भारत के तीन स्वदेशी AI मॉडल लॉन्च: EKA-1 और Dhīr

3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने तीन स्वदेशी AI फाउंडेशन मॉडल सार्वजनिक किए। Soket Labs का EKA-1 और ZenteiQ के Dhīr 2B व Dhīr 5B, तीनों IndiaAI Mission के तहत विकसित हुए हैं।
तीन मॉडल एक नज़र में
| मॉडल | बनाने वाली कंपनी | खासियत | भाषाएँ |
|---|---|---|---|
| EKA-1 | Soket Labs | 26.3 अरब पैरामीटर, करीब 7.5 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित | सभी 22 अनुसूचित भाषाएँ + अंग्रेज़ी |
| Dhīr 2B | ZenteiQ | छोटा, ओपन-सोर्स, ऑफलाइन व ऑन-प्रेमिस | अंग्रेज़ी + 10 भारतीय भाषाएँ |
| Dhīr 5B | ZenteiQ | छोटा, ओपन-सोर्स, ऑफलाइन व ऑन-प्रेमिस | अंग्रेज़ी + 10 भारतीय भाषाएँ |
EKA-1 क्या कर सकता है
कंपनी के अनुसार EKA-1 एक ओपन, स्पार्स हाइब्रिड लैंग्वेज मॉडल है, जो गणित, कोड, रीज़निंग और एजेंटिक कामों के लिए बना है। Soket Labs के CEO अभिषेक अपरवाल ने कहा कि इसे भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा क्षेत्र की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यहाँ एक सावधानी ज़रूरी है। लॉन्च की घोषणा से यह साबित नहीं होता कि बैंकों ने EKA-1 को अपना लिया है या यह किसी ऑपरेशनल साइबर डिफेंस सिस्टम में तैनात हो चुका है। यह मॉडल की घोषित क्षमता है, अभी इसका ज़मीनी इस्तेमाल परखा जाना बाकी है।
Dhīr: बिना इंटरनेट वाला AI
Dhīr 2B और Dhīr 5B का दांव उल्टा है: छोटे आकार, कम कंप्यूटिंग ज़रूरत। कंपनी के अनुसार दोनों मॉडल दस्तावेज़ आधारित ऑटोमेशन, जानकारी खोजने और बहुभाषी सहायता के काम कर सकते हैं, और वे रक्षा, सरकार, उद्योग व शिक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए बने हैं, खासकर वहाँ जहाँ कनेक्टिविटी कमज़ोर हो या डेटा बाहर भेजना ठीक न हो। कंपनी के अनुसार दोनों मॉडल GPU और TPU जैसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर चल सकते हैं और कम से कम 6GB RAM वाले किसी भी स्मार्टफोन पर काम कर सकते हैं। डेटा डिवाइस पर ही रहने से प्राइवेसी और सुरक्षा का दावा मज़बूत होता है, हालाँकि स्थानीय प्रोसेसिंग अपने आप किसी सिस्टम को सुरक्षित नहीं बना देती। डिवाइस की सुरक्षा, एक्सेस कंट्रोल और टेस्टिंग फिर भी ज़रूरी रहेगी।
पहले क्या था, अब क्या बदला
इस लॉन्च से पहले IndiaAI Mission के तहत Sarvam AI, BharatGen और Gnani AI के मॉडल आ चुके थे। नया कदम यह है कि अब एक साथ दो अलग डिज़ाइन सामने आए हैं: एक बड़ा मॉडल जो जटिल काम संभाले, और दो छोटे मॉडल जो बिना क्लाउड के चलें। दूसरा बदलाव संस्थागत है। मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशी मॉडल बनने से भारत की तकनीकी और रणनीतिक स्वायत्तता मज़बूत होगी। यानी संवेदनशील सरकारी या वित्तीय डेटा के लिए हर बार विदेशी सर्वर पर निर्भर रहना ज़रूरी नहीं रहेगा। यह अभी एक दिशा है, नतीजा नहीं: सरकार ने इन तीन मॉडलों के व्यापक स्वतंत्र बेंचमार्क नतीजे अभी सार्वजनिक नहीं किए हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय मॉडलों से तुलना फिलहाल घोषित आंकड़ों तक सीमित है।
किसके लिए क्या मतलब है
- बैंक और वित्तीय कंपनियाँ: दस्तावेज़ पढ़ना, कंप्लायंस में मदद और आंतरिक साइबर सुरक्षा जैसे कामों के लिए एक भारत-केंद्रित मॉडल का विकल्प मिलेगा। अपनाने से पहले सुरक्षा जांच और पायलट टेस्टिंग ज़रूरी होगी।
- सरकारी दफ्तर और रक्षा प्रतिष्ठान: Dhīr जैसे ऑफलाइन मॉडल से संवेदनशील दस्तावेज़ अपने ही नेटवर्क में प्रोसेस हो सकेंगे, बशर्ते ऑन-प्रेमिस सेटअप ठीक से किया जाए।
- डेवलपर, छात्र और शोधकर्ता: मंत्रालय के अनुसार AIKosh जैसे प्लेटफॉर्म के ज़रिए ये मॉडल शोधकर्ताओं, छात्रों और इनोवेटर्स तक पहुँचेंगे, ताकि उन पर प्रयोग और नए एप्लिकेशन बन सकें।
- आम मोबाइल यूज़र: 6GB RAM वाले फोन पर चलने वाला AI का मतलब है कि भविष्य में भारतीय भाषाओं में ऑफलाइन असिस्टेंट संभव हो सकते हैं। कब और किस ऐप में, यह अभी घोषित नहीं हुआ है।
शब्दावली
- फाउंडेशन मॉडल: विशाल डेटा पर प्रशिक्षित बेस AI मॉडल, जिस पर अलग-अलग कामों के लिए एप्लिकेशन बनते हैं।
- पैरामीटर: मॉडल के अंदर सीखे गए आंतरिक मान। ज़्यादा पैरामीटर का मतलब आमतौर पर ज़्यादा क्षमता, पर ज़्यादा कंप्यूटिंग लागत भी।
- टोकन: टेक्स्ट की छोटी इकाई, जिससे मॉडल को प्रशिक्षित किया जाता है।
- ऑन-प्रेमिस: सॉफ्टवेयर को अपनी ही संस्था के कंप्यूटर या सर्वर पर चलाना, बाहरी क्लाउड पर नहीं।
- एजेंटिक काम: ऐसे काम जहाँ AI सिर्फ जवाब न दे, बल्कि कई चरणों में कोई टास्क पूरा करे।
आगे क्या देखना होगा
अगले महीनों में तीन बातें तय करेंगी कि यह लॉन्च कितना असरदार रहा। पहली, क्या बैंक, सरकारी विभाग या रक्षा प्रतिष्ठान इन मॉडलों को पायलट के बाद असल काम में उतारते हैं। दूसरी, क्या स्वतंत्र बेंचमार्क में ये मॉडल अंतरराष्ट्रीय विकल्पों के सामने ठहरते हैं। तीसरी, AIKosh के ज़रिए डेवलपर और छात्रों तक इनकी पहुँच कितनी आसान बनती है। इनमें से किसी की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, इसलिए अगले आधिकारिक अपडेट का इंतज़ार करना होगा। 📷 Illustration: AI-generated
Questions people ask
- EKA-1 और Dhīr में क्या फर्क है?
- EKA-1 बड़ा मॉडल है (26.3 अरब पैरामीटर, 22 अनुसूचित भाषाएँ + अंग्रेज़ी) जो बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा जैसे जटिल कामों के लिए बना है। Dhīr 2B और 5B छोटे, ओपन-सोर्स मॉडल हैं जो बिना इंटरनेट के मोबाइल और ऑन-प्रेमिस सिस्टम पर चल सकते हैं।
- क्या Dhīr सच में बिना इंटरनेट के चलेगा?
- कंपनी के अनुसार हाँ। Dhīr मॉडल ऑन-डिवाइस और ऑन-प्रेमिस डिप्लॉयमेंट के लिए बने हैं, और कम से कम 6GB RAM वाले स्मार्टफोन पर चल सकते हैं। असल प्रदर्शन डिवाइस और सेटअप पर निर्भर करेगा।
- ये मॉडल किसने बनाए और कब लॉन्च हुए?
- EKA-1 Soket Labs ने और Dhīr 2B व 5B ZenteiQ ने बनाए। तीनों 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में MeitY सचिव एस. कृष्णन की मौजूदगी में लॉन्च हुए।
- क्या आम यूज़र इन मॉडलों का इस्तेमाल कर सकता है?
- सीधे इस्तेमाल की तारीख या ऐप अभी घोषित नहीं हुआ है। मंत्रालय के अनुसार AIKosh प्लेटफॉर्म के ज़रिए ये मॉडल शोधकर्ताओं, छात्रों और इनोवेटर्स तक पहुँचाए जाएंगे।
- क्या ये मॉडल विदेशी AI मॉडलों से बेहतर हैं?
- यह अभी साबित नहीं हुआ है। सरकार ने इनके व्यापक स्वतंत्र बेंचमार्क नतीजे सार्वजनिक नहीं किए हैं, इसलिए तुलना फिलहाल घोषित क्षमताओं तक सीमित है।
Sources
- The Hindu BusinessLine: Indian startups launch offline AI models Dhīr and EKA-1 (thehindubusinessline.com)
- The 420: India launches three homegrown AI models for banking, cybersecurity and offline use (the420.in)
- CXO Voice: India launches three homegrown AI models that can run offline (cxovoice.com)
- The Hindu BusinessLine: IndiaAI Mission releases EKA-1, Dhīr 2B and Dhīr 5B (thehindubusinessline.com)
Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.
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