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IL-76MD ने लद्दाख में रचा इतिहास, 13,629 फीट पर लैंडिंग

By Gagariya Editorial Desk•Published 7 Nov 2026 IST•3 min read•Reviewed by the Gagariya editorial team
IL-76MD ने लद्दाख में रचा इतिहास, 13,629 फीट पर लैंडिंग
Photo: Own or licensed by the publisher

13,629 फीट। समुद्र तल से इतनी ऊँचाई पर भारतीय वायुसेना का IL-76MD भारी परिवहन विमान उतरा है। जगह है पूर्वी लद्दाख का न्योमा हवाई अड्डा, और वायुसेना के अनुसार यह इस विमान प्रकार की दुनिया में अब तक की सबसे ऊँची लैंडिंग है।

वायुसेना ने शनिवार 7 नवंबर को X पर इस लैंडिंग की घोषणा की। उसकी पोस्ट में लिखा था कि IL-76MD ने न्योमा पर सफल लैंडिंग करके इतिहास रच दिया है। वायुसेना ने इसे विमान की स्थायी क्षमता और चालक दल के कौशल, सटीकता और पेशेवर अंदाज़ का शानदार प्रदर्शन बताया। उसने यह भी कहा कि यह उपलब्धि भारत की रणनीतिक एयरलिफ्ट क्षमता को मज़बूत करती है। अधिकारियों के अनुसार लैंडिंग शुक्रवार 6 नवंबर को हुई थी।

न्योमा क्यों अहम है

न्योमा चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब स्थित है। यह 1962 के युद्ध के समय एक अग्रिम लैंडिंग ग्राउंड के रूप में बना था। लंबे समय तक इसका इस्तेमाल नहीं हुआ। 2009 में An-32 विमान की लैंडिंग के साथ इसे फिर सक्रिय किया गया, और बाद में सीमा सड़क संगठन ने इसे 2.7 किलोमीटर लंबे रनवे वाले पूर्ण हवाई अड्डे के रूप में तैयार किया।

नवंबर 2025 में तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने C-130J विमान उतारकर उन्नत अड्डे का उद्घाटन किया था। वायुसेना न्योमा को दुनिया का सबसे ऊँचा लड़ाकू विमान संचालन योग्य हवाई अड्डा बताती है, और वहाँ से लड़ाकू विमान भी उड़ाने की योजना है।

क्या बदला

अब तक न्योमा पर ज़्यादातर छोटे परिवहन विमान ही उतरते थे, जैसे C-130J और An-32। IL-76MD का उतरना इस लिहाज़ से अलग है। यह चार इंजन वाला भारी विमान है, जो लगभग 40 टन तक ले जा सकता है। एक ही उड़ान में अब पूर्वी लद्दाख तक कहीं ज़्यादा जवान, वाहन और भारी सामान पहुँचाया जा सकेगा।

यह बदलाव 2020 में चीन के साथ सीमा पर टकराव के बाद की तैयारी से जुड़ा है। तब से वायुसेना हवाई मार्ग से क्षेत्र में तैनात दसियों हज़ार जवानों की सप्लाई पर भारी निर्भर है, खासकर सर्दियों में, जब बर्फबारी से पहाड़ी सड़कें बंद हो जाती हैं।

इतनी ऊँचाई पर भारी विमान उतारना क्यों मुश्किल है

ऊँचाई पर हवा पतली होती है। इससे इंजन को कम थ्रस्ट मिलता है और पंखों को कम लिफ्ट। भारी विमान को तेज़ी से आना पड़ता है और रुकने के लिए ज़्यादा रनवे चाहिए होता है। हिमालयी हवाई अड्डों के आसपास खड़ी ढलानें और बदलती हवाएँ भी पायलटों के लिए चुनौती बढ़ाती हैं। IL-76MD, जिसे वायुसेना में गजराज कहा जाता है, 16 जून 1985 से सेवा में है।

रिकॉर्ड की सीमा क्या है

यह रिकॉर्ड सिर्फ IL-76MD विमान प्रकार के लिए है, सभी विमानों के लिए नहीं। यह फर्क ज़रूरी है। 20 अगस्त 2013 को C-130J विमान दौलत बेग ओल्डी में 16,614 फीट पर उतरा था, जो उस विमान की सबसे ऊँची लैंडिंग थी। न्योमा का रिकॉर्ड IL-76MD के अपने इतिहास में सबसे ऊँचा है, दुनिया के सबसे ऊँचे हवाई अड्डे का रिकॉर्ड नहीं।

स्रोतों में मतभेद

तीन बातों पर स्रोतों के आँकड़े थोड़े अलग हैं, और किसी एक को अंतिम नहीं माना जा रहा। पहला, LAC से न्योमा की दूरी — एक स्रोत इसे लगभग 23 किलोमीटर बताता है, दूसरा लगभग 25 किलोमीटर। दूसरा, न्योमा की ऊँचाई — वायुसेना ने लैंडिंग की ऊँचाई 13,629 फीट बताई है, जबकि न्योमा को आमतौर पर लगभग 13,700 फीट ऊँचा बताया जाता है। लैंडिंग का आँकड़ा 13,629 फीट सभी स्रोतों में एक जैसा है। तीसरा, लैंडिंग का दिन — हिंदुस्तान टाइम्स से अधिकारियों ने शुक्रवार 6 नवंबर बताया है, जबकि दैनिक भास्कर और ANI की खबर में लैंडिंग शनिवार 7 नवंबर की बताई गई है।

आगे क्या देखना होगा

वायुसेना ने यह नहीं बताया है कि न्योमा से IL-76MD की और उड़ानें कब होंगी, या वहाँ से लड़ाकू विमान कब उड़ने लगेंगे। सर्दियों में जब पहाड़ी सड़कें बंद होंगी, तब यह देखना होगा कि भारी एयरलिफ्ट से पूर्वी लद्दाख की सप्लाई लाइन कितनी मज़बूत होती है। न्योमा से अगली बड़ी घोषणा पर नज़र रहेगी।

📷 फोटो: Tech. Sgt. Shane A. Cuomo, U.S. Air Force, Wikimedia Commons (Public Domain)

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Questions people ask

IL-76MD ने न्योमा में क्या रिकॉर्ड बनाया है?
वायुसेना के अनुसार IL-76MD ने 13,629 फीट पर लैंडिंग की है, जो इस विमान प्रकार की दुनिया में अब तक की सबसे ऊँची लैंडिंग है।
लैंडिंग कब हुई और घोषणा कब की गई?
अधिकारियों के अनुसार लैंडिंग शुक्रवार 6 नवंबर 2026 को हुई थी। वायुसेना ने शनिवार 7 नवंबर को X पर इसकी घोषणा की।
क्या यह दुनिया के सबसे ऊँचे हवाई अड्डे का रिकॉर्ड है?
नहीं। यह रिकॉर्ड सिर्फ IL-76MD विमान के लिए है। C-130J 2013 में दौलत बेग ओल्डी में 16,614 फीट पर उतर चुका है।
न्योमा LAC से कितनी दूर है?
स्रोतों में थोड़ा अंतर है — एक स्रोत 23 किलोमीटर बताता है, दूसरा 25 किलोमीटर। दोनों ही इसे LAC के करीब बताते हैं।
IL-76MD कितना वज़न ले जा सकता है?
लगभग 40 टन। वायुसेना में इसे गजराज कहा जाता है और यह 1985 से सेवा में है।

Sources

  1. Defence Blog — Indian Il-76 makes record high-altitude landing near China border (defence-blog.com)
  2. India Sentinels — Indian Air Force's IL-76MD lands at Nyoma at 13,629 feet (indiasentinels.com)
  3. NewKerala (ANI) — IAF's IL-76MD lands at Nyoma, Ladakh, at 13,629 feet (newkerala.com)
  4. Newsplainly — Nyoma airbase: IAF IL-76MD lands at 13,629 ft in Ladakh (newsplainly.com)
  5. Wikimedia Commons — File:Indian Air Force IL-76.JPG (commons.wikimedia.org)

Editorial note: This story was researched from public sources and drafted with the help of AI tools. It was then read, checked against those sources and approved by the Gagariya editorial team before publication. How we work.

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