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1 नवंबर से GST में क्या बदला: छोटे विक्रेताओं को राहत

By Gagariya Editorial Desk•1 Nov 2026 IST•6 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
1 नवंबर से GST में क्या बदला: छोटे विक्रेताओं को राहत
Photo: Own or licensed by the publisher

1 नवंबर से असल में क्या शुरू हुआ

GST Council की 57वीं बैठक (8 अक्टूबर 2026) में registration, return, refund और छूट से जुड़ी प्रक्रिया सुधारों को मंजूरी दी गई थी। इनमें से जो बदलाव प्रशासनिक प्रक्रिया से लागू हो सकते हैं, वे 1 नवंबर 2026 से चरणों में शुरू हो रहे हैं। कानून-संशोधन वाले बदलाव 1 दिसंबर 2026, 1 जनवरी 2027 और 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इसलिए 1 नवंबर को सब कुछ एक साथ नहीं बदला है, बल्कि एक चरणबद्ध शुरुआत हुई है।

पुराना नियम बनाम नया नियम

विषय 1 नवंबर से पहले 1 नवंबर 2026 से
दूसरे राज्य में ऑनलाइन विक्रेता का registration हर राज्य में अपनी जगह (physical office) जरूरी थी पात्र छोटे विक्रेता ECO के warehouse को principal place of business बना सकते हैं, operator की सहमति से
Electronic cash ledger का अतिरिक्त बैलेंस रिफंड के लिए अधिकारी की मंजूरी की प्रक्रिया लगती थी पूरा अतिरिक्त बैलेंस सिस्टम से स्वतः मंजूर होगा, अधिकारी के हस्तक्षेप के बिना
Zero-rated और inverted duty structure रिफंड Provisional रिफंड का दायरा सीमित था 90% तक provisional रिफंड सिस्टम की risk जाँच के आधार पर स्वतः मिलेगा
बिक्री के बाद की छूट पहले से समझौता और invoice से जोड़ना जरूरी था ये दोनों शर्तें हटीं, credit note और खरीदार का ITC reversal जरूरी रहेगा
छोटे निर्यात रिफंड ₹1,000 की न्यूनतम सीमा रुकावट बनती थी भारत से बाहर भेजे गए सामान पर चुकाए गए कर के रिफंड पर यह सीमा हटी

छोटे ऑनलाइन विक्रेता के लिए क्या बदला

नया Rule 14B उन छोटे विक्रेताओं के लिए है जो e-commerce operator के जरिए सामान बेचते हैं। पहले किसी राज्य में बेचने के लिए वहाँ अपनी जगह चाहिए थी। अब पात्र विक्रेता उस राज्य में operator के warehouse को अपना principal place of business घोषित कर सकता है। शर्तें साफ हैं: विक्रेता का अपने home state में नियमित registration और physical presence हो, वह सिर्फ उसी operator के जरिए सामान बेचे, operator की सहमति हो, और एक PAN पर एक राज्य में सिर्फ एक Rule 14B registration हो।

इस बदलाव का दायरा बड़ा है। CBIC की अधिसूचना से करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं के पूरे देश के बाज़ार तक पहुँचने की उम्मीद है, बिना हर उस राज्य में भौतिक कार्यालय खोले जहाँ उनका सामान रखा है। आवेदन Form GST REG-01 के ज़रिए होता है, जिसमें home-state GSTIN दर्ज किया जाता है। आवेदन इसके बाद e-commerce operator को भेजा जाता है, जिसे 7 working days के भीतर सहमति देनी या मना करना होता है। यदि इस अवधि में सहमति नहीं मिलती, तो आवेदन will not be processed further। यदि operator बाद में सहमति वापस लेता है, तो विक्रेता को 30 दिनों के भीतर Form GST REG-14 के ज़रिए registration में संशोधन करना होगा, और वापस लेने के बाद संशोधन न करने पर deemed cancellation हो सकती है। इसलिए नए राज्य के registration पर भरोसा करने से पहले operator की सहमति लिखित में लें, और आवेदन की तारीख से 7 दिन की अवधि का ध्यान रखें।

सीमा को ठीक से समझना जरूरी है। Rule 14B की शर्त के अनुसार registered व्यक्तियों को आपूर्ति पर कुल output tax (CGST, SGST या UTGST और IGST मिलाकर) ₹2.5 लाख प्रति माह से अधिक नहीं होना चाहिए, अपने ही PAN वाले registrations के बीच stock transfer को छोड़कर। Council की सिफारिश में इसे ITC passed on की सीमा के रूप में भी बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि कुल बिक्री ₹2.5 लाख तक सीमित है। यह कर-देयता की सीमा है, बिक्री की नहीं।

काम का उदाहरण: इंदौर का एक छोटा विक्रेता

मान लीजिए इंदौर का एक विक्रेता हस्तशिल्प सामान एक बड़े e-commerce platform के जरिए बेचता है। उसका home state मध्य प्रदेश है, जहाँ उसका नियमित GST registration है। वह महाराष्ट्र में भी सामान रखकर बेचना चाहता है, लेकिन वहाँ उसका कोई office नहीं है।

पुरानी व्यवस्था में उसे महाराष्ट्र में अपनी जगह का इंतज़ाम करना पड़ता। नई व्यवस्था में, अगर registered खरीदारों को आपूर्ति पर उसका मासिक output tax ₹2.5 लाख की सीमा के भीतर है और operator अपने warehouse के इस्तेमाल पर सहमत है, तो वह उस warehouse को महाराष्ट्र में अपना principal place of business बनाकर registration ले सकता है। यह registration सिर्फ उस operator के जरिए बिक्री के लिए होगा, ऑफलाइन बिक्री के लिए नहीं।

काम का उदाहरण: बिक्री के बाद की छूट

मान लीजिए एक supplier ने ₹1,00,000 के सामान की आपूर्ति की। बाद में उसने खरीदार को ₹10,000 की छूट दी। पहले इस छूट को taxable value से घटाने के लिए आपूर्ति से पहले या उसके समय का समझौता साबित करना पड़ता था, और छूट किसी खास invoice से जुड़ी होनी चाहिए थी।

1 नवंबर 2026 से ये दोनों शर्तें हट गई हैं। अब supplier को Section 34 के तहत credit note जारी करना होगा, और खरीदार को उस छूट से जुड़ा ITC वापस करना होगा। दोनों शर्तें पूरी होने पर taxable value ₹1,00,000 से घटकर ₹90,000 मानी जा सकेगी। यह उदाहरण सिर्फ मूल्य की गणना दिखाता है; कर की दर और दस्तावेज़ की शर्तें Section 34 के नियमों के अनुसार ही रहेंगी।

रिफंड में क्या तेज हुआ

तीन बातें कारोबारियों की नकदी पर सीधा असर डालेंगी। पहली, electronic cash ledger में पड़े पूरे अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड सिस्टम से स्वतः मंजूर होगा। दूसरी, zero-rated और inverted duty structure के पात्र दावों पर 90% provisional रिफंड सिस्टम की risk जाँच के आधार पर स्वतः मिलेगा, पावती के तीन कामकाजी दिनों के भीतर आदेश बनने की व्यवस्था के साथ। तीसरी, पावती या कमी-पत्र की समय सीमा 15 से घटकर 10 दिन हो गई है, इसके बाद deemed acknowledgement के साथ।

कानूनी आधार भी दर्ज है। CBIC की Notification No. 03/2026-Central Tax, दिनांक 26 अक्टूबर 2026, Finance Act 2026 की धाराओं 153 से 155 को 1 नवंबर 2026 से लागू करती है। ये धाराएँ CGST Act की धारा 15 (आपूर्ति का मूल्य), धारा 34 (credit note) और धारा 54 (रिफंड) में संशोधन करती हैं। इसके साथ Notification No. 05/2026-Central Tax से Rule 14B और रिफंड नियमों में बदलाव लागू हुए हैं।

किसे क्या करना है

  • छोटे ऑनलाइन विक्रेता: output tax की सीमा जाँचें, operator से warehouse इस्तेमाल की लिखित सहमति लें, फिर GST portal पर आवेदन करें।
  • निर्यातक: भारत से बाहर भेजे गए सामान पर चुकाए गए कर के ₹1,000 से कम के दावे भी अब संभव हैं, इसलिए छोटे दावे न छोड़ें।
  • छूट देने वाले supplier: पुराने समझौतों पर निर्भर रहने की बजाय credit note की प्रक्रिया और खरीदार से ITC reversal की पुष्टि की व्यवस्था बनाएँ।
  • Inverted duty structure वाले कारोबारी: 1 नवंबर 2026 से या उसके बाद लिए गए पात्र input services के credit पर नजर रखें; रिफंड गणना में यही तारीख अहम है।

Return forms भी बदल रहे हैं, राय देने का मौका है

1 नवंबर से एक और काम शुरू हुआ है जो सीधे कारोबारियों की शिकायतों से जुड़ा है। Finance Ministry ने draft GSTR-1, GSTR-1A और IFF forms को myGov portal पर 1 से 30 नवंबर 2026 तक सार्वजनिक टिप्पणी के लिए रखा है। GSTR-1 वह return है जिसमें outward supplies की जानकारी दी जाती है, GSTR-1A उसमें सुधार का विवरण है, और IFF quarterly filers के लिए मासिक invoice विवरण की सुविधा है। CBIC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि लगभग 80% GST notices return mismatch की वजह से जारी होते हैं, इसलिए नए forms का मकसद GSTR-1 की जानकारी को GSTR-3B से स्वतः मिलाना है। ये संशोधित forms 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। जो कारोबारी इन forms में कोई व्यावहारिक दिक्कत देखते हैं, उनके लिए टिप्पणी का यही मौका है, क्योंकि लागू होने के बाद बदलाव कठिन होगा।

आगे क्या देखना है

दिसंबर 2026 में नया FORM GST RFD-01 लागू होगा, जनवरी 2027 से कुछ reverse charge लेनदेन पर e-invoicing का विस्तार होगा, और कानून में संशोधन वाले बदलाव 1 अप्रैल 2027 से आने की बात है। Draft return forms पर टिप्पणी की आखिरी तारीख 30 नवंबर 2026 है। कारोबारियों को GST portal पर अपने दावों की पावती और provisional रिफंड की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है, कर सलाह नहीं है। किसी खास मामले में अपने कर सलाहकार से सलाह लें।

📷 Illustration: AI-generated

Questions people ask

1 नवंबर 2026 से GST में सबसे बड़ा बदलाव क्या है?
छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्यों में registration आसान हुआ है, रिफंड प्रक्रिया तेज और स्वतः हुई है, और बिक्री के बाद की छूट के लिए पहले से समझौते की शर्त हटी है। बदलाव चरणों में लागू हो रहे हैं।
क्या कोई भी विक्रेता दूसरे राज्य में warehouse को अपना पता बना सकता है?
नहीं। सिर्फ पात्र छोटे विक्रेता, जो e-commerce operator के जरिए सामान बेचते हैं, जिनका home state में नियमित registration है, जिनकी output tax सीमा ₹2.5 लाख प्रति माह के भीतर है, और जिन्हें operator की सहमति मिली है।
बिक्री के बाद छूट अब कैसे घटेगी?
Supplier को Section 34 के तहत credit note जारी करना होगा और खरीदार को उस छूट से जुड़ा ITC वापस करना होगा। पहले से समझौता और invoice से जोड़ने की शर्त अब नहीं है।
रिफंड कितना तेज मिलेगा?
Electronic cash ledger का पूरा अतिरिक्त बैलेंस स्वतः मंजूर होगा। Zero-rated और inverted duty structure के पात्र दावों पर 90% provisional रिफंड सिस्टम की risk जाँच के आधार पर मिलेगा।
क्या यह लेख कर सलाह है?
नहीं। यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है, कर सलाह नहीं है। किसी खास मामले में अपने कर सलाहकार से सलाह लें।

Sources

  1. CBIC Notification No. 03/2026-Central Tax: GST changes from 1 November 2026 (taxguru.in)
  2. GST changes from 1 November 2026: discounts, credit notes and refunds (careerindia.com)
  3. Rule 14B: GST registration for small e-commerce sellers (a2ztaxcorp.net)
  4. Faster GST refund processing from 1 November 2026 (a2ztaxcorp.net)
  5. 14 GST changes from 1 November 2026 (jurishour.in)
  6. GST rules eased for small online sellers, 9.5 lakh businesses likely to benefit (a2ztaxcorp.net)
  7. Draft GST return forms on myGov for public comments, 1–30 November 2026 (thehindubusinessline.com)
  8. Rule 14B: consent within seven working days (taxguru.in)
  9. GST registration overhaul: Notification No. 05/2026-Central Tax (taxguru.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

This story is informational only and is not financial advice. Decisions about money belong with a registered adviser — the sources above are a good place to start reading.

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