भारत में हो रहे ये बदलाव क्या विकास की तस्वीर बदल रहे हैं?
By the Gagariya desk · 10 Sept 2026 IST · 7 min read

2014 में जब से देश के प्रधानमंत्री बने, Make in India का जो vision सामने रखा गया था, उसका एक सीधा सा मतलब था कि भारत में चीजें बनें, भारत में उद्योग बढ़ें और भारत से चीजें बाहर जाएं। आज पीछे मुड़कर देखें तो इस दिशा में कई बदलाव दिखाई देते हैं। सरकार के अनुसार, Make in India initiative 25 September 2014 को शुरू किया गया था और इसके बाद manufacturing को बढ़ावा देने के लिए PLI जैसी कई योजनाएं लाई गईं।
मैं आज देश की हर कमी या हर समस्या की बात नहीं कर रहा हूं। कमियां बहुत हैं और उन पर बात भी होनी चाहिए। लेकिन आज कुछ ऐसी positive चीजों की बात करनी है, जो हमारे देश के लिए काफी अच्छा change लेकर आई हैं।
Make in India का असर अब दिखाई दे रहा है
जब Make in India की बात शुरू हुई थी, तब सोच यही थी कि भारत को ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर बनाया जाए। छोटे-बड़े उद्योगों को मौका मिले और ऐसी चीजें भारत में बनें जिन्हें पहले बाहर से मंगाना पड़ता था। आज कई sectors में इसका असर दिखाई देता है।
छोटी और बड़ी industries ने सरकार की अलग-अलग schemes और initiatives का फायदा उठाकर भारत में ही manufacturing बढ़ाई है। PLI schemes के तहत 14 sectors में अब तक ₹2.16 लाख करोड़ से ज्यादा का investment हुआ है और 31 December 2025 तक ₹20.41 लाख करोड़ से ज्यादा की production और sales दर्ज की गई है। इन schemes से direct और indirect मिलाकर 14.39 लाख से ज्यादा employment भी generate हुआ है।
इसका मतलब यह नहीं है कि अब भारत में हर चीज बनने लगी है या हर समस्या खत्म हो गई है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। लेकिन direction में बदलाव जरूर दिखाई देता है।
आज electronics, defence, automobiles, pharmaceuticals और कई दूसरे sectors में भारत में manufacturing बढ़ रही है। मेरे हिसाब से development का एक जरूरी हिस्सा यही है कि देश सिर्फ सामान खरीदने वाला market न रहे, बल्कि सामान बनाने वाला देश भी बने।
Space sector में private companies का आना क्यों बड़ा बदलाव है?
Space sector इसका एक अच्छा example है। पहले space programme का नाम लेते ही हमारे दिमाग में लगभग सिर्फ ISRO आता था। Private companies की भूमिका थी, लेकिन जिस तरह की बड़ी private participation आज दिखाई दे रही है, वह पहले नहीं थी।
Space sector reforms के बाद private companies को space activities में काम करने के लिए रास्ता दिया गया। आज Skyroot Aerospace, Agnikul Cosmos, Pixxel, Dhruva Space और दूसरी companies इस sector में काम कर रही हैं। सरकार के अनुसार 2014 में भारत में सिर्फ एक registered space startup था, जबकि 2026 में यह संख्या 400 से ज्यादा हो चुकी है।
Skyroot का Vikram-S launch भी इसी बदलाव का एक बड़ा example है। November 2022 में Skyroot ने अपना sub-orbital rocket launch किया और वह भारत की पहली private company बनी जिसने rocket को space में launch किया।
और यहां एक बात समझने वाली है। Private companies के आने का मतलब यह नहीं है कि ISRO खत्म हो रहा है या उसकी importance कम हो रही है। ISRO ने खुद साफ किया है कि private sector की participation का उद्देश्य industry को mature technologies और capabilities को scale करने देना है, ताकि ISRO advanced research, national missions और नई technologies पर ज्यादा focus कर सके।
ISRO और industry के बीच technology transfer पहले से चल रहा है। Small Satellite Launch Vehicle यानी SSLV की technology भी HAL को transfer की जा रही है, ताकि उसे industry के जरिए बड़े scale पर produce किया जा सके।
यानी जो छोटी-बड़ी manufacturing industry कर सकती है, अगर वह काम industry अच्छे से कर सकती है तो हर चीज का manufacturing काम एक ही बड़े research organisation को करने की जरूरत क्यों हो? ISRO ज्यादा बड़ी research और technology पर focus करे और industry production को scale करे, तो दोनों का फायदा देश को ही होगा।
Transportation इतना जरूरी क्यों है?
अगर किसी product की कीमत तय हो रही है, तो उसमें transportation भी एक बहुत बड़ा factor होता है। सामान जितनी आसानी से और जितनी जल्दी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचेगा, logistics उतनी efficient होगी और उसका असर product की final cost पर भी पड़ सकता है।
यही वजह है कि roads, railways और freight corridors सिर्फ infrastructure projects नहीं हैं। ये सीधे देश की economy से जुड़े हुए हैं।
Dedicated Freight Corridors इसका एक अच्छा example हैं। Eastern Dedicated Freight Corridor Ludhiana से Sonnagar तक और Western Dedicated Freight Corridor JNPT से Dadri तक बनाया गया है। March 2025 तक कुल 2,843 km में से 2,741 route kilometres यानी 96.4% operational हो चुके थे। इन corridors का उद्देश्य freight movement को बेहतर करना, existing railway network पर pressure कम करना और transportation cost तथा time को कम करना है।
यानी जब हम road infrastructure, railway network और dedicated freight corridors में improvement देखते हैं, तो इसका असर सिर्फ सड़क या railway line तक सीमित नहीं रहता। इसका असर industries, logistics, businesses और आखिर में आम आदमी तक पहुंचता है।
Internet ने गांव और शहर के बीच एक नई बराबरी बनाई है
इसी तरह mobile और internet का बढ़ता इस्तेमाल भी हमारे समाज में बड़ा बदलाव लेकर आया है। Mobile अपने आप में अच्छी या बुरी चीज नहीं है। यह दोधारी तलवार है। इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
लेकिन internet ने information तक पहुंच जरूर बहुत आसान कर दी है। आज अगर किसी गांव या देहात में रहने वाला बच्चा किसी चीज के बारे में जानना चाहता है, तो उसके पास वही internet है जो शहर में रहने वाले बच्चे के पास है। पहले कई ऐसी चीजें थीं जिनके बारे में लगता था कि शायद सिर्फ high-class society के लोग ही जान सकते हैं या उन्हें access कर सकते हैं। अब situation काफी बदल गई है।
मेरे हिसाब से development का एक सबसे अच्छा हिस्सा यही है कि opportunity सिर्फ जगह देखकर तय न हो। अगर किसी छोटे गांव में बैठा बच्चा अच्छी education, information या किसी नई technology के बारे में सीखना चाहता है, तो internet उसके लिए रास्ता खोल सकता है।
यह बदलाव सिर्फ technology का बदलाव नहीं है। यह society में भी बदलाव ला रहा है।
Madhya Pradesh में Sandipani Schools भी एक सकारात्मक बदलाव हैं
Education की बात करें तो Madhya Pradesh में Sandipani Schools का example भी मुझे काफी अच्छा लगता है।
मैंने पहले भी इस बात पर सवाल उठाया था कि Central Government के schools और कई State Government schools में इतना फर्क क्यों दिखाई देता है। Kendriya Vidyalayas जैसी व्यवस्था में अच्छी facilities और बेहतर educational environment देखने को मिलता है, जबकि कई state government schools लंबे समय तक infrastructure और facilities की कमी से जूझते रहे हैं।
लेकिन पिछले कुछ सालों में Madhya Pradesh में government schools को बेहतर बनाने की दिशा में जो काम हुआ है, उसमें Sandipani Vidyalayas एक positive change है। Madhya Pradesh government के अनुसार Sandipani Vidyalaya project का उद्देश्य economically disadvantaged backgrounds से आने वाले students को world-class quality education और modern infrastructure देना है। इन schools में smart classrooms, STEAM laboratories, vocational laboratories, ICT laboratories, libraries, sports facilities, music और dance rooms जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अच्छी education सिर्फ private schools तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अगर government school में पढ़ने वाले बच्चे को भी अच्छा infrastructure और अच्छी learning facilities मिलती हैं, तो यह एक बड़ा social change हो सकता है।
हर चीज अच्छी हो रही है, ऐसा कहना भी सही नहीं होगा
मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हमारे देश में हर चीज अच्छी हो गई है। ऐसा कहना गलत होगा। अभी भी बहुत सारी कमियां हैं। कई जगह infrastructure की समस्या है, education में कई challenges हैं, employment को लेकर challenges हैं और कई ऐसी चीजें हैं जिन पर सरकारों को अभी बहुत काम करना है।
लेकिन समस्या यह है कि जब कोई positive development होता है, तब भी कुछ लोग हर चीज में सिर्फ विरोध ढूंढने लगते हैं। मुझे लगता है कि अगर कोई चीज अच्छी हो रही है तो उसे अच्छा कहने में भी कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। सरकार किसी भी party की हो, अगर कोई काम देश के लोगों के लिए अच्छा है तो उसका स्वागत होना चाहिए।
आलोचना जरूरी है। लेकिन हर चीज का विरोध करना और हर positive change को भी गलत साबित करने की कोशिश करना शायद सही तरीका नहीं है।
आगे हमें किन चीजों को देखना चाहिए?
आने वाले समय में असली सवाल यह होगा कि इन बदलावों को कितनी दूर तक ले जाया जाता है। Make in India सिर्फ manufacturing numbers तक सीमित न रहे और Indian companies global level पर ज्यादा competitive बनें, private space sector सिर्फ startups की संख्या बढ़ाने तक सीमित न रहे, transportation की cost और time लगातार बेहतर हों और government schools में infrastructure के साथ education की quality भी मजबूत हो।
मेरे हिसाब से यही वो छोटे-बड़े बदलाव हैं जिनसे किसी देश का development धीरे-धीरे दिखाई देता है। हो सकता है मैंने बहुत सारी चीजें छोड़ दी हों। उन पर आगे विस्तार से चर्चा करेंगे। लेकिन अभी के लिए इतना कहना जरूरी है कि भारत में कुछ positive changes जरूर हो रहे हैं और इन प्रयासों के लिए present government के साथ-साथ हमारे देश के उन सभी लोगों का भी तहे दिल से अभिनंदन होना चाहिए जो इन बदलावों में अपना योगदान दे रहे हैं।
Questions people ask
- Make in India से भारत में क्या बदलाव आया है?
- Make in India का उद्देश्य भारत को manufacturing, design और innovation का मजबूत centre बनाना है। PLI जैसी schemes के जरिए electronics, pharmaceuticals, automobiles और दूसरे sectors में domestic manufacturing को बढ़ावा दिया गया है। इससे investment, production और employment में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- भारत के space sector में private companies की भूमिका क्या है?
- Private companies अब launch vehicles, satellites, propulsion, Earth observation और दूसरी space technologies पर काम कर रही हैं। Skyroot Aerospace और Agnikul Cosmos जैसी companies इसके examples हैं। ISRO के अनुसार private participation का उद्देश्य industry को mature technologies scale करने देना और ISRO को advanced research पर ज्यादा focus करने देना है।
- Dedicated Freight Corridors भारत के लिए क्यों जरूरी हैं?
- Dedicated Freight Corridors freight trains के लिए बनाए गए specialised railway routes हैं। इनका उद्देश्य goods movement को तेज और efficient बनाना, passenger routes पर pressure कम करना और logistics cost घटाना है। इससे industries और businesses के लिए सामान को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।
- Madhya Pradesh के Sandipani Schools क्या हैं?
- Sandipani Vidyalayas Madhya Pradesh government की education initiative है, जिसका उद्देश्य students को बेहतर और modern educational facilities देना है। इनमें smart classrooms, laboratories, libraries, sports facilities और दूसरी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। इसका focus खास तौर पर government-school education को बेहतर infrastructure और quality से मजबूत करना है।
Sources
- PLI Schemes attract over ₹2.16 lakh crore investment — pib.gov.in
- Space Start-ups in India — pib.gov.in
- Dedicated Freight Corridors and Infrastructure — pib.gov.in
- Chief Minister Dr. Yadav to Inaugurate Sandipani School Building in Jawad — mpinfo.org
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