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संयुक्त राष्ट्र के बयान पर भारत का पलटवार

By Gagariya Editorial Desk•11 Oct 2026 IST•4 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
संयुक्त राष्ट्र के बयान पर भारत का पलटवार
Photo: Own or licensed by the publisher

शनिवार देर रात जिनेवा से एक पोस्ट आई, और दिल्ली की गहमागहमी एक झटके में अंतरराष्ट्रीय बहस बन गई। भारत के जिनेवा स्थित स्थायी मिशन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की चिंता पर दो सीधी पंक्तियों में जवाब दिया: चिंताएं अनुचित हैं, और यह भारत के अंदरूनी मामलों में अनुचित हस्तक्षेप है। मामला था 10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP समर्थकों की सामूहिक हिरासत का।

संयुक्त राष्ट्र ने क्या कहा

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थमीम अल-खीतन ने शनिवार को कहा कि उनका कार्यालय दिल्ली में "प्रदर्शनकारियों, विरोध के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों" की सामूहिक हिरासत की खबरों से चिंतित है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का पूरा सम्मान और पालन करने को कहा। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध पर लगने वाली हर पाबंदी को ज़रूरत और आनुपातिकता की कठोर कसौटी पर खरा उतरना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि कानून लागू करने वाले बलों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक संयम बरतना चाहिए। कार्यालय ने मांग की कि जिन लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए। साथ में अधिकारियों से अपील की गई कि प्रदर्शनकारियों की व्यापक चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक बातचीत की जाए।

भारत ने कैसे जवाब दिया

इंडिया एट UN जिनेवा के X अकाउंट से शनिवार को पोस्ट किए गए जवाब में कहा गया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांतिपूर्ण सभा का अधिकार संविधान से मिला है और मज़बूत संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका व स्वतंत्र मीडिया से उसकी रक्षा होती है। यह जवाब मिशन के आधिकारिक हैंडल से जारी हुआ और उसमें विदेश मंत्रालय से जुड़े हैंडलों को भी टैग किया गया था।

मिशन ने कहा कि हर लोकतंत्र की तरह भारत में भी नागरिक यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था के हित में उचित पाबंदियों के अधीन इस्तेमाल करते हैं। अधिकारियों की कार्रवाई कानून के मुताबिक होती है, और शिकायतों के निवारण के लिए अदालतें सबके लिए खुली हैं।

जवाब की आखिरी पंक्ति सबसे तीखी थी। मिशन ने लिखा कि इसलिए OHCHR की चिंताएं अनुचित हैं और भारत के अंदरूनी मामलों में अनुचित हस्तक्षेप हैं। उसी के साथ एक सलाह भी जुड़ी: अपने निष्पक्षता और अचयनात्मकता के जनादेश के अनुरूप, OHCHR को दुनिया में कहीं और होने वाले बड़े विरोध प्रदर्शनों पर भी तुलनीय ध्यान देना चाहिए।

शनिवार को दिल्ली में क्या हुआ था

यह पूरी बहस 10 अक्टूबर, शनिवार के दिल्ली के हालात पर है। उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरने की योजना बनाई थी। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से भाजपा को फायदा पहुंच रहा है।

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। शनिवार सुबह मुंबई से उड़ान भरकर दिल्ली पहुंचते ही CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और पार्टी के दो नेता सौरव दास व आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने इंटरनेट और परिवहन पर पाबंदियां लगाईं, दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद रहे। लाइवमिंट के अनुसार 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और 30,000 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात थे।

दिल्ली से बाहर भी कार्रवाई हुई। लाइवमिंट के अनुसार मुंबई में CJP के समर्थन में हुए प्रदर्शनों के दौरान करीब 400 लोग हिरासत में लिए गए, जिनमें कार्यकर्ता तुषार गांधी भी शामिल थे। ये प्रदर्शन अगस्त क्रांति मैदान, हुतात्मा चौक समेत शहर के कई स्थानों पर हुए थे।

कितने लोगों को हिरासत में लिया गया

हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर मीडिया के आंकड़े एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। यह टकराव खुद एक खबर है।

स्रोत आंकड़ा
NDTV करीब 3,000
लाइवमिंट 7,000 से ज्यादा
इंडियन एक्सप्रेस (पुलिस सूत्र) रात में करीब 1,200 और सुबह करीब 500
लाइवमिंट (पुलिस के शुरुआती बयान) करीब 1,000

NDTV के अनुसार हिरासत में लिए गए ज्यादातर लोगों को रिहा कर दिया गया, सिवाय CJP के शीर्ष नेतृत्व और यूट्यूबर ध्रुव राठी के। लाइवमिंट के अनुसार राठी को शनिवार को गुरुग्राम के सेक्टर 56 स्थित उनके निवास से हिरासत में लिया गया था।

लाइवमिंट ने यह भी लिखा कि कई विपक्षी नेता, जिनमें अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और पिनराई विजयन शामिल हैं, राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में हिरासत में लिए गए। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार राजधानी के कुछ हिस्सों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने लाइवमिंट से कहा कि पुलिसकर्मियों पर कथित हमले के सिलसिले में कई FIR दर्ज होने की संभावना है।

सोमवार को क्या होगा

इस बहस का अगला दौर सोमवार, 12 अक्टूबर को दिखेगा। राहुल गांधी ने X पर कई पोस्ट में घोषणा की है कि सोमवार को कांग्रेस, पूरा इंडिया गठबंधन और देश के युवा बड़ी संख्या में फिर सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर युवाओं और महिलाओं के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया और कहा कि प्रदर्शन दबाने की कोशिशों से युवाओं का गुस्सा और बढ़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत से मिलेगा और शनिवार की घटनाओं पर जवाबदेही की मांग करेगा। PTI के अनुसार कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी कहा है कि इंडिया गठबंधन सोमवार को दिल्ली में एक बड़ा विरोध मार्च निकालेगा और वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल CJI को ज्ञापन सौंपेगा।

जिनेवा से आए जवाब के बाद अब यह देखना होगा कि OHCHR इस मामले पर आगे क्या कहता है, और सोमवार के मार्च के बाद दिल्ली की सियासत किस करवट बैठती है।

Questions people ask

संयुक्त राष्ट्र ने दिल्ली की हिरासत पर क्या कहा?
OHCHR के प्रवक्ता थमीम अल-खीतन ने शनिवार को कहा कि कार्यालय दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों की सामूहिक हिरासत से चिंतित है। उन्होंने शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का सम्मान, बलों से अत्यधिक संयम, हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई और सार्थक बातचीत की मांग की।
भारत ने इस पर क्या जवाब दिया?
भारत के जिनेवा स्थित स्थायी मिशन ने X पर कहा कि शांतिपूर्ण सभा का अधिकार संविधान से मिला है और मज़बूत संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका व स्वतंत्र मीडिया से उसकी रक्षा होती है। मिशन ने OHCHR की चिंताओं को 'अनुचित' और 'अंदरूनी मामलों में अनुचित हस्तक्षेप' बताया, और अन्य देशों के बड़े प्रदर्शनों पर भी तुलनीय ध्यान देने की सलाह दी।
CJP का प्रदर्शन किस मांग को लेकर था?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर धरने की योजना बना रही थी। उसकी मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भाजपा के पक्ष में झुका है। दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
हिरासत के आंकड़ों में इतना अंतर क्यों है?
मीडिया रिपोर्टों के आंकड़े एक-दूसरे से मेल नहीं खाते: NDTV ने करीब 3,000, लाइवमिंट ने 7,000 से ज्यादा हिरासत बताई, जबकि इंडियन एक्सप्रेस के पुलिस सूत्रों ने रात में करीब 1,200 और सुबह करीब 500 की बात कही। पुलिस के शुरुआती बयानों में यह आंकड़ा करीब 1,000 था। यानी कोई एक सर्वसम्मत आंकड़ा सामने नहीं आया है।
सोमवार, 12 अक्टूबर को क्या होने वाला है?
राहुल गांधी के अनुसार सोमवार को कांग्रेस, इंडिया गठबंधन और देश के युवा बड़ी संख्या में फिर सड़कों पर उतरेंगे। PTI के अनुसार के.सी. वेणुगोपाल ने भी दिल्ली में बड़े विरोध मार्च की घोषणा की है। साथ में विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा।

Sources

  1. Indian Express: India slams UN rights body for raising concern over mass detentions (indianexpress.com)
  2. NDTV: 'Unwarranted Interference': India Slams UN's Remarks On Delhi Detentions (ndtv.com)
  3. LiveMint: India hits back at UN Human Rights over remarks on Delhi protest detentions (livemint.com)
  4. News18: 'Unwarranted Interference': India Hits Back At UN Rights Body Over Delhi Protest Remarks (news18.com)
  5. The News Mill: Rahul Gandhi announces October 12 INDIA bloc protest (thenewsmill.com)
  6. ThePrint (PTI): INDIA bloc to hold protest march in Delhi on Monday, submit memorandum to CJI (theprint.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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