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वीज़ा संकट में जैकलीन को राहत, कोर्ट से मिली NOC

By Gagariya Editorial Desk•12 Oct 2026 IST•4 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
वीज़ा संकट में जैकलीन को राहत, कोर्ट से मिली NOC
Photo: Own or licensed by the publisher

6 अक्टूबर का आदेश: NOC मिली, वीज़ा अभी नहीं

दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने 6 अक्टूबर को एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीज को उनके वर्क वीज़ा के रिन्यूअल के लिए आवेदन करने की अनापत्ति (NOC) दे दी। आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गगनदीप सिंह ने दिया।

यह साफ कर देना ज़रूरी है: NOC का मतलब वीज़ा मिलना नहीं है। कोर्ट ने सिर्फ इतनी अनुमति दी है कि जैकलीन अब संबंधित अधिकारियों के सामने अपना वीज़ा-रिन्यूअल आवेदन रख सकती हैं। आखिरी फैसला विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय यानी FRRO का होगा। वह कानून, नियमों, परिपत्रों और उप-नियमों के तहत स्वतंत्र रूप से आवेदन पर विचार करेगा।

आदेश की भाषा भी यही कहती है। जज ने लिखा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आवेदक/आरोपी जैकलीन फर्नांडीज को संबंधित अधिकारियों के पास कानून के अनुसार वीज़ा रिन्यूअल के लिए आवेदन हेतु NOC दी जाती है, और संबंधित अथॉरिटी कानून, नियमों, परिपत्रों और लागू उप-नियमों के तहत स्वतंत्र रूप से विचार करेगी।

जैकलीन फर्नांडीज वीज़ा रिन्यूअल के लिए कोर्ट की NOC

जैकलीन श्रीलंका की नागरिक हैं। ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक वह 2009 से भारत में एम्प्लॉयमेंट वीज़ा पर रह रही हैं। वह वीज़ा अब खत्म हो चुका है।

उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि FRRO कोर्ट की NOC के बिना वर्क वीज़ा का रिन्यूअल नहीं कर रहा था। पेच सीधा था। वीज़ा रिन्यू कराने के लिए पहले कोर्ट की अनुमति चाहिए थी। वह अनुमति मिल गई है, तो अब FRRO आवेदन देख सकेगा।

एक कड़ी और है। कोर्ट ने 20 फरवरी 2025 को ही उनका पासपोर्ट श्रीलंकाई वाणिज्य दूतावास से दोबारा जारी कराने के लिए रिलीज़ कर दिया था। पासपोर्ट की रुकावट पहले दूर हुई, अब वीज़ा की बारी आई है।

कोर्ट ने क्या तर्क दिया

कोर्ट ने याचिका पर दो बातों को वज़न दिया।

पहली बात: कोर्ट ने नोट किया कि जैकलीन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सक्रिय रूप से जुड़ी हैं और भारत में उनकी कई पेशेवर प्रतिबद्धताएं हैं।

दूसरी बात: चल रहे ट्रायल की कार्यवाही में उनकी प्रभावी भागीदारी के लिए उनकी मौजूदगी ज़रूरी है।

इन दोनों को देखते हुए कोर्ट ने NOC देना उचित समझा और आवेदन का निपटारा कर दिया।

इस NOC वाली सुनवाई में ED के विशेष लोक अभियोजक ने कहा था कि पिछले साल मार्च के आदेश की तर्ज पर आदेश दिया जाए और FRRO अपने नियमों व दिशानिर्देशों के तहत रिन्यूअल आवेदन पर विचार करे। यह जानकारी लाइव लॉ की रिपोर्ट से है।

₹200 करोड़ का केस: पृष्ठभूमि क्या है

यह राहत ऐसे वक्त आई है जब जैकलीन ₹200 करोड़ के मनी-लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी हैं। ट्रिब्यून के मुताबिक जून में एक कोर्ट ने उनके, कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर और 15 अन्य लोगों के खिलाफ इस केस में आरोप तय कर दिए थे। यह प्रवर्तन निदेशालय (ED) का केस है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट से कुछ और कड़ियां जुड़ती हैं। ED ने जैकलीन को कई बार समन किया था। उन्हें पहली बार सप्लीमेंटरी चार्जशीट में सह-आरोपी बनाया गया। इस केस में वह दसवीं आरोपी हैं।

कोर्टों का पुराना रुख भी सामने है। लाइव लॉ के मुताबिक पिछले साल जुलाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस PMLA केस को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि सबूतों के आत्म-दोषारोपण की आशंका से ECIR रद्द नहीं हो सकता, क्योंकि वैधानिक और संवैधानिक सुरक्षा पहले से मौजूद है। पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ उनकी विशेष अनुमति याचिका भी खारिज कर दी, हालांकि उन्हें उचित स्तर पर कोर्ट जाने की छूट दी गई थी।

एक हेडलाइन, दो सच

इस खबर पर एक विसंगति बताना ज़रूरी है। बिज़नेस टुडे की हेडलाइन कहती है कि हाई कोर्ट ने NOC दी, लेकिन उसी खबर का टेक्स्ट साफ लिखता है कि आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गगनदीप सिंह ने 6 अक्टूबर को दिया था। राहत ट्रायल कोर्ट से मिली है, हाई कोर्ट से नहीं।

एक छोटा अंतर और। ट्रिब्यून उन्हें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लिखता है। लाइव लॉ उन्हें राउज़ एवेन्यू कोर्ट का विशेष न्यायाधीश कहता है। फिर भी दोनों एक ही न्यायाधीश की बात कर रहे हैं। आदेश भी वही — 6 अक्टूबर का।

अब तक का सफर

कब क्या हुआ
2009 जैकलीन भारत में एम्प्लॉयमेंट वीज़ा पर रहने लगीं (ट्रिब्यून के अनुसार)
पिछले साल जुलाई दिल्ली हाई कोर्ट ने PMLA केस रद्द करने की याचिका खारिज की (लाइव लॉ के अनुसार)
पिछले साल सितंबर सुप्रीम कोर्ट ने SLP खारिज की; उचित स्तर पर जाने की छूट (लाइव लॉ के अनुसार)
20 फरवरी 2025 पासपोर्ट श्रीलंकाई वाणिज्य दूतावास से दोबारा जारी कराने हेतु रिलीज़ (ट्रिब्यून के अनुसार)
जून जैकलीन, सुकेश चंद्रशेखर और 15 अन्य पर आरोप तय (ट्रिब्यून, बिज़नेस टुडे के अनुसार)
6 अक्टूबर 2026 राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने वीज़ा रिन्यूअल के लिए NOC दी (ट्रिब्यून, लाइव लॉ, बिज़नेस टुडे)

आगे क्या होगा

अब फैसला FRRO को करना है। जैकलीन अपना रिन्यूअल आवेदन दाखिल कर सकती हैं। FRRO उसे अपने नियमों, परिपत्रों और उप-नियमों के तहत स्वतंत्र रूप से परखेगा। वीज़ा मिलेगा या नहीं, यह फैसला अभी बाकी है।

साथ ही ₹200 करोड़ का ट्रायल अपनी रफ्तार से चलेगा। NOC ने उस केस की दिशा नहीं बदली है। बिज़नेस टुडे की खबर साफ लिखती है कि NOC का मतलब आरोपों पर क्लीन चिट या कोई फैसला नहीं है। यह सिर्फ वर्क वीज़ा के रिन्यूअल के लिए आवेदन की अनुमति देता है। अंतिम फैसला इमिग्रेशन अधिकारियों के हाथ में है।

कोर्ट ने NOC देते वक्त यह भी दर्ज किया था कि ट्रायल में उनकी मौजूदगी ज़रूरी है। यानी मुकदमा जारी रहेगा और उन्हें उसमें पेश होना होगा।

📷 फोटो: Bollywood Hungama, Wikimedia Commons (CC BY 3.0)

Questions people ask

क्या NOC मिलने से जैकलीन का वीज़ा रिन्यू हो गया?
नहीं। कोर्ट ने सिर्फ आवेदन करने की अनुमति दी है। आदेश साफ कहता है कि FRRO या संबंधित अथॉरिटी कानून, नियमों, परिपत्रों और उप-नियमों के तहत स्वतंत्र रूप से विचार करेगी। वीज़ा मिलेगा या नहीं, इसका फैसला अभी बाकी है।
ये ₹200 करोड़ का केस क्या है?
यह प्रवर्तन निदेशालय (ED) का मनी-लॉन्ड्रिंग केस है, जो कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है। जून में जैकलीन, चंद्रशेखर और 15 अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय हुए। लाइव लॉ के मुताबिक जैकलीन को पहली बार सप्लीमेंटरी चार्जशीट में सह-आरोपी बनाया गया था और वह केस में दसवीं आरोपी हैं।
क्या NOC का मतलब है कि जैकलीन केस में बरी हो गईं?
बिल्कुल नहीं। बिज़नेस टुडे की खबर साफ लिखती है कि NOC का मतलब आरोपों पर क्लीन चिट या कोई फैसला नहीं है। यह सिर्फ एक प्रशासनिक अनुमति है। ट्रायल जारी रहेगा, और कोर्ट ने NOC देते वक्त यह भी दर्ज किया कि ट्रायल में उनकी मौजूदगी ज़रूरी है।
जैकलीन भारत में कब से रह रही हैं?
वह श्रीलंका की नागरिक हैं। ट्रिब्यून के मुताबिक वह 2009 से भारत में एम्प्लॉयमेंट वीज़ा पर रह रही हैं। उनका वीज़ा खत्म हो चुका था, इसलिए FRRO से रिन्यूअल के लिए उन्हें कोर्ट की NOC की ज़रूरत पड़ी। कोर्ट ने नोट किया कि वह एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सक्रिय हैं।

Sources

  1. The Tribune — Delhi court grants NOC to Jacqueline Fernandez for work visa renewal (tribuneindia.com)
  2. BusinessToday — Breather for Jacqueline Fernandez: HC grants NOC for work visa in ₹200 crore money laundering case (businesstoday.in)
  3. LiveLaw — ₹200 Crore Money Laundering Case: Delhi Court Grants NOC To Jacqueline Fernandez For Renewing Work Visa (livelaw.in)
  4. Rediff — Delhi court grants NOC to Jacqueline Fernandez for renewing her work visa (m.rediff.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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