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पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य, डीज़ल ₹11.50/लीटर

By Gagariya Editorial Desk•31 Oct 2026 IST•5 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य, डीज़ल ₹11.50/लीटर
Photo: Own or licensed by the publisher

क्या फैसला हुआ है

31 अक्टूबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशित होते ही वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की दो अधिसूचनाएँ लागू हो गईं। अधिसूचना संख्या 55/2026-Central Excise (G.S.R. 963(E)) ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला Special Additional Excise Duty (SAED) शून्य कर दिया और हाई-स्पीड डीज़ल पर शुल्क बढ़ा दिया। अधिसूचना संख्या 56/2026-Central Excise (G.S.R. 964(E)) ने Aviation Turbine Fuel (ATF) पर शुल्क बढ़ाया। विभाग ने साफ किया है कि ये दरें निर्यात पर लागू होंगी। नई दरों के तहत पेट्रोल के निर्यात पर अब कोई SAED नहीं लगेगा। पहले यह ₹2.50 प्रति लीटर था। हाई-स्पीड डीज़ल के निर्यात पर शुल्क ₹8.50 से बढ़कर ₹11.50 प्रति लीटर हो गया है। ATF के निर्यात पर शुल्क ₹10.50 से बढ़कर ₹11 प्रति लीटर हो गया है। यानी डीज़ल पर ₹3.00 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, ATF पर ₹0.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है और पेट्रोल पर ₹2.50 प्रति लीटर की पूरी छूट मिली है।

नई दरें, पुरानी दरों के मुकाबले

ईंधन 16 अक्टूबर 2026 से लागू दर 31 अक्टूबर 2026 से लागू दर बदलाव
पेट्रोल (निर्यात) ₹2.50 प्रति लीटर शून्य ₹2.50 प्रति लीटर की कमी
हाई-स्पीड डीज़ल (निर्यात) ₹8.50 प्रति लीटर ₹11.50 प्रति लीटर ₹3.00 प्रति लीटर की बढ़ोतरी
ATF (निर्यात) ₹10.50 प्रति लीटर ₹11 प्रति लीटर ₹0.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी
यह तुलना इसलिए अहम है क्योंकि 31 अक्टूबर का बदलाव 16 अक्टूबर की व्यवस्था को आंशिक रूप से पलट देता है। 16 अक्टूबर को पेट्रोल पर शुल्क ₹0.50 से बढ़ाकर ₹2.50 प्रति लीटर किया गया था, जबकि डीज़ल पर शुल्क ₹16 से घटाकर ₹8.50 प्रति लीटर किया गया था। ATF तब ₹10.50 प्रति लीटर पर था। अब पेट्रोल फिर शून्य पर आ गया है, लेकिन डीज़ल पहले के ₹16 के स्तर तक नहीं लौटा है। वह ₹11.50 प्रति लीटर पर है।

हिसाब से समझिए: कितना फर्क पड़ेगा

मान लीजिए कोई निर्यातक 10 लाख लीटर हाई-स्पीड डीज़ल निर्यात करता है। पुरानी दर पर SAED बनता था: 10,00,000 × ₹8.50 = ₹85,00,000। नई दर पर SAED बनता है: 10,00,000 × ₹11.50 = ₹1,15,00,000। फर्क है ₹30,00,000। यानी हर 10 लाख लीटर डीज़ल निर्यात पर ₹30 लाख अतिरिक्त शुल्क लगेगा। अब पेट्रोल का उदाहरण लीजिए। 10 लाख लीटर पेट्रोल निर्यात पर पुरानी दर से SAED बनता था: 10,00,000 × ₹2.50 = ₹25,00,000। नई दर शून्य है, इसलिए SAED बनेगा ₹0। बचत होगी पूरे ₹25,00,000 की। ATF के मामले में 1 लाख लीटर पर हिसाब इस तरह है: पुरानी दर पर 1,00,000 × ₹10.50 = ₹10,50,000 और नई दर पर 1,00,000 × ₹11 = ₹11,00,000, यानी ₹50,000 का अतिरिक्त शुल्क। ये उदाहरण सिर्फ शुल्क का फर्क दिखाते हैं। किसी कंपनी का कुल खर्च उसके निर्यात की मात्रा और अन्य लागतों पर भी निर्भर करेगा, जो इस हिसाब में नहीं जोड़ी गई हैं।

किस पर असर होगा, किस पर नहीं

सबसे सीधा असर रिफाइनरों और निर्यातकों पर होगा। डीज़ल और ATF निर्यात करने वाली कंपनियों की प्रति लीटर लागत बढ़ेगी, जबकि पेट्रोल निर्यात पर शुल्क खत्म होने से उस रास्ते की लागत घटेगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये संशोधन निर्यात से जुड़ी SAED देनदारी तय करने के लिए प्रासंगिक हैं और इन्हें घरेलू खुदरा ईंधन कीमतों में बदलाव के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए यह निर्यात और घरेलू आपूर्ति के बीच का गणित बदलता है। हर पखवाड़े की समीक्षा के बाद उन्हें अपना निर्यात कार्यक्रम दोबारा आँकना होगा। आम पाठक के लिए सबसे ज़रूरी बात यह है कि पंप पर कीमत इससे सीधे नहीं बदलती। यह शुल्क निर्यात पर लगता है, घरेलू बिक्री पर नहीं। इसलिए इस अधिसूचना के आधार पर यह कहना गलत होगा कि पेट्रोल या डीज़ल के खुदरा दाम बढ़ गए हैं या घट गए हैं। खुदरा कीमतों का फैसला अलग व्यवस्था से होता है और इस अधिसूचना में उसके बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

यह व्यवस्था बनी कैसे

यह ढांचा मार्च 2026 से जुड़ा है। अधिसूचना संख्या 55/2026, अधिसूचना संख्या 06/2026 दिनांक 26 मार्च 2026 में संशोधन करती है और अधिसूचना संख्या 56/2026, अधिसूचना संख्या 08/2026 दिनांक 26 मार्च 2026 में संशोधन करती है। दोनों नई अधिसूचनाएँ Central Excise Act, 1944 की धारा 5A और Finance Act, 2002 की धारा 147 के तहत जारी की गई हैं। जब यह ढांचा शुरू हुआ था, तब बताया गया उद्देश्य घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना था। उस समय कहा गया था कि पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यात को हतोत्साहित करके घरेलू बाज़ार में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखी जाए। यह उद्देश्य उस समय की रिपोर्टिंग के हवाले से दर्ज है, 31 अक्टूबर की अधिसूचनाओं में कोई नया उद्देश्य घोषित नहीं किया गया है। समीक्षा पखवाड़ेवार होती है। विभाग पिछली समीक्षा के बाद की अवधि में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीज़ल और ATF की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों को देखता है। इसी वजह से दरें बार-बार बदलती रही हैं।

शब्दावली: SAED और ATF क्या हैं

SAED यानी Special Additional Excise Duty, एक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क है। इस मामले में यह ईंधन के निर्यात पर लगाया जाता है। ATF यानी Aviation Turbine Fuel, वह ईंधन है जिससे विमान उड़ते हैं। इस अधिसूचना में आम यात्री के टिकट पर इसके सीधे असर के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

आगे क्या देखना होगा

अगली पखवाड़ेवारी समीक्षा नवंबर के मध्य के आसपास होने की उम्मीद है। यह कोई पक्की तारीख नहीं है, इसलिए अगली अधिसूचना का इंतज़ार राजपत्र के प्रकाशन से ही पक्का होगा। तब तक देखने लायक संकेत तीन हैं: अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफाइंड उत्पादों यानी पेट्रोल, डीज़ल और ATF की कीमत, और पिछली समीक्षा के बाद इनकी औसत कीमत में बदलाव। निर्यातकों के लिए अगली अधिसूचना तक का समय अपने सौदों की लागत दोबारा जाँचने का है, क्योंकि 31 अक्टूबर की दरें ही तब तक लागू रहेंगी जब तक अगली अधिसूचना उन्हें नहीं बदलती। This story is informational only and is not financial advice. 📷 फोटो: Antony-22, Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

Questions people ask

क्या इस फैसले से पेट्रोल या डीज़ल के पंप दाम बदलेंगे?
नहीं। यह शुल्क सिर्फ निर्यात पर लगता है, घरेलू बिक्री पर नहीं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इसे घरेलू खुदरा कीमतों में बदलाव के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।
नई दरें कब से लागू हुईं?
31 अक्टूबर 2026 से, जो राजपत्र में प्रकाशन की तारीख है। अधिसूचनाएँ हैं 55/2026-Central Excise (G.S.R. 963(E)) और 56/2026-Central Excise (G.S.R. 964(E))।
डीज़ल और ATF पर कितना शुल्क बढ़ा है?
डीज़ल ₹8.50 से बढ़कर ₹11.50 प्रति लीटर हुआ है, यानी ₹3.00 प्रति लीटर की बढ़ोतरी। ATF ₹10.50 से बढ़कर ₹11 प्रति लीटर हुआ है, यानी ₹0.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी। पेट्रोल पर शुल्क ₹2.50 से घटकर शून्य हो गया है।
अगली समीक्षा कब होगी?
समीक्षा पखवाड़ेवार होती है, इसलिए अगली समीक्षा नवंबर के मध्य के आसपास होने की उम्मीद है। यह पक्की तारीख नहीं है; अगली दरें अगली अधिसूचना के राजपत्र प्रकाशन से ही तय होंगी।

Sources

  1. The Hindu BusinessLine — Centre scraps petrol export duty, raises diesel and ATF levies (thehindubusinessline.com)
  2. BizzBuzz — Windfall tax reset: Petrol exports exempt, diesel and ATF duties increased (bizzbuzz.news)
  3. A2Z Taxcorp — Government revises export duty on petrol, diesel and ATF (Gazette summary) (a2ztaxcorp.net)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

This story is informational only and is not financial advice. Decisions about money belong with a registered adviser — the sources above are a good place to start reading.

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