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फ़र्ज़ी सरकारी वेबसाइट कैसे पहचानें: पूरी जाँच गाइड

By Gagariya Editorial Desk•26 Oct 2026 IST•6 min read•Human Reviewed & Fact-Checked

फ़र्ज़ी वेबसाइट की पहचान अब पहले जैसी आसान नहीं रही

कुछ समय पहले तक नकली साइट को टूटी-फूटी हिंदी या बिगड़े हुए लोगो से पकड़ा जा सकता था। अब कई नकली पोर्टल असली विभाग जैसे रंग, राष्ट्रीय प्रतीक और साफ़-सुथरे फ़ॉर्म इस्तेमाल करते हैं। गृह मंत्रालय से जुड़े भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की हाल की advisory में कहा गया है कि फ़र्ज़ी कल्याण-योजना विज्ञापनों के ज़रिए लोगों को फ़र्ज़ी वेबसाइट, फ़ोन नंबर या WhatsApp चैट तक पहुँचाया जाता है, और फिर टैक्स, पंजीकरण शुल्क या वेरिफिकेशन शुल्क के नाम पर बार-बार पैसे माँगे जाते हैं। कुछ मामलों में लोगों को पेमेंट ऐप पर जाकर अपना ट्रांज़ैक्शन PIN डालने को कहा जाता है, जबकि वह पैसा पाने का नहीं, भेजने का कदम होता है। इसलिए पहचान का तरीका बदलना होगा। साइट कैसी दिखती है, यह सवाल नहीं है। सवाल यह है कि साइट कहाँ से आई, उसका पता क्या है, और वह आपसे क्या माँग रही है।

यह धोखा आमतौर पर कैसे चलता है

पहला कदम एक संदेश होता है। उसमें कहा जाता है कि आपका KYC बंद होने वाला है, आपका रिफ़ंड अटका है, या किसी योजना में आपका नाम चुना गया है। संदेश में एक लिंक होता है। लिंक पर क्लिक करते ही एक ऐसा पेज खुलता है जो सरकारी पोर्टल जैसा दिखता है। वहाँ नाम, मोबाइल नंबर, Aadhaar या PAN नंबर और फिर OTP डालने को कहा जाता है। कुछ पेज शुल्क भी माँगते हैं, जिसे योजना का प्रोसेसिंग शुल्क बताया जाता है। PIB Fact Check ने 24 मार्च 2026 को Income Tax विभाग के नाम से आए एक फ़र्ज़ी ईमेल को फ़िशिंग बताया था। उस तरह के संदेशों में रिफ़ंड या दस्तावेज़ वेरिफिकेशन के नाम पर लिंक पर क्लिक करने को कहा जाता है। Income Tax विभाग ने साफ़ कहा है कि वह कभी भी व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी, PIN या पासवर्ड नहीं माँगता।

सात निशान जो तुरंत नज़र आने चाहिए

  1. हड़बड़ी का दबाव: "आज ही करें वरना खाता बंद" या "आख़िरी मौका" जैसे वाक्य। असली सरकारी प्रक्रिया में भी समय-सीमा होती है, लेकिन वह नोटिस और आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज होती है, किसी अनजान संदेश में नहीं।
  2. अजीब डोमेन: .gov.in या .nic.in की जगह .com, .org, .in पर अतिरिक्त शब्द, गलत स्पेलिंग या मिलते-जुलते अक्षर। जैसे, किसी विभाग के नाम के आगे "online", "apply" या "govt" जोड़कर बनाया गया पता।
  3. संदेश से आया लिंक: सर्च रिज़ल्ट में ऊपर दिखा विज्ञापन या WhatsApp पर फ़ॉरवर्ड किया गया लिंक, असली साइट की गारंटी नहीं है। सर्च में विज्ञापन और असली नतीजे अलग-अलग दिखते हैं।
  4. OTP, PIN या पासवर्ड की माँग: UIDAI ने कहा है कि Aadhaar OTP किसी अनधिकृत व्यक्ति को न दिया जाए। NPCI के सुरक्षा निर्देशों में कहा गया है कि पैसा पाने के लिए UPI PIN की ज़रूरत नहीं होती। PIN सिर्फ़ भुगतान को मंज़ूरी देता है।
  5. शुल्क की माँग: योजना का लाभ पाने के लिए टैक्स, रजिस्ट्रेशन या वेरिफिकेशन शुल्क माँगना, I4C की advisory में बताए गए धोखे का जाना-पहचाना तरीका है।
  6. स्क्रीन शेयरिंग या ऐप डाउनलोड की माँग: कोई भी बैंक या विभाग खाता ठीक करने के लिए आपकी स्क्रीन देखने की ज़रूरत नहीं बताता। ऐसा कहने वाला व्यक्ति सपोर्ट नहीं, धोखा हो सकता है।
  7. कॉपी किया हुआ डिज़ाइन: लोगो, रंग और नोटिस असली जैसे लग सकते हैं। CERT-In के सुरक्षा निर्देशों में भी फ़िशिंग साइटों और छोटी की गई लिंकों से सावधान रहने को कहा गया है। ताला (HTTPS) सिर्फ़ यह बताता है कि कनेक्शन एन्क्रिप्टेड है, यह नहीं कि साइट का मालिक सरकार है।

काम का उदाहरण: एक फ़र्ज़ी PM योजना साइट की जाँच, कदम-दर-कदम

मान लीजिए WhatsApp पर एक संदेश आता है कि किसी PM योजना में आपको 50,000 रुपये की सहायता मिली है, और नीचे एक लिंक है। यह उदाहरण किसी असली योजना का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि धोखेबाज़ योजना का नाम बदलते रहते हैं। जाँच इस तरह करें। पहला कदम: लिंक पर क्लिक न करें। संदेश को वहीं रोक दें। दूसरा कदम: योजना का नाम और संबंधित मंत्रालय या विभाग का नाम अलग से खोजें, और उसकी आधिकारिक साइट का पता खुद टाइप करके खोलें। तीसरा कदम: आधिकारिक साइट पर उस योजना की जानकारी खोजें। अगर वहाँ ऐसी कोई नकद सहायता योजना दर्ज नहीं है, तो संदेश पर भरोसा न करें। चौथा कदम: लिंक वाले पते को ध्यान से पढ़ें। अगर वह .gov.in या .nic.in पर खत्म नहीं होता, या उसमें विभाग के नाम की गलत स्पेलिंग है, तो वह लाल झंडा है। पाँचवाँ कदम: अगर साइट OTP, बैंक पासवर्ड या UPI PIN माँग रही है, तो वहीं रुक जाएँ। कोई भी विभाग इन जानकारियों को इस तरह नहीं माँगता। छठा कदम: शक होने पर उस संदेश को PIB Fact Check को भेजें। PIB Fact Check तक WhatsApp नंबर +91 8799711259, ईमेल factcheck@pib.gov.in और वेबसाइट factcheck.pib.gov.in के ज़रिए पहुँचा जा सकता है।

जाँच की चेकलिस्ट

जाँच असली साइट पर क्या मिलेगा शक कब करें
पता (URL) .gov.in या .nic.in पर खत्म होने वाला साफ़ पता अतिरिक्त शब्द, गलत स्पेलिंग, अजीब डोमेन
आने का रास्ता आपने खुद टाइप किया या India.gov.in जैसे सरकारी डायरेक्टरी से खोला SMS, WhatsApp या विज्ञापन से आया लिंक
माँगी गई जानकारी सिर्फ़ वही जो उस सेवा के लिए ज़रूरी है OTP, PIN, पासवर्ड, CVV
भुगतान आधिकारिक पेमेंट गेटवे पर, सेवा का तय शुल्क योजना का लाभ पाने के लिए "टैक्स" या "वेरिफिकेशन शुल्क"
भाषा साफ़ निर्देश, संपर्क और शिकायत का रास्ता हड़बड़ी, धमकी, "आज ही वरना बंद"

अगर गलती से जानकारी दे दी हो तो तुरंत यह करें

पहले अपनी बैंक और पेमेंट ऐप को सूचित करें, और ज़रूरत हो तो कार्ड या UPI को ब्लॉक कराएँ। फिर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। शिकायत का नंबर संभालकर रखें, क्योंकि बैंक और पुलिस दोनों उसी से आगे की कार्रवाई जोड़ते हैं। Aadhaar से जुड़ा शक हो तो UIDAI के टोल-फ़्री नंबर 1947 पर संपर्क करें और अपने Aadhaar की ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री देखें। फ़िशिंग ईमेल को webmanager@incometax.gov.in (Income Tax से जुड़ा हो तो) और incident@cert-in.org.in पर फ़ॉरवर्ड किया जा सकता है। एक बात साफ़ रखनी चाहिए। जल्दी शिकायत करने से पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं मिलती, लेकिन देर करने से खाते को फ़्रीज़ कराने और सबूत बचाने का मौका कम होता है। इसलिए बातचीत जारी रखने के बजाय शिकायत पहले करें।

शब्दावली

फ़िशिंग: असली संस्था का रूप धरकर जानकारी या पैसा लेने की कोशिश। .gov.in: भारत सरकार की वेबसाइटों के लिए इस्तेमाल होने वाला डोमेन। HTTPS और ताला: कनेक्शन के एन्क्रिप्शन का निशान, साइट के मालिक की पहचान का सबूत नहीं। OTP: एक बार इस्तेमाल होने वाला कोड, जो सिर्फ़ उसी जगह डालना चाहिए जहाँ आपने खुद लेन-देन शुरू किया हो। UPI PIN: भुगतान को मंज़ूरी देने वाला गुप्त कोड, पैसा पाने के लिए इसकी ज़रूरत नहीं होती।

आगे क्या देखना होगा

अगली बार जब कोई संदेश सरकारी सेवा, योजना या रिफ़ंड का दावा करे, तो पहला कदम लिंक पर क्लिक करना नहीं, बल्कि रुकना होगा। विभाग का नाम अलग से खोजें, उसका पता खुद टाइप करें, और उसी पते पर जाकर देखें कि वह सेवा या योजना सच में मौजूद है या नहीं। यह एक आदत ही नकली पोर्टलों के सबसे बड़े हथियार, यानी हड़बड़ी और असली जैसे दिखावे, को बेअसर कर देती है। 📷 Illustration: AI-generated

Questions people ask

क्या .gov.in वाली हर साइट असली होती है?
.gov.in सरकारी डोमेन है, लेकिन सिर्फ़ पता देखकर फैसला न करें। पता खुद टाइप करें, और यह भी देखें कि साइट क्या माँग रही है। OTP या PIN माँगने वाली कोई भी साइट शक के दायरे में आती है।
क्या HTTPS ताला होने का मतलब साइट सुरक्षित है?
ताला सिर्फ़ यह बताता है कि आपका कनेक्शन एन्क्रिप्टेड है। नकली साइट भी HTTPS इस्तेमाल कर सकती है। मालिक की पहचान पते और आधिकारिक डायरेक्टरी से परखें।
क्या कोई विभाग WhatsApp पर योजना का लिंक भेजता है?
सरकारी सूचनाएँ आधिकारिक पोर्टल और सत्यापित हैंडल पर आती हैं। WhatsApp पर आए लिंक को सीधे न खोलें, योजना का नाम अलग से खोजकर आधिकारिक साइट पर जाँचें।
जानकारी दे दी हो तो सबसे पहले क्या करें?
बैंक को सूचित करें, 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। फिर Aadhaar से जुड़ा शक हो तो UIDAI के नंबर 1947 पर संपर्क करें।

Sources

  1. PIB Fact Check, UIDAI सुरक्षा सलाह (PIB) (pib.gov.in)
  2. MHA की फ़र्ज़ी कल्याण-योजना विज्ञापनों पर चेतावनी (devdiscourse.com)
  3. PIB Fact Check की फ़र्ज़ी Income Tax ईमेल पर चेतावनी (newspointapp.com)
  4. फ़र्ज़ी सरकारी साइटों की पहचान पर गाइड (indiafocusdaily.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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