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यमुना सफाई को ₹8,941 करोड़ का पैकेज: शाह ने 43 परियोजनाओं का आगाज़ किया, ओखला में 124 MGD प्लांट

By Gagariya Editorial Desk•23 Oct 2026 IST•3 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
यमुना सफाई को ₹8,941 करोड़ का पैकेज: शाह ने 43 परियोजनाओं का आगाज़ किया, ओखला में 124 MGD प्लांट
Photo: Own or licensed by the publisher

क्या ऐलान हुआ?

22 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं का आगाज़ किया। कुल लागत ₹8,941.22 करोड़ बताई गई है। मकसद एक — यमुना का पुनरुद्धार।

43 में से 10 परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ। बाकी 33 का शिलान्यास। उद्घाटित 10 परियोजनाओं की लागत ₹2,827.11 करोड़ है; शिलान्यास वाली 33 की लागत ₹6,114.11 करोड़।

एक बात दर्ज रहे: शाह के भाषण में यह राशि "₹9,000 करोड़" कही गई। यह आधिकारिक ₹8,941.22 करोड़ का गोल अंक प्रतीत होता है — नीचे "जानकारी अलग-अलग" खंड में दोनों आँकड़े अलग से रखे गए हैं।

पैसा कहाँ-कहाँ लगेगा?

घटक लागत स्थिति
10 परियोजनाएँ (उद्घाटन) ₹2,827.11 करोड़ काम शुरू
33 परियोजनाएँ (शिलान्यास) ₹6,114.11 करोड़ काम शुरू होना बाकी
ओखला 124 MGD एसटीपी ~₹1,161 करोड़ पैकेज की सबसे बड़ी इकाई
29 विकेंद्रीकृत एसटीपी व पंपिंग स्टेशन ~₹3,113.67 करोड़ बाहरी दिल्ली: 358 अनधिकृत कॉलोनियाँ, 113 गाँव, ~36.29 लाख लोग
8 मौजूदा एसटीपी का उन्नयन लागत पर रिपोर्टों में अंतर क्षमता 78.2 MGD से 140.8 MGD
कुल ₹8,941.22 करोड़

ओखला का 124 MGD प्लांट क्या है?

यह पूरे पैकेज की सबसे बड़ी इकाई है — लागत लगभग ₹1,161 करोड़। 124 MGD यानी प्रतिदिन 12.4 करोड़ गैलन सीवेज शोधन की क्षमता। दिल्ली में यमुना की गंदगी का सबसे बड़ा स्रोत बिना शोधित सीवेज है; यह प्लांट उसी पर निशाना साधता है।

8 पुराने सीवेज प्लांट का क्या होगा?

मौजूदा आठ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उन्नयन किया जाएगा। इनकी कुल क्षमता 78.2 MGD से बढ़कर 140.8 MGD होगी — यानी करीब 80 प्रतिशत इजाफा। लागत को लेकर स्रोतों में अंतर है, इसलिए यहाँ केवल क्षमता के आँकड़े दिए जा रहे हैं — वे सभी रिपोर्टों में एक जैसे हैं।

कब तक साफ होगी यमुना?

सरकार का घोषित लक्ष्य सीधा है: नालों के रास्ते यमुना में बिना शोधित सीवेज न पहुँचे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के शब्दों में — "हर घर को सीवर नेटवर्क से जोड़ना और हर सीवर लाइन को एसटीपी से" (Indian Economic Observer के हवाले)। समय-सीमा दी गई है 2 से 2.5 साल की। यह सरकार का दावा है। जमीन पर नतीजा दिखेगा या नहीं — यह समय बताएगा।

'चलो यमुना' अभियान क्या था?

18 अक्टूबर को दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया था (ANI के हवाले, LatestLY) कि 'चलो यमुना' अभियान में करीब 35,000 लोग यमुना के 70 घाटों की सफाई में शामिल हुए। इस दौरान 76,755 किलो कचरा हटाया गया।

किन बातों पर रिपोर्टें अलग-अलग हैं?

gagariya ने तीन बिंदुओं पर अंतर पाया — इन्हें सुलझाया नहीं गया है, केवल दर्ज किया गया है:

  1. ₹8,941.22 करोड़ बनाम "₹9,000 करोड़": आधिकारिक दस्तावेज़ों में ₹8,941.22 करोड़; शाह के भाषण में "₹9,000 करोड़" कहा गया। अंतर गोल अंक का प्रतीत होता है।
  2. आयोजन स्थल: एक रिपोर्ट नजफगढ़ क्षेत्र बताती है, दूसरी द्वारका। कौन-सा सही है — यह ज्ञात नहीं।
  3. 8 एसटीपी उन्नयन की लागत: एक स्रोत ₹1,041 करोड़ बताता है, दूसरा ~₹2,000 करोड़। संभव है दूसरे में व्यापक कार्य शामिल हों। क्षमता के आँकड़े (78.2 → 140.8 MGD) हर जगह समान हैं।

मुख्य बातें

  • ₹8,941.22 करोड़ की 43 परियोजनाएँ — 10 का उद्घाटन, 33 का शिलान्यास।
  • सबसे बड़ी इकाई: ओखला 124 MGD एसटीपी (~₹1,161 करोड़)।
  • 8 एसटीपी की क्षमता 78.2 से बढ़कर 140.8 MGD होगी।
  • 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गाँवों के लिए 29 विकेंद्रीकृत एसटीपी (~₹3,113.67 करोड़)।
  • लक्ष्य: 2–2.5 साल में नालों से बिना शोधित सीवेज यमुना में न जाए।

📷 फोटो: Kool Nerd 123, Wikimedia Commons (CC BY 4.0)

Questions people ask

पैकेज की सबसे बड़ी परियोजना कौन सी है?
ओखला में 124 MGD क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट — लागत लगभग ₹1,161 करोड़। यह पूरे ₹8,941.22 करोड़ पैकेज की सबसे बड़ी इकाई है।
यमुना कब तक साफ होगी?
सरकार ने 2 से 2.5 साल की समय-सीमा दी है। ध्यान रहे — यह लक्ष्य है, गारंटी नहीं। घोषित मकसद इतना है कि नालों के रास्ते बिना शोधित सीवेज यमुना में न पहुँचे।
358 अनधिकृत कॉलोनियों में क्या-क्या बनेगा?
बाहरी दिल्ली में 29 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशन बनेंगे — लागत ~₹3,113.67 करोड़। इससे 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गाँवों के करीब 36.29 लाख लोग सीवर नेटवर्क से जुड़ेंगे।
'चलो यमुना' अभियान में क्या हुआ था?
18 अक्टूबर को जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया था (ANI के हवाले) कि अभियान में लगभग 35,000 लोग यमुना के 70 घाटों की सफाई में शामिल हुए और 76,755 किलो कचरा हटाया गया।
पहले की योजनाएँ क्यों नाकाम रहीं?
इस घोषणा में इसका कारण नहीं बताया गया। आधिकारिक बयानों में यह प्रश्न अनुत्तरित है — gagariya ने इसे "ज्ञात नहीं" के रूप में दर्ज किया है, अटकल नहीं लगाई।
क्या इस पैकेज से यमुना का पानी पीने लायक हो जाएगा?
नहीं। सरकार का घोषित लक्ष्य सिर्फ इतना है कि नालों के रास्ते बिना शोधित सीवेज यमुना में न पहुँचे। पीने योग्य पानी का कोई दावा इस पैकेज में नहीं किया गया है।

Sources

  1. ANI via LatestLY (latestly.com)
  2. Sahara Samay (saharasamay.com)
  3. National Times (nationaltimesmedia.com)
  4. Indian Economic Observer (indianeconomicobserver.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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