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DAC ने ₹2.12 लाख करोड़ के रक्षा प्रस्ताव मंजूर किए

By Gagariya Editorial Desk•27 Oct 2026 IST•3 min read•Human Reviewed & Fact-Checked

नई दिल्ली में 26 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक हुई। इस बैठक में तीनों सेनाओं की अलग-अलग जरूरतों पर चर्चा हुई और प्रस्तावों को आगे की खरीद प्रक्रिया के लिए भेजने पर सहमति बनी।

क्या मंजूर हुआ

मंत्रालय के अनुसार, परिषद ने Acceptance of Necessity यानी AoN दी है। यह खरीद की शुरुआत में दी जाने वाली सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी होती है। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी कंपनी के साथ अनुबंध हो गया है या कीमत तय हो गई है। AoN के बाद प्रस्तावों के लिए अनुरोध पत्र जारी किए जाते हैं, परीक्षण होते हैं और फिर कीमत पर बातचीत होती है। इसलिए किसी भी उपकरण की अंतिम कीमत, आपूर्तिकर्ता का नाम और डिलीवरी का समय अभी सामने नहीं आया है। इस चरण को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि बड़ी रक्षा खरीद में मंजूरी और वास्तविक डिलीवरी के बीच अक्सर लंबा समय लगता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि लगभग 82 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी। यह आँकड़ा पूरी खरीद का अनुमान है, किसी एक प्रस्ताव का नहीं।

तीनों सेनाओं को क्या मिलेगा

सेना के लिए उच्च गतिशीलता वाले वाहन, स्वचालित ट्रैक वाली तोप प्रणाली, गोली चलने की जगह बताने वाली प्रणाली, हल्के बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, प्लेटफॉर्म आधारित काउंटर ड्रोन प्रणाली, निगरानी ड्रोन, एकीकृत निगरानी और हमला प्रणाली तथा लंबी दूरी की कामिकाज़े ड्रोन प्रणाली को मंजूरी दी गई। मंत्रालय ने कहा कि उच्च गतिशीलता वाले वाहन कठिन इलाकों में आवाजाही और साजो-सामान की मदद करेंगे। स्वचालित तोप प्रणाली से यंत्रीकृत टुकड़ियों को चलायमान रहते हुए मारक क्षमता मिलेगी। गोली की जगह बताने वाली प्रणाली से सैनिकों को वास्तविक समय में स्थिति की जानकारी मिलेगी, जबकि हल्के हेलीकॉप्टर टोही, खोज और बचाव, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे कामों में इस्तेमाल हो सकेंगे। बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली छोटे और नई पीढ़ी के हवाई खतरों से निपटने के लिए है, जबकि काउंटर ड्रोन प्रणाली से युद्ध के मैदान में टैंकों की सुरक्षा बढ़ने की उम्मीद है। निगरानी और हमला प्रणाली से सेना की देखने और निशाना लगाने की क्षमता मजबूत होगी। नौसेना के लिए Active Offboard Decoy System और स्वदेशी रूप से डिजाइन तथा निर्मित प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म मंजूर किए गए। मंत्रालय ने कहा कि डिकॉय प्रणाली आधुनिक जहाज रोधी मिसाइलों के खिलाफ रक्षा की विश्वसनीयता बढ़ाएगी। वायुसेना के लिए हेलीकॉप्टर, वायु रक्षा प्रणाली, हथियार और Mobile X-Band Doppler Weather Radar मंजूर किए गए। विशेष उपयोग वाले हेलीकॉप्टर से महत्वपूर्ण हवाई परिवहन की जरूरत पूरी होगी, जबकि मौसम रडार से अग्रिम क्षेत्रों में स्थानीय और उच्च गुणवत्ता वाली मौसम निगरानी मिलेगी।

भारतीय उद्योग पर क्या असर होगा

लगभग 82 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से करने का फैसला इस मंजूरी का दूसरा बड़ा संदेश है। इसका सीधा असर उन भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है जो रक्षा उपकरण, कलपुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स और रखरखाव से जुड़ी हैं। छोटे और मझोले उद्यमों के लिए भी अवसर बन सकते हैं, क्योंकि बड़ी प्रणालियों में अक्सर कई छोटे आपूर्तिकर्ता जुड़े होते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि अवसर का मतलब तुरंत ऑर्डर नहीं है। किसी कंपनी को काम तभी मिलेगा जब वह आगे की प्रक्रिया में तकनीकी और कीमत से जुड़ी शर्तें पूरी करेगी। इसलिए भारतीय उद्योग के लिए अगला चरण तैयारी का है, न कि केवल घोषणा का जश्न मनाने का।

शब्दावली

AoN यानी Acceptance of Necessity, खरीद की सैद्धांतिक मंजूरी है, अंतिम अनुबंध नहीं। VSHORADS यानी Very Short-Range Air Defence System, बहुत कम दूरी से आने वाले हवाई खतरों को रोकने वाली प्रणाली है। C-UAS यानी Counter Unmanned Aerial System, दुश्मन के ड्रोन से बचाव की प्रणाली है। UAV यानी Unmanned Aerial Vehicle, बिना पायलट वाला विमान है, जिसका इस्तेमाल निगरानी और अन्य कामों में होता है। इन शब्दों को समझने से यह साफ होता है कि मंजूर प्रस्तावों में निगरानी, हवाई सुरक्षा और ड्रोन से बचाव पर खास जोर है।

आगे क्या होगा

आगे की प्रक्रिया में हर प्रस्ताव के लिए अलग-अलग चरण होंगे। पहले तकनीकी जरूरतों के आधार पर अनुरोध पत्र जारी होंगे, फिर कंपनियों के प्रस्तावों का मूल्यांकन होगा और जरूरत पड़ने पर परीक्षण किए जाएँगे। इसके बाद कीमत पर बातचीत होगी और अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएँगे। मंत्रालय ने अभी किसी प्रस्ताव की अलग कीमत, आपूर्तिकर्ता या डिलीवरी की तारीख नहीं बताई है, इसलिए इन जानकारियों के लिए आगे की आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना होगा। 26 अक्टूबर की मंजूरी के बाद अब RFP, परीक्षण और अनुबंध की बारी है, और इन्हीं चरणों की अगली आधिकारिक तारीखें बताएँग कि कौन सी प्रणाली पहले आगे बढ़ती है। 📷 फोटो: Indian Army Southern Command, Wikimedia Commons (GODL-India) — फाइल फोटो

Questions people ask

DAC ने क्या मंजूरी दी है?
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 26 अक्टूबर 2026 को तीनों सेनाओं के लिए लगभग ₹2,12,000 करोड़ के पूँजीगत खरीद प्रस्तावों को Acceptance of Necessity दी है, जो सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी है।
क्या इसका मतलब है कि हथियारों का अनुबंध हो गया है?
नहीं। AoN अंतिम अनुबंध नहीं है। इसके बाद अनुरोध पत्र, परीक्षण, कीमत पर बातचीत और फिर अनुबंध की प्रक्रिया होगी।
82 प्रतिशत का क्या मतलब है?
मंत्रालय के अनुसार, मंजूर प्रस्तावों की कुल अनुमानित खरीद का लगभग 82 प्रतिशत भारतीय उद्योग से किया जाएगा। यह किसी एक प्रस्ताव का आँकड़ा नहीं है।
सेना को कौन से प्रमुख उपकरण मिलेंगे?
उच्च गतिशीलता वाले वाहन, स्वचालित ट्रैक वाली तोप प्रणाली, हल्के बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, काउंटर ड्रोन प्रणाली और निगरानी तथा कामिकाज़े ड्रोन प्रणाली, अन्य प्रस्तावों के साथ।
आगे क्या होगा?
हर प्रस्ताव के लिए अनुरोध पत्र जारी होंगे, प्रस्तावों का मूल्यांकन और परीक्षण होगा, फिर कीमत पर बातचीत के बाद अनुबंध होंगे। अलग कीमतों और डिलीवरी तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है।

Sources

  1. Defence Watch: DAC clears ₹2.12 lakh crore proposals (defencewatch.in)
  2. hi INDiA: Centre okays capital acquisition proposals worth Rs 2.12 lakh crore (hiindia.com)
  3. Aero Defence: DAC clears ₹2.12 lakh crore proposals (aerodefence.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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