RBI की NOC मिलते ही तय हुआ PFC में REC का विलय, बनेगी ₹11 लाख करोड़ लोन बुक वाली बिजली-वित्त दिग्गज

देश की दो सबसे बड़ी बिजली-क्षेत्र वित्त कंपनियों — पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और REC लिमिटेड — के प्रस्तावित विलय को भारतीय रिज़र्व बैंक से हरी झंडी मिल गई है। REC ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को BSE filing में बताया कि उसे 15 अक्टूबर 2026 को RBI से proposed merger के लिए No Objection Certificate प्राप्त हुआ है, The Hindu BusinessLine ने 16 अक्टूबर को इस खबर की पुष्टि की। psuconnect और gktoday ने भी NOC मिलने की खबर की पुष्टि की है, इसलिए यह जानकारी एक से अधिक स्रोतों से सत्यापित है।
RBI के NOC का मतलब क्या है
REC की BSE filing के अनुसार, RBI ने 15 अक्टूबर को PFC के साथ proposed merger के लिए NOC जारी किया। The Hindu BusinessLine के अनुसार, यह विलय प्रक्रिया का एक अहम नियामक पड़ाव है। NOC का मतलब है कि RBI को प्रस्तावित विलय की संरचना पर बुनियादी आपत्ति नहीं है — लेकिन यह अंतिम विलय नहीं है। REC की filing के अनुसार, shareholders और creditors की मंजूरी समेत अन्य statutory और regulatory approvals अभी बाकी हैं।
विलय का प्रस्ताव: कौन किसमें मिलेगा
दोनों कंपनियों के बोर्ड ने 28 जून 2026 को इस विलय को मंजूरी दी थी, The Hindu BusinessLine के अनुसार। प्रस्तावित ढांचे में REC (transferor company) का PFC (transferee company) में विलय होगा — यानी REC का PFC में समामेलन होगा और विलय के बाद PFC ही बची हुई इकाई होगी। REC ने कहा है कि विलय से ₹11 लाख करोड़ से अधिक की aggregate loan book वाली financing entity बनेगी।
दोनों कंपनियां एक नज़र में
| पहलू | REC लिमिटेड | PFC लिमिटेड |
|---|---|---|
| विलय में भूमिका | Transferor (विलय होने वाली) | Transferee (विलय करने वाली) |
| कारोबार | बिजली-क्षेत्र ऋण NBFC | बिजली-क्षेत्र ऋण NBFC |
| शेयर का अंकित मूल्य | ₹10 प्रति शेयर | ₹10 प्रति शेयर |
| बोर्ड की मंजूरी | 28 जून 2026 | 28 जून 2026 |
उपर्युक्त विवरण REC की BSE filing और The Hindu BusinessLine की 16 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार हैं।
दोनों कंपनियों की पृष्ठभूमि
PFC और REC दोनों ही बिजली क्षेत्र को ऋण देने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की NBFC हैं, The Hindu BusinessLine के अनुसार। Wikipedia पर दर्ज कंपनी जानकारी के अनुसार, REC, PFC की subsidiary है — यानी दोनों पहले से एक ही समूह का हिस्सा हैं और यह विलय समूह की दो इकाइयों को एक इकाई में समेटने जैसा है।
शेयर स्वैप अनुपात: REC के 100 शेयर पर PFC के 88
विलय की शर्तों के तहत REC के प्रत्येक 100 equity shares (₹10 प्रत्येक) के बदले PFC के 88 equity shares (₹10 प्रत्येक) मिलेंगे। REC ने 29 जुलाई को यह share exchange ratio घोषित किया था, The Hindu BusinessLine के अनुसार। Record date बाद में तय की जाएगी — यानी किस तारीख तक के REC शेयरधारक इस अनुपात के हकदार होंगे, यह अभी घोषित नहीं हुआ है। शेयरधारकों को record date की घोषणा का इंतज़ार करना चाहिए, क्योंकि उसी तारीख के आधार पर उनके खातों में शेयरों का तबादला होगा।
₹11 लाख करोड़ की लोन बुक का मतलब
REC के अनुसार, विलय के बाद बनने वाली इकाई की aggregate loan book ₹11 लाख करोड़ से अधिक होगी। दोनों कंपनियां पहले से ही बिजली क्षेत्र की सबसे बड़ी ऋणदाता NBFCs में गिनी जाती हैं, The Hindu BusinessLine के अनुसार, इसलिए दोनों के ऋण पोर्टफोलियो जुड़ने पर बिजली उत्पादन से लेकर वितरण तक की परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वित्त देने की क्षमता एक ही इकाई के पास होगी। REC का यह भी कहना है कि एकीकृत इकाई से परिचालन में दोहराव घटेगा — हालांकि यह कंपनी का अपना आकलन है।
विलय की टाइमलाइन: अब तक क्या-क्या हुआ
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 28 जून 2026 | दोनों बोर्डों ने विलय प्रस्ताव को मंजूरी दी |
| 29 जुलाई 2026 | REC ने share exchange ratio (100:88) घोषित किया |
| 15 अक्टूबर 2026 | RBI ने proposed merger के लिए NOC जारी किया |
| 16 अक्टूबर 2026 | REC ने BSE filing में NOC की जानकारी दी |
उपर्युक्त टाइमलाइन The Hindu BusinessLine की रिपोर्ट और REC की BSE filing के अनुसार है।
सलाहकार और वैल्यूएशन की टीम
विलय प्रस्ताव में कई सलाहकार शामिल हैं, The Hindu BusinessLine के अनुसार: Deloitte Touche Tohmatsu India (transaction और tax सलाहकार), Cyril Amarchand Mangaldas (कानूनी सलाहकार), RBSA Valuation Advisors (PFC की ओर से वैल्यूएशन), Ernst & Young Merchant Banking Services (REC की ओर से वैल्यूएशन), SBI Capital Markets (PFC की ओर से fairness opinion) और Nuvama Wealth Management (REC की ओर से fairness opinion)। दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग वैल्यूएशन और fairness opinion का होना बताता है कि शेयरधारकों के हितों का स्वतंत्र आकलन कराया गया है।
अब नज़र किन घोषणाओं पर रहेगी
RBI के NOC के बाद प्रक्रिया के अगले चरणों की घोषणाओं पर नज़र रहेगी। REC की filing के अनुसार, shareholders और creditors की मंजूरी समेत अन्य statutory और regulatory approvals बाकी हैं, The Hindu BusinessLine के अनुसार। आने वाले समय में शेयरधारकों की बैठक की तारीख, वोटिंग के नतीजे और record date की घोषणा जैसे पड़ाव सामने आएंगे — हालांकि इनकी तारीखें अभी घोषित नहीं हुई हैं। निवेशकों के लिए सबसे अहम record date की घोषणा होगी, क्योंकि उसी से तय होगा कि कौन से शेयरधारक स्वैप के हकदार होंगे।
पाठकों और शेयरधारकों के लिए मुख्य बातें
- RBI का NOC विलय की नियामक राह का बड़ा कदम है, लेकिन अंतिम विलय नहीं — शेयरधारकों और लेनदारों की मंजूरी अभी बाकी है, REC की filing के अनुसार।
- REC के शेयरधारकों को हर 100 शेयर पर PFC के 88 शेयर मिलेंगे; record date की घोषणा का इंतज़ार करें।
- विलय के बाद ₹11 लाख करोड़ से अधिक की aggregate loan book वाली इकाई बनेगी, REC के अनुसार।
- Exchange ratio 29 जुलाई को तय हो चुका था — इस हफ्ते की नई बात सिर्फ RBI की मंजूरी है।
- निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें; यह खबर केवल सूचना के लिए है।
This story is informational only and is not financial advice.
Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.
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