सीमापुरी में इमारत गिरी, मलबे में कई लोग दबे

पीटीआई की खबर में एक लाइन ध्यान खींचती है — इमारत का अगला हिस्सा ढहा था। यानी पूरी बिल्डिंग जमींदोज नहीं हुई, उसका सामने वाला हिस्सा गिरा। लेकिन यह हादसा कितनी मंज़िला इमारत में हुआ, इसे लेकर रिपोर्टें अलग-अलग हैं। टाइम्स नाउ इसे पांच मंज़िला बता रहा है, वहीं लोकमत ने चार मंज़िला रिहायशी इमारत लिखा है। सोशल मीडिया पर आजतक का ग्राफिक भी चार मंज़िला ही कहता है। अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है।
3:30 बजे की फोन कॉल
बुधवार की दोपहर। दिल्ली फायर सर्विस के कंट्रोल रूम में करीब 3:30 बजे एक कॉल आई — न्यू सीमापुरी में इमारत गिर गई है। दमकल की गाड़ियां तुरंत मौके की ओर दौड़ पड़ीं। दिल्ली फायर सर्विस के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया — खोज और बचाव अभियान जारी है। उस वक्त मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका थी, और यह आशंका शाम तक बनी हुई थी।
मालिक सलीम: "बेटी-दामाद बच गए, 12 अभी भी नीचे"
जिसकी इमारत गिरी, वह सलीम मौके पर खड़ा था। उसने पीटीआई को बताया कि उसकी बेटी और दामाद अंदर फंस गए थे। दोनों को बाद में निकाल लिया गया। लेकिन सलीम की बात यहीं खत्म नहीं होती। उसका दावा है कि मलबे के नीचे अभी भी कम से कम 12 लोग दबे हो सकते हैं।
यह संख्या अब तक सामने आया सबसे बड़ा आंकड़ा है। एक बात साफ रहे — यह इमारत के मालिक का दावा है, प्रशासनिक आंकड़ा नहीं। आधिकारिक तौर पर कितने लोग फंसे हैं, इसकी पुष्टि अभी बाकी है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में "लगभग एक दर्जन" लोगों के फंसे होने की बात कही गई है, जो सलीम के दावे के काफी करीब है।
पड़ोस की गली से आवाजें
घटनास्थल के पास की गली में रहने वाले एक निवासी ने बताया कि इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर एक दुकान थी, जबकि ऊपर की चार मंज़िलों में परिवार रहते थे। यानी हादसे के वक्त अंदर लोगों के मौजूद होने की आशंका स्वाभाविक है।
कुलसुम खातून नाम की एक स्थानीय महिला ने कहा — स्थानीय लोगों और पुलिस ने मिलकर दो-तीन लोगों को बचाया है, लेकिन कई लोग अभी भी फंसे हुए हैं। उनका बयान मौके की अफरा-तफरी की झलक देता है। हालांकि बचाव की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, और इनमें से कोई भी अंतिम नहीं है।
संख्या का झमेला: कौन क्या कह रहा
| स्रोत | फंसे होने का दावा | बचाए गए |
|---|---|---|
| टाइम्स नाउ | लगभग एक दर्जन | चार लोग, जिनमें दो बच्चे |
| सलीम (पीटीआई के हवाले से) | कम से कम 12 अभी भी दबे | बेटी और दामाद बचाए गए |
| कुलसुम खातून (स्थानीय निवासी) | कई अभी भी फंसे | दो-तीन को पुलिस और लोगों ने बचाया |
| पंकज लूथरा (म्युनिसिपल काउंसलर) | — | चार-पांच लोग मलबे से निकाले गए |
टाइम्स नाउ ने यह भी लिखा है कि घायल या फंसे लोगों की सटीक संख्या पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। यानी ऊपर की सारी संख्याएं शुरुआती दावे हैं। अंतिम आंकड़ा बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही सामने आएगा।
40-50 साल पुराना ढांचा
झिलमिल के म्युनिसिपल काउंसलर पंकज लूथरा घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि उन्हें खबर मिली कि लगभग 40-50 साल पुरानी एक इमारत ढह गई है। मलबे से चार-पांच लोगों को पहले ही बाहर निकाला जा चुका है। उनकी बात के मुताबिक, पूरी पुलिस फ़ोर्स, एमसीडी और प्रशासन बचाव अभियान में लगे हुए हैं।
लूथरा ने यह भी कहा कि आगे कोई और घटना न हो, इसकी हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि दिल्ली में पुरानी और खतरनाक इमारतों का मुद्दा पिछले एक महीने से सुर्खियों में है।
ट्रैफिक पर असर
हादसे के बाद आसपास का इलाका छावनी में बदल गया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एक्स पर अलर्ट जारी किया — सीमापुरी गोल चक्कर, डीएलएफ भोपुड़ा और आसपास की सड़कों पर यातायात प्रभावित है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इलाके से बचकर निकलें और एम्बुलेंस व बचाव वाहनों के लिए रास्ता साफ रखें। भीड़ न लगाएं, ट्रैफिक कर्मियों के निर्देशों का पालन करें।
एक महीने पुराना घाव: सत्य निकेतन
सीमापुरी का हादसा दिल्ली के सत्य निकेतन में लड़कों के पीजी वाली इमारत गिरने के करीब एक महीने बाद हुआ है। लोकमत के अनुसार, 6 सितंबर को वहां मरम्मत का काम चल रहा था, तभी इमारत गिर गई थी। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे।
सत्य निकेतन का बचाव अभियान करीब 27 घंटे चला था। पीटीआई की उस वक्त की रिपोर्ट के मुताबिक, मलबे से 12 लोगों को निकाला गया था। इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार किया गया। नगर निगम ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को निलंबित कर दिया था। मजिस्ट्रियल जांच के आदेश हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना को दुखद बताया था, और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।
सत्य निकेतन के बाद से एमसीडी खतरनाक इमारतों, अवैध निर्माणों और मास्टर प्लान व बिल्डिंग बाय-लॉज़ के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। लोकमत ने एएनआई की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि मंगलवार को कई इलाकों में तोड़-फोड़ की कार्रवाई हुई, जिसमें पुरानी सीमापुरी भी शामिल थी। यानी कार्रवाई चल रही थी, फिर भी एक पुरानी इमारत ढह गई।
दिल्ली में पुरानी इमारतों का सवाल
दिल्ली में पुरानी इमारतों के गिरने का सिलसिला नया नहीं है। संकरी गलियां, घनी आबादी और दशकों पुराने ढांचे — बचाव कार्य को मुश्किल बनाने वाले यही कारण हर बार सामने आते हैं। सत्य निकेतन की घटना के बाद नगर निगम ने खतरनाक इमारतों की पहचान और कार्रवाई का दावा किया था। सीमापुरी का हादसा उस दावे की परीक्षा है।
आगे क्या देखना है
पहला सवाल सबसे अहम है — मलबे के नीचे और कितने लोग हैं, और उन्हें कब तक सुरक्षित निकाला जाएगा। बचाव अभियान अभी जारी है, और अंतिम आंकड़ा उसी के बाद आएगा।
दूसरा सवाल इमारत की उम्र और हालत का है। अगर यह 40-50 साल पुरानी थी, तो क्या यह पहले से खतरनाक घोषित थी? क्या इसकी जांच हुई थी? एमसीडी की कार्रवाई के दावों के बीच यह हादसा जवाब मांगता है।
तीसरा सवाल जिम्मेदारी का है। सत्य निकेतन में मालिक की गिरफ्तारी और अफसरों के निलंबन के बाद भी एक और इमारत गिर गई। इस बार जांच क्या दिशा लेगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
Questions people ask
- सीमापुरी में इमारत कब और कैसे गिरी?
- बुधवार 7 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:30 बजे दिल्ली फायर सर्विस को सूचना मिली कि न्यू सीमापुरी में एक इमारत गिर गई है। पीटीआई के अनुसार इमारत का अगला हिस्सा ढहा था। दमकल की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया गया।
- मलबे में कितने लोग दबे हैं?
- सटीक संख्या पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। टाइम्स नाउ के अनुसार लगभग एक दर्जन लोगों के फंसे होने की आशंका है। इमारत के मालिक सलीम ने पीटीआई को बताया कि कम से कम 12 लोग अभी भी दबे हो सकते हैं। बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही अंतिम आंकड़ा सामने आएगा।
- क्या हादसे में किसी की मौत हुई है?
- अब तक किसी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट कहती है कि घायल या फंसे लोगों की सटीक संख्या पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। चार लोग निकाले गए हैं, जिनमें दो बच्चे शामिल हैं। ताजा जानकारी के लिए बचाव अभियान के अपडेट देखें।
- सत्य निकेतन की घटना क्या थी?
- लगभग एक महीने पहले, 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पीजी इमारत मरम्मत के दौरान गिर गई थी। सात लोगों की मौत हुई थी। बचाव अभियान करीब 27 घंटे चला। मालिक गिरफ्तार हुआ, नगर निगम के अफसर निलंबित हुए। सीमापुरी हादसा उसी की पृष्ठभूमि में हुआ है।
Sources
Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.
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