदी ने GSMA से क्या अपील की?
मोदी ने GSMA और दुनिया भर के टेलीकॉम ऑपरेटरों से कहा कि सरकारें, टेक कंपनियां, टेलीकॉम ऑपरेटर और वित्तीय संस्थान मिलकर एक ग्लोबल तंत्र बनाएं, जो ठगी को लोगों तक पहुंचने से पहले रोके। उन्होंने कहा कि भारत ने ठगी रोकने में काफी अनुभव जुटाया है और इसे दुनिया से साझा करने को तैयार है।
डीपफेक को लेकर मोदी ने क्या कहा?
मोदी ने कहा कि डीपफेक दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। उन्होंने अपराध की नई भूगोल समझाई: एक देश में बैठा व्यक्ति दूसरे देश की मदद से तीसरे देश में अपराध कर सकता है। साइबर अपराध सीमाएं नहीं मानते, इसलिए देशों को ग्लोबल फ्रेमवर्क पर मिलकर काम करना होगा।
IMC 2026 में 5G को लेकर क्या घोषणा हुई?
मोदी ने बताया कि 5.5 लाख से ज्यादा बेस स्टेशनों वाला 5G नेटवर्क देश के हर जिले तक पहुंच गया है और इंटरनेट स्पीड दस गुना बढ़ गई है। संचार मंत्री सिंधिया ने 2030 तक 5G यूजर बेस 55 करोड़ से बढ़ाकर एक अरब करने का लक्ष्य रखा।
साइबर ठगी रोकने में भारत का अनुभव क्या है?
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार दूरसंचार विभाग की FRI प्रणाली ने 15 महीनों में 5,043.7 करोड़ रुपये के संदिग्ध धोखाधड़ी वाले लेनदेन रोकने में मदद की। मोबाइल नंबरों को रिस्क रेटिंग दी जाती है और चेतावनी सीधे बैंकों और UPI प्लेटफॉर्मों को मिलती है। 1,600 से ज्यादा संगठन डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं।

Sources

  1. The Hindu (thehindu.com)
  2. The Hindu BusinessLine (thehindubusinessline.com)
  3. Financial Express (financialexpress.com)
  4. Times of India (timesofindia.indiatimes.com)
  5. Assam Tribune (assamtribune.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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