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शारजाह में टैंकर पर ड्रोन हमला, 22 भारतीय सुरक्षित

By Gagariya Editorial Desk•10 Oct 2026 IST•7 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
शारजाह में टैंकर पर ड्रोन हमला, 22 भारतीय सुरक्षित
Photo: Own or licensed by the publisher

शुक्रवार की रात, लंगर पर खड़ा जहाज़

शुक्रवार रात खाड़ी के पानी में एक टैंकर लंगर डाले खड़ा था। तभी उस पर ड्रोन से हमला हो गया। यह घटना संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह ऐंकरेज की है। जहाज़ का नाम एमटी जेम नंबर 2 है, और यह पनामा के झंडे वाला कच्चे तेल का टैंकर है। खबर शनिवार सुबह तब सामने आई, जब केंद्रीय पोत, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी।

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि जहाज़ पर सवार सभी 22 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

X पर अपने पोस्ट में सोनोवाल ने लिखा: "9 अक्टूबर को पनामा के झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर एमटी जेम नंबर 2 पर शारजाह ऐंकरेज में ड्रोन हमला हुआ, जिस पर 22 भारतीय नागरिक सवार थे। मुझे यह बताते हुए राहत मिली है कि हमारे सभी 22 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित बताए गए हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि सरकार लगातार स्थिति पर नज़र रख रही है और जहाज़ के प्रबंधन वाली कंपनी के संपर्क में है, ताकि नाविकों की सुरक्षा और कुशल-क्षेम सुनिश्चित हो सके।

हमला कहाँ हुआ

शारजाह ऐंकरेज फारस की खाड़ी में स्थित है। मैरीन ट्रैफिक के मुताबिक यह संयुक्त अरब अमीरात के दुबई क्षेत्र में पड़ता है। यहाँ बंदरगाह पर बर्थ या बंकरिंग की प्रतीक्षा में जहाज़ लंगर पर खड़े रहते हैं, और यह खाड़ी का बेहद व्यस्त समुद्री इलाका माना जाता है।

एक बात यहाँ अहम है: हमले के समय जहाज़ लंगर पर खड़ा था, यानी चल नहीं रहा था। इसका मतलब यह है कि हमलावर ने एक स्थिर और पहले से पहचाने गए लक्ष्य को चुना था। खाड़ी जैसे व्यस्त गलियारे में यह बात और भी चिंताजनक है।

हमला किसने किया? किसी ने नहीं बताया

इस खबर में सबसे बड़ी खामोशी इसी सवाल पर है। सोनोवाल ने हमलावर का नाम नहीं लिया और घटना के बारे में कोई और ब्योरा नहीं दिया। जहाज़ को कितना नुकसान हुआ, इस पर भी उन्होंने कुछ नहीं कहा। यह जानकारी इंडियन एक्सप्रेस ने समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से दी है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने 6 अक्टूबर को होर्मुज़ में एमटी ऑन पीस पर हुए हमले की कड़ी निंदा की थी, लेकिन वहाँ भी हमलावर की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई थी। इस बार भी आधिकारिक बयानों में किसी देश, संगठन या समूह का नाम नहीं आया है। खबर लिखे जाने तक हमलावर का नाम किसी विश्वसनीय स्रोत ने प्रकाशित नहीं किया था, इसलिए इस लेख में उस पर कोई अटकल नहीं लगाई जा रही है।

सिर्फ दस दिन, तीन जहाज़

एमटी जेम नंबर 2 अकेला मामला नहीं है। पिछले दस दिनों में भारतीय नाविकों वाले जहाज़ों पर हमलों का एक सिलसिला चल रहा है, और तीनों घटनाएँ खाड़ी क्षेत्र में ही हुई हैं।

3 अक्टूबर को होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कुवैत के झंडे वाले टैंकर एमटी काज़िमा-3 पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ था। उस पर सवार पाँच भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाल लिया गया था। इसकी जानकारी खुद विदेश मंत्रालय ने दी थी।

6 अक्टूबर को होर्मुज़ में ही पनामा के झंडे वाले व्यावसायिक जहाज़ एमटी ऑन पीस पर प्रोजेक्टाइल गिरा। जहाज़ पर कुल 19 नाविक थे, जिनमें 17 भारतीय थे। इनमें से 12 नाविक घायल हुए, जिनमें 11 भारतीय थे। ओमान के अधिकारियों की मदद से घायलों को निकाला गया और ओमान के खसब में उनका इलाज हुआ। विदेश मंत्रालय ने इस हमले को "गंभीर चिंता" का विषय बताते हुए इसकी निंदा की थी।

और अब 9 अक्टूबर को शारजाह में एमटी जेम नंबर 2। शुक्र है कि इस बार कोई घायल नहीं हुआ, और जहाज़ के पूरे 22 सदस्यीय भारतीय दल के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है।

खाड़ी के अलावा काला सागर में भी ऐसा ही हो रहा है। एमवी रोयाड मम्मदोव पर हुए हमले में दो विदेशी नाविक मारे गए, जबकि जहाज़ पर मौजूद तीन भारतीय सुरक्षित थे। रोमानियाई अधिकारियों ने उन्हें बचाया था। विदेश मंत्रालय ने रोमानिया के "तुरंत कार्रवाई" के लिए आभार भी जताया था।

जहां तक हमलों की कुल संख्या का सवाल है, रॉयटर्स की 5 अक्टूबर की रिपोर्ट के हवाले से अक्टूबर के पहले हफ़्ते में ही कम से कम सात टैंकरों पर हमले की बात कही गई है। वहीं वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से हालिया हफ़्तों में नौ व्यावसायिक जहाज़ों पर हमले की रिपोर्ट है। दोनों आँकड़ों का दायरा अलग है, इसलिए इन्हें इनके अपने-अपने संदर्भ के साथ दिया जा रहा है।

घटना तारीख जहाज़ क्या हुआ
एमटी काज़िमा-3, होर्मुज़ 3 अक्टूबर कुवैत के झंडे वाला टैंकर प्रोजेक्टाइल से हमला; पाँच भारतीय नाविक सुरक्षित निकाले गए
एमटी ऑन पीस, होर्मुज़ 6 अक्टूबर पनामा के झंडे वाला जहाज़ प्रोजेक्टाइल; 12 घायल (11 भारतीय); ओमान के खसब में इलाज
एमटी जेम नंबर 2, शारजाह 9 अक्टूबर पनामा के झंडे वाला तेल टैंकर ड्रोन हमला; सभी 22 भारतीय नाविक सुरक्षित

नाविक संगठन की मांग: प्रधानमंत्री के अधीन क्राइसिस टीम

हमलों की बढ़ती संख्या से भारतीय नाविकों के संगठन भी परेशान हैं। फेडरेशन ऑफ सीफेयरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने शनिवार को समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि प्रधानमंत्री के अधीन एक उच्च-स्तरीय क्राइसिस प्रबंधन टीम बननी चाहिए, जो संघर्षग्रस्त समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों को हो सकने वाले खतरों का आकलन करे।

यादव ने कहा: "अगर आप समुद्र में रहना चाहते हैं, अगर आप वैश्विक बाज़ार में बने रहना चाहते हैं, तो मेरा मानना है कि अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री के अधीन एक उच्च-स्तरीय प्रबंधन क्राइसिस टीम का गठन हो, जिसमें सभी रक्षा, नौसेना और उद्योग जगत शामिल हों। तभी हम उन क्षेत्रों में मौजूद नाविकों के लिए संभावित खतरों का विश्लेषण कर सकेंगे।"

उन्होंने पिछले दस दिनों में ब्लैक सी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले जहाज़ों पर लगातार हो रहे हमलों का हवाला दिया। यादव के मुताबिक एमवी रोयाड मम्मदोव जैसे जहाज़ लगातार निशाना बन रहे हैं, और इस स्थिति को अब रुक-रुककर होने वाली घटनाएँ नहीं कहा जा सकता। यह मांग सीधे केंद्र सरकार से की गई है।

भारत-लाइबेरिया का नया मंच

हमलों के ठीक बीच भारत ने एक राजनयिक कदम भी बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को "ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स" नाम के एक नए समूह के उद्देश्यों को सामने रखा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस समूह का मकसद समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाना है।

जायसवाल ने कहा: "विचार यह है कि इन सबको एक साथ लाया जाए, ताकि नाविकों की सुरक्षा और व्यावसायिक जहाजरानी की सुरक्षा का मुद्दा वैश्विक विमर्श और चर्चा के केंद्र में आ सके, और हम अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ा सकें, ताकि व्यावसायिक जहाजरानी पर कोई असर न पड़े, उन पर हमले न हों और नाविक सुरक्षित रहें।"

इस समूह की पहली बैठक न्यूयॉर्क में हुई थी, जिसकी अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो नियांती ने संयुक्त रूप से की थी। इसमें 25 देशों ने हिस्सा लिया था। भारत और लाइबेरिया ने यह समूह पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान शुरू किया था।

गुरुवार को भारत और लाइबेरिया ने खाड़ी क्षेत्र और काला सागर में व्यावसायिक जहाज़ों और नाविकों पर हमलों की कड़ी निंदा की और इन्हें तुरंत रोकने की मांग की। संयुक्त बयान में कहा गया: "समुद्री व्यापार को बाधित करने और बेकसूर जान लेने वाली ये कार्रवाइयाँ बिल्कुल भी उचित नहीं ठहराई जा सकतीं। हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता के हित में ऐसे हमलों को तुरंत रोकने की मांग करते हैं।" दोनों देशों ने मारे गए नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। जयशंकर ने सीधे शब्दों में कहा था: "सीधे शब्दों में कहें तो ये हमले रुकने चाहिए।"

यह समूह खास इसलिए है क्योंकि भारत दुनिया में नाविकों का एक बड़ा स्रोत है, जबकि लाइबेरिया के पास टन भार के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा जहाज़ रजिस्टर है। दोनों देशों का साथ आना इस बात का संकेत है कि समुद्री सुरक्षा अब केवल एक देश का मसला नहीं रहा।

आगे क्या

फिलहाल सरकार की नज़र 22 नाविकों की कुशल-क्षेम पर है। सोनोवाल के मुताबिक जहाज़ प्रबंधन कंपनी से संपर्क बना हुआ है। लेकिन सवाल कई बाकी हैं: जहाज़ को कितना नुकसान हुआ? हमला किसने किया और क्यों? और सबसे बड़ा सवाल, अगले हमले से नाविकों को कौन बचाएगा?

इन सवालों के जवाब अभी किसी के पास नहीं हैं। लेकिन तीन बातें साफ हैं। पहली, हमले खाड़ी के भीतर गहरे तक पहुँच गए हैं। शारजाह लंगरगाह जैसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके भी अब लक्ष्य बन रहे हैं। दूसरी, नाविकों की सुरक्षा अब सिर्फ कंपनियों या झंडे वाले देशों की ज़िम्मेदारी नहीं रह गई है। भारत खुद आगे आकर अंतरराष्ट्रीय मंच बना रहा है। और तीसरी, नाविक संगठन अब सरकार से बड़े फैसले चाहते हैं, बयान नहीं।

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एमटी जेम नंबर 2 पर क्या हुआ?
9 अक्टूबर को संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह ऐंकरेज में पनामा के झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर एमटी जेम नंबर 2 पर ड्रोन हमला हुआ। जहाज़ लंगर पर खड़ा था। उस पर सवार सभी 22 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित बताए गए हैं। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शनिवार को X पर इसकी जानकारी दी।
शारजाह ऐंकरेज कहाँ है?
शारजाह ऐंकरेज फारस की खाड़ी में स्थित है। मैरीन ट्रैफिक के मुताबिक यह संयुक्त अरब अमीरात के दुबई क्षेत्र में पड़ता है। यह वह इलाका है जहाँ बंदरगाह पर बर्थ या बंकरिंग की प्रतीक्षा में जहाज़ लंगर पर खड़े रहते हैं, और यह खाड़ी का एक बेहद व्यस्त समुद्री इलाका माना जाता है।
क्या पहले भी भारतीय नाविकों वाले जहाज़ों पर हमले हुए हैं?
हाँ, पिछले दस दिनों में कई हमले हुए हैं। 3 अक्टूबर को होर्मुज़ में कुवैत के झंडे वाले टैंकर एमटी काज़िमा-3 पर प्रोजेक्टाइल गिरा था, जिसमें पाँच भारतीय सुरक्षित निकाले गए। 6 अक्टूबर को एमटी ऑन पीस पर हुए हमले में 11 भारतीय घायल हुए थे। काला सागर में एमवी रोयाड मम्मदोव पर हुए हमले में तीन भारतीय सुरक्षित थे।
नाविक संगठन सरकार से क्या मांग कर रहा है?
फेडरेशन ऑफ सीफेयरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि प्रधानमंत्री के अधीन एक उच्च-स्तरीय क्राइसिस प्रबंधन टीम बननी चाहिए। इसमें रक्षा प्रतिष्ठान, नौसेना और जहाजरानी उद्योग शामिल हों, ताकि संघर्षग्रस्त समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के खतरों का आकलन किया जा सके।
ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी ऑफ शिपिंग क्या है?
यह भारत और लाइबेरिया की अगुवाई में बना एक नया अंतरराष्ट्रीय समूह है, जिसे पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में शुरू किया गया। इसमें 25 देश शामिल हैं। इसका मकसद समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को वैश्विक चर्चा के केंद्र में लाना और जहाज़ों पर हमले रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना है।

Sources

  1. Indian Express (indianexpress.com)
  2. The Tribune (ANI) (tribuneindia.com)
  3. ABP Live (ANI) (news.abplive.com)
  4. ANI via Dailyhunt (m.dailyhunt.in)
  5. The Hindu (thehindu.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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