सुप्रीम कोर्ट के तीन नए जजों ने ली शपथ, संख्या 37

साढ़े तीन बजे। सुप्रीम कोर्ट के नए ब्लॉक का सभागार खचाखच भरा था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत एक-एक करके तीन जजों को पद की शपथ दिला रहे थे — संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ। 6 अक्टूबर की यह दोपहर शीर्ष अदालत के इतिहास में एक और दर्ज तारीख बन गई। तीन नए जजों के साथ सुप्रीम कोर्ट की कार्यात्मक ताकत 34 से बढ़कर 37 हो गई। मंजूर क्षमता 38 है। मतलब, अब सिर्फ एक कुर्सी खाली बची है।
यह शपथ आम चलन से हटकर थी। आम तौर पर नए जजों को सुबह शपथ दिलाई जाती है। इस बार समारोह दोपहर साढ़े तीन बजे हुआ — और कोर्ट ने इसे लाइव-स्ट्रीम भी किया। सभागार में सुप्रीम कोर्ट के सभी जज, न्यायिक अधिकारी और विभिन्न हाईकोर्टों के अफसर मौजूद थे। नए जजों के परिवारजन भी थे, वकील भी। माहौल औपचारिक था, लेकिन इतिहास रचने वाला।
तीनों की पुरानी कुर्सियां
तीनों ही हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। सुनीता अग्रवाल गुजरात हाईकोर्ट की, देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाईकोर्ट के और अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। ये तीनों देश के वरिष्ठतम हाईकोर्ट जजों में गिने जाते हैं — राष्ट्रीय वरिष्ठता क्रम में अग्रवाल चौथे, उपाध्याय पांचवें और सिंह छठे स्थान पर हैं।
| जज | नियुक्ति से पहले | मूल हाईकोर्ट |
|---|---|---|
| सुनीता अग्रवाल | गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश | इलाहाबाद |
| देवेंद्र कुमार उपाध्याय | दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश | इलाहाबाद |
| अपरेश कुमार सिंह | तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश | झारखंड |
सुनीता अग्रवाल: 21 साल की प्रैक्टिस से सुप्रीम कोर्ट तक
अग्रवाल मूलतः इलाहाबाद हाईकोर्ट से हैं। 30 अप्रैल 1966 को जन्मी सुनीता अग्रवाल ने 16 दिसंबर 1990 को वकालत की शुरुआत की। 21 साल तक दीवानी पक्ष में प्रैक्टिस की। फिर 21 नवंबर 2011 को वह इलाहाबाद हाईकोर्ट की अपर जज बनीं। 6 अगस्त 2013 को उन्होंने स्थायी जज की शपथ ली।
इलाहाबाद में 12 साल की सेवा के बाद 23 जुलाई 2023 को वह गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुईं। अब उनकी नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या तीन हो गई है।
देवेंद्र कुमार उपाध्याय: स्थायी अधिवक्ता से दिल्ली हाईकोर्ट तक
उपाध्याय भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से। 16 जून 1965 को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के मुस्कराई गांव में जन्मे देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने 1991 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली। 11 मई 1991 को वह वकील के रूप में पंजीकृत हुए।
मई 2007 में वह उत्तर प्रदेश के मुख्य स्थायी अधिवक्ता बने। यही जिम्मेदारी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज बनने तक उनके पास रही। 21 नवंबर 2011 को वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के अपर जज बने, 6 अगस्त 2013 को स्थायी जज हुए। 29 जुलाई 2023 को उन्होंने बंबई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की शपथ ली। 21 जनवरी 2025 को उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुआ।
अपरेश कुमार सिंह: तीन राज्यों के हाईकोर्टों का अनुभव
अपरेश कुमार सिंह का रास्ता झारखंड से होकर गुजरा है। 7 जुलाई 1965 को जन्मे सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी किया। 1990 में उन्होंने पटना हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। 2000 तक वहीं प्रैक्टिस की, फिर 2001 से झारखंड हाईकोर्ट में वकालत शुरू की।
24 जनवरी 2012 को वह झारखंड हाईकोर्ट के अपर जज बने। 16 जनवरी 2014 को स्थायी जज हुए। 20 दिसंबर 2022 से 19 फरवरी 2023 तक वह झारखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे। 17 अप्रैल 2023 को त्रिपुरा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। 19 जुलाई 2025 को उनका तबादला तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुआ। अब वह सुप्रीम कोर्ट के जज हैं।
अब तीन महिला जज
सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या तीन हो गई है। बी वी नागरत्ना 31 अगस्त 2021 से शीर्ष अदालत की जज हैं। वेंकिता सुब्रमनी मोहना 2 जून 2026 को नियुक्त हुईं।
एक फर्क ध्यान देने लायक है। नागरत्ना और अग्रवाल हाईकोर्ट से आई हैं। मोहना सीधे वकालत से सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं — वह शीर्ष अदालत की वरिष्ठ अधिवक्ता थीं। नागरत्ना का नाम एक और कारण से याद रहेगा। 2027 में वह एक महीने से भी कम समय के लिए भारत की मुख्य न्यायाधीश बनेंगी।
34 से 37 तक का सफर
इन तीन नियुक्तियों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर को की थी। इंडिया लीगल के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने योग्यता, वरिष्ठता, ईमानदारी और संस्थागत जरूरतों के पैमानों पर इन नामों पर विचार किया था। 5 अक्टूबर को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने घोषणा की कि सरकार ने तीनों नामों को मंजूरी दे दी है। द न्यूज़मिल के मुताबिक इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी नियुक्तियों पर सहमति दी।
संख्याओं का अंकगणित भी समझना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की मंजूर क्षमता इस साल बढ़कर 38 हुई है। सुप्रीम कोर्ट संशोधन अधिनियम, 2026 के बाद यह सीमा 34 से बढ़ाकर 38 की गई थी। शपथ से पहले कार्यात्मक ताकत 34 थी। अब 37 है। इंडिया लीगल के मुताबिक, जून में पांच जजों की नियुक्ति के बाद भी ताकत 37 पहुंची थी, लेकिन उसके बाद हुई रिक्तियों से संख्या फिर घटी थी।
आगे क्या
मंजूर 38 में से अब 37 पद भरे हैं। एक खाली पद के लिए अगली सिफारिश का इंतजार है। तीनों नए जज शपथ के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के नियमित बेंचों का हिस्सा बन गए हैं। उनकी नियुक्ति के साथ कॉलेजियम की 28 सितंबर की सिफारिश पूरी तरह लागू हो चुकी है। न्यायिक पदों की रिक्तियां देश भर की अदालतों में लंबित मामलों से जुड़ी रहती हैं, और शीर्ष अदालत के लगभग पूरे आकार में काम करने से बेंचों के गठन और मामलों के निपटारे पर असर पड़ेगा।
Questions people ask
- सुप्रीम कोर्ट में अब कुल कितने जज हैं?
- 6 अक्टूबर 2026 को तीन नए जजों की शपथ के बाद सुप्रीम कोर्ट की कार्यात्मक ताकत 37 हो गई है। मंजूर क्षमता 38 है, यानी अब सिर्फ एक पद खाली है। मंजूर क्षमता इस साल सुप्रीम कोर्ट संशोधन अधिनियम, 2026 के बाद 34 से बढ़ाकर 38 की गई थी।
- तीनों नए जज कौन हैं और वे कहां से आए हैं?
- तीनों हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। सुनीता अग्रवाल गुजरात हाईकोर्ट की, देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाईकोर्ट के और अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। अग्रवाल और उपाध्याय का मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद है, जबकि सिंह झारखंड से हैं।
- इन जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 28 सितंबर को इन तीन नामों की सिफारिश की। 5 अक्टूबर को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सरकार की मंजूरी की घोषणा की, इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सहमति दी और 6 अक्टूबर को शपथ हुई।
- सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की स्थिति क्या है?
- सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति के साथ शीर्ष अदालत में महिला जजों की संख्या तीन हो गई है। बी वी नागरत्ना 31 अगस्त 2021 से और वेंकिता सुब्रमनी मोहना 2 जून 2026 से जज हैं। नागरत्ना 2027 में एक महीने से भी कम समय के लिए भारत की मुख्य न्यायाधीश बनेंगी।
Sources
Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.
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