जंतर मंतर पर आरक्षण सुधार आंदोलन क्यों तेज हुआ
By the Gagariya desk · 25 Aug 2026 IST · 4 min read
मामला क्या है
दिल्ली के जंतर मंतर पर बीते कुछ हफ्तों से एक नया आंदोलन आकार ले रहा है। मांग है — आरक्षण जाति के आधार पर नहीं, आर्थिक स्थिति के आधार पर मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का नारा रहा है, "आरक्षण गरीब को मिले, जाति को नहीं।" इसे चला रहा है इंस्टाग्राम पेज 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन', जिसे बाद में 'रिजर्वेशन रिफॉर्म्स मूवमेंट' के नाम से भी प्रचारित किया गया ताकि ज़्यादा लोग इससे जुड़ सकें।
जड़ें कहां से आईं
यह बहस अचानक शुरू नहीं हुई। कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) के इक्विटी नियमों से जुड़ा एक कानून पास किया, जिसे लेकर सामान्य और OBC वर्ग के छात्रों में नाराज़गी थी। इसकी काफी आलोचना भी हुई, लेकिन मामला धीरे-धीरे शांत हो गया था।
इसके बाद NEET छात्रों से जुड़ा विवाद सामने आया, जिसे लेकर जंतर मंतर पर बड़ा आंदोलन हुआ — इसे 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले चलाया जा रहा था। यह आंदोलन इतना बड़ा हो गया कि सरकार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा, छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा देना पड़ा और परीक्षा प्रणाली में सुधार के वादे करने पड़े। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने इस आंदोलन को और तेज़ किया था।
इसी दौर में यह तर्क ज़ोर पकड़ने लगा कि करीब 70 साल से आरक्षण व्यवस्था चलने के बावजूद कई जातियां अब भी पीछे क्यों हैं — यानी या तो व्यवस्था में खामी है, या फायदा सही लोगों तक नहीं पहुंच रहा। इसी सवाल से 'रिजर्वेशन हटाओ' से जुड़े कई पेज और समूह सक्रिय हुए, जो UGC के नियमों को वापस लेने और आरक्षण में सुधार की मांग करने लगे।
21-23 अगस्त: जंतर मंतर पर क्या हुआ
21 अगस्त को सैकड़ों लोग जंतर मंतर पहुंचे, हाथों में तख्तियां और भगवा झंडे लिए। आयोजकों में NEET अभ्यर्थी हर्ष दुबे और अभिषेक अग्निहोत्री जैसे नाम शामिल थे। राजस्थान की करणी सेना, जनरल सेना और चाणक्य सेना जैसे संगठनों ने भी इस प्रदर्शन को समर्थन दिया। इन्फ्लुएंसर अजीत भारती भी मौके पर मौजूद थे, जो पहले से UGC के नियमों पर मुखर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस का कहना था कि जंतर मंतर पर किसी सभा या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बजाय रामलीला मैदान में शाम 4 बजे तक अधिकतम 500 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति (NOC) दी गई थी। प्रदर्शनकारी वहां शिफ्ट होने को तैयार नहीं हुए और जंतर मंतर पर ही डटे रहे। तय समय के बाद भी जब लोग नहीं हटे, तो पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती बढ़ाई गई, और शाम करीब साढ़े सात बजे 50 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया।
23 अगस्त को भी कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल में करीब 300 लोग इसी मुद्दे पर जुटे, जहां से पुलिस ने 20 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया — पुलिस ने साफ किया कि उस दिन जंतर मंतर पर किसी बड़ी भीड़ के जुटने के दावे भ्रामक थे, जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे उनमें से कुछ पुराने और अलग जगह के निकले।
मांगें क्या हैं
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं — जाति आधारित आरक्षण की जगह आर्थिक आधार को प्राथमिकता, क्रीमी लेयर के नियम को और सख्त बनाना ताकि आरक्षित वर्ग के भीतर संपन्न परिवारों तक ही फायदा सीमित न रहे, "एक परिवार, एक आरक्षण" का सिद्धांत, UGC के कुछ इक्विटी नियमों को वापस लेना, और SC/ST एक्ट की समीक्षा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उम्र और प्रयासों में मिलने वाली छूट की वजह से सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों के लिए मैदान असमान हो जाता है।
नेतृत्व और आलोचना के सवाल
इस आंदोलन को लेकर एक सवाल यह भी उठा कि इसका कोई स्पष्ट और संगठित नेतृत्व नहीं है, जिस वजह से मांगों को सरकार तक ठोस तरीके से पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि प्रदर्शनकारी अगर अपनी मांगें औपचारिक रूप से रखें, तो सरकार बातचीत के लिए तैयार है।
दूसरी तरफ, बीते महीने CJP के नेतृत्व वाले NEET आंदोलन के दौरान सरकार पर लचीला रुख अपनाने और अब इस छोटे, एक-दिवसीय प्रदर्शन में तुरंत सख्ती दिखाने को लेकर सोशल मीडिया पर तुलना और सवाल भी उठाए जा रहे हैं।
दोनों तरफ की दलील
आरक्षण व्यवस्था को लेकर यह बहस भारत में नई नहीं है। मंडल कमीशन की सिफारिशों के बाद से आरक्षण का दायरा कई बार बढ़ा है। आलोचकों का तर्क है कि जाति आधारित आरक्षण अनिश्चितकाल तक चलने से पहचान की राजनीति मज़बूत होती है और आरक्षित वर्ग के सबसे गरीब लोग अक्सर पीछे रह जाते हैं। वहीं समर्थकों का कहना है कि जाति आज भी सामाजिक भेदभाव का एक अहम पैमाना है, और सिर्फ आर्थिक आधार अपनाने से ऐतिहासिक असमानता को दूर करना मुश्किल होगा।
'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' खुद को आरक्षण खत्म करने के बजाय उसे "ज़रूरत के आधार पर" फिर से व्यवस्थित करने की मांग के रूप में पेश करता है।
आगे क्या
फिलहाल आंदोलन दिल्ली से बाहर दूसरे राज्यों में भी फैलने की खबरें हैं। यह देखना बाकी है कि सरकार औपचारिक बातचीत के लिए कब आगे आती है, और क्या हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई या आंदोलन को लेकर कोई राजनीतिक बयान आता है।
Questions people ask
- जंतर मंतर पर हो रहे प्रदर्शन की मुख्य मांग क्या है?
- प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि आरक्षण जाति के बजाय आर्थिक स्थिति के आधार पर मिले, ताकि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लोगों तक फायदा पहुंचे, चाहे उनकी जाति कुछ भी हो।
- दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में क्यों लिया?
- पुलिस के अनुसार जंतर मंतर पर सभा या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बजाय रामलीला मैदान में सीमित समय और लोगों के लिए अनुमति थी, जिसे प्रदर्शनकारियों ने नहीं माना।
- यह आंदोलन UGC कानून से कैसे जुड़ा है?
- सरकार द्वारा पास किए गए UGC इक्विटी नियमों को लेकर पहले से नाराज़गी थी। इसी असंतोष ने बाद में आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग वाले आंदोलन को गति दी।
- क्या यह आंदोलन आरक्षण को पूरी तरह खत्म करने की मांग करता है?
- नहीं, आयोजकों का कहना है कि वे आरक्षण खत्म नहीं बल्कि उसे ज़रूरत के आधार पर पुनर्गठित करना चाहते हैं, ताकि फायदा सही मायने में ज़रूरतमंदों तक पहुंचे।
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