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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए 51 भारतीयों के परिजन कर सकेंगे मुआवजे का दावा, MEA public notice पर विचार करे

By Gagariya Editorial Desk•17 Oct 2026 IST•5 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए 51 भारतीयों के परिजन कर सकेंगे मुआवजे का दावा, MEA public notice पर विचार करे
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रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए मारे गए भारतीयों के परिवारों को मुआवजा मिले, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय (MEA) को अहम निर्देश दिया। LiveLaw के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि MEA इस बात पर विचार करे कि मुआवजे के दावों के लिए एक public notice जारी की जाए, ताकि सभी प्रभावित परिवार सामने आ सकें। यह आदेश चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत और जस्टिस जोयमल्या बागची की पीठ ने दिया, LiveLaw ने रिपोर्ट किया।

कोर्ट ने क्या कहा

पीठ का रुख सीधा था: मुआवजा मांगने का अधिकार सिर्फ उन परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा जिन्होंने अब तक दावा किया है — यह अधिकार उन सभी 51 मृतकों के परिजनों को मिलेगा, जिनकी मौत MEA की status report में दर्ज है। LiveLaw के अनुसार, कोर्ट ने MEA से एक ताज़ा status report भी मांगी है, जिसमें दो बातें साफ हों — रूस ने मुआवजे के तौर पर कितनी राशि तय की है, और वास्तव में कितनी राशि परिजनों तक पहुंची है। यानी सिर्फ कागज़ पर तय आंकड़े नहीं, ज़मीन पर पहुंची रकम का हिसाब भी कोर्ट देखना चाहता है।

संख्याओं में पूरी तस्वीर

MEA की status report में जो आंकड़े रखे गए, वे ssbcrack और LiveLaw की रिपोर्टों के अनुसार इस प्रकार हैं:

श्रेणी संख्या
रूसी सेना में भर्ती हुए भारतीय (लगभग) 267
मृतकों की संख्या 51
डिस्चार्ज हो चुके (मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के प्रयासों से) 139
जिनका कोई पता नहीं 77
रूसी अधिकारियों द्वारा missing बताए गए 7

इनमें से मुआवजे के दावों की कहानी सबसे चौंकाने वाली है। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी के अनुसार, अब तक सिर्फ 6 परिवारों ने मुआवजे का दावा किया — 6 claims प्रोसेस किए गए, जिनमें से 5 पूरी तरह settled हुए और 1 आंशिक (partially) निपटाया गया। 51 मौतों के सामने 6 दावे — यही वह अंतर है जिसने कोर्ट को public notice पर विचार करने का निर्देश देने के लिए प्रेरित किया।

मुआवजे तक पहुंचने में दिक्कत कहां है

इन आंकड़ों से दो बातें साफ होती हैं। पहली, कई परिवारों को शायद यह पता ही नहीं कि मुआवजे का दावा करने का रास्ता क्या है और कहां आवेदन करना है। दूसरी, युद्ध क्षेत्र में मारे गए लोगों के मामलों में DNA टेस्ट, मृत्यु प्रमाणन और शवों (mortal remains) की वापसी जैसी जटिलताएं होती हैं — एक अकेला परिवार इन्हें अकेले नहीं सुलझा सकता। कोर्ट ने इसी खाई को पाटने के लिए राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के District Legal Services Authorities को निर्देश दिया कि वे प्रभावित परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता (free legal aid) दें — दावों के लिए, DNA टेस्ट के लिए और mortal remains की वापसी के लिए। LiveLaw की रिपोर्ट में यह निर्देश विस्तार से दर्ज है।

पृष्ठभूमि: फर्ज़ी भर्ती एजेंटों का जाल

यह मामला अचानक नहीं उठा। इन याचिकाओं की जड़ में वे धोखाधड़ी वाले भर्ती एजेंट हैं, जिन्होंने नौकरी, बेहतर वेतन या अन्य प्रलोभनों के नाम पर भारतीय युवकों को रूस भेजा, जहां वे रूसी सेना में भर्ती हो गए। LiveLaw के अनुसार, इन्हीं फर्ज़ी एजेंटों के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई में कोर्ट ने यह निर्देश दिया। 267 भर्तियों और 51 मौतों का आंकड़ा इसी जाल की गंभीरता बताता है — और 77 लापता लोगों का सवाल अभी भी खुला है।

पाठकों के लिए खास बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर को कहा: सभी 51 मृतकों के परिजनों को मुआवजे का दावा करने का अधिकार है, सिर्फ उन 6 परिवारों को नहीं जिन्होंने अब तक दावा किया है।
  • MEA public notice जारी करने पर विचार करेगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार छूट न जाए — ASG ऐश्वर्या भाटी के अनुसार अब तक 6 दावे प्रोसेस हुए, 5 पूरी तरह settled, 1 आंशिक।
  • कोर्ट ने MEA से fresh status report मांगी: रूस ने कितना मुआवजा तय किया और कितना वास्तव में परिजनों को मिला।
  • राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के District Legal Services Authorities प्रभावित परिवारों को दावों, DNA टेस्ट और शवों की वापसी के लिए मुफ्त कानूनी सहायता देंगे।
  • MEA की status report के अनुसार 267 भारतीय रूसी सेना में भर्ती हुए, 51 की मौत हुई, 139 डिस्चार्ज हुए और 77 का पता नहीं — 7 को रूसी अधिकारियों ने missing बताया है।
  • अगर आपका कोई परिचित इस स्थिति में है, तो अपने ज़िले के District Legal Services Authority से संपर्क करना पहला कदम हो सकता है।

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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