NEET: कंप्यूटर पर होगी परीक्षा? NTA पर संसद की पैनी नज़र

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नई दिल्ली। संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने शुक्रवार को NTA पर अपनी 382वीं रिपोर्ट सौंपी। मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली इस समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के सुधार के लिए 35 सिफारिशें दी हैं। रिपोर्ट का शीर्षक है 'Reforms and Strengthening of NTA'।
समिति ने साफ कहा है कि सिर्फ निगरानी के उपकरण लगाने से भरोसा नहीं लौटेगा। तीन मई को हुई नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 12 मई को रद्द करनी पड़ी थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद NTA ने खुद यह फैसला लिया। बायोमेट्रिक जांच, मोबाइल जैमर और AI निगरानी वाले CCTV के बावजूद परीक्षा बचाई नहीं जा सकी। दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।
समिति का सीधा कहना है कि परीक्षा के संचालन में NTA पर भरोसा सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय अखंडता का विषय है। इसके बाद शिक्षा विभाग को एक संसदीय ढांचा बनाने को कहा गया है, ताकि NTA दोनों सदनों के प्रति जवाबदेह रहे। यही इस रिपोर्ट का सबसे सख्त सुझाव है।
सबसे बड़ी सिफारिश: नीट अब कंप्यूटर पर
पेपर-पेंसिल की जगह कंप्यूटर। यही रिपोर्ट की सबसे बड़ी सिफारिश है। समिति चाहती है कि नीट-यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदला जाए। चरणबद्ध तरीके से। पहले तैयारी, फिर अमल।
इसके साथ एक और सिफारिश जुड़ी है। सरकार अपने स्वामित्व वाले और संचालित परीक्षा केंद्र बनाए। निजी केंद्रों पर निर्भरता घटाई जाए। NTA के पास जमा अधिशेष राशि को सरकारी परीक्षा केंद्रों के निर्माण में लगाने को कहा गया है। समिति के अनुसार निजी परीक्षा केंद्र "अक्सर परीक्षा सुरक्षा की कमज़ोर कड़ी साबित हुए हैं।"
कंप्यूटर परीक्षा में एक तकनीकी पेच है। लाखों विद्यार्थी अलग-अलग दिनों में परीक्षा देंगे तो पर्चे अलग होंगे। फिर सबके अंक बराबर कैसे होंगे? इसके लिए समिति ने कहा है कि नॉर्मलाइज़ेशन की स्वतंत्र ऑडिट वाली विधि अपनाई जाए और उसे लागू करने से पहले सार्वजनिक किया जाए।
समिति के मुताबिक, परीक्षा धांधली से मुनाफा कमाने वाले संगठित नेटवर्क "मौका-परस्त और संसाधनों से भरपूर होते हैं और हमेशा सुरक्षा की सबसे कमज़ोर कड़ी को खोजते हैं।" इसीलिए NTA को पर्याप्त स्टाफ, मज़बूत सुरक्षा प्रोटोकॉल, स्पष्ट जवाबदेही व्यवस्था और परीक्षाओं के डिजिटलीकरण की ज़रूरत है।
NTA की अपनी दिक्कतें
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा NTA के स्टाफ का है। समिति के अनुसार एजेंसी के 39 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 23 पर अधिकारी तैनात हैं। बाकी 16 पद खाली हैं, यानी 41 प्रतिशत की कमी। और जो 39 पद हैं, वे सब प्रतिनियुक्ति से भरे गए हैं। अपना कोई स्थायी अधिकारी नहीं।
समिति ने कहा है कि NTA अपने स्थायी अधिकारी भर्ती करे। खासकर साइकोमेट्रिक्स, परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल ढांचा, डेटा एनालिटिक्स और परीक्षा लॉजिस्टिक्स के विशेषज्ञ। केंद्रीय स्टाफिंग स्कीम के 16 पद वरिष्ठ नेतृत्व की अतिरिक्त परत हो सकते हैं, लेकिन विषय विशेषज्ञों का विकल्प नहीं। महानिदेशक का पद अतिरिक्त प्रभार में देने की परंपरा से भी बचना चाहिए।
कानूनी दर्जे पर भी सवाल है। समिति के अनुसार NTA एक पंजीकृत संस्था है। यह अपनी वार्षिक रिपोर्ट संसद के सामने नहीं रखता। एक वैधानिक संस्था के मुकाबले इस पर निगरानी कम होती है। इसीलिए जवाबदेही का ढांचा मांगा गया है।
प्रश्न पत्र और परीक्षा केंद्र की सुरक्षा
प्रश्न बैंक पर समिति ने सबसे लंबा ज़ोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार पर्चे लीक होने से बचाव का सबसे पुख्ता तरीका बड़ा, विविध और लगातार अद्यतन होता प्रश्न बैंक है। बार-बार एक ही प्रश्न सेट का इस्तेमाल या हर साल परीक्षकों से नए पर्चे बनवाना परीक्षा की सत्यनिष्ठा के लिए जोखिम है।
समिति चाहती है कि प्रश्न बैंक इतना बड़ा हो कि प्रश्न तय करने वालों को पहले से पता न हो कि पर्चे में क्या आएगा। प्रश्न बैंक बनाने में IIT, AIIMS और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के ईमानदार विशेषज्ञ लगाए जाएं। अनुवाद भी इन्हीं से कराया जाए। और इन विशेषज्ञों का ट्रैक रिकॉर्ड भी जांचा जाए। निजी कोचिंग चलाने वाले या परिवार के किसी सदस्य की परीक्षा दे रहे व्यक्ति का कोई संघर्ष नहीं होना चाहिए।
एक व्यावहारिक सिफारिश यह भी है कि परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने वाले विद्यार्थियों को एक अंडरटेकिंग दर्ज करके परीक्षा में बैठने दिया जाए। साथ ही बेईमान कंपनियों का राष्ट्रीय रजिस्टर बनाया जाए, ताकि अयोग्य घोषित हुई फर्में कहीं और ठेका न पा सकें।
क्या नीट दो चरणों में होगा?
नीट-यूजी एक ही परीक्षा से MBBS, BDS, नर्सिंग और AYUSH के प्रवेश होते हैं। इसमें 22 लाख से ज़्यादा विद्यार्थी शामिल होते हैं। समिति ने सवाल उठाया है कि एक ही पर्चा हर तरह के पाठ्यक्रम के लिए क्यों? सिविल सेवा परीक्षा की तरह बहु-चरणीय प्रारूप की व्यवहार्यता जांचने को कहा गया है।
प्रस्ताव यह है कि सभी चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए एक सामान्य प्रारंभिक परीक्षा हो और विशिष्ट पाठ्यक्रमों के लिए अलग मुख्य परीक्षा। इससे नर्सिंग या AYUSH की ओर जाने वाले विद्यार्थी की परीक्षा और रैंकिंग MBBS चाहने वाले से अलग होगी। अनावश्यक प्रतिस्पर्धा घटेगी।
एक और हैरान करने वाला खुलासा आयु सीमा को लेकर है। समिति को बताया गया कि नीट-यूजी में अभी न प्रयासों की कोई सीमा है, न वास्तविक ऊपरी आयु सीमा। इसके चलते 70 वर्ष से अधिक आयु के उम्मीदवार भी परीक्षा में बैठ चुके हैं। समिति ने शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय को मिलकर उचित आयु और प्रयास सीमा की संभावनाएं तलाशने को कहा है। सिर्फ UGC-NET को इससे छूट की बात कही गई है।
पारदर्शिता पर सरकार और समिति अलग-अलग
रिपोर्ट का एक संवेदनशील हिस्सा सरकार के दावे से जुड़ा है। शिक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि 2017 से 2025 तक NTA की किसी परीक्षा में पेपर लीक नहीं हुआ। समिति ने दर्ज किया है कि मंत्रालय का यह दावा "कुछ सदस्यों की राय से भिन्न था।" रिपोर्ट ने यह निष्कर्ष नहीं निकाला कि मंत्रालय का दावा गलत था। लेकिन समिति ने यह भी मांगा है कि परीक्षा अनियमितताओं, FIR और जांच का सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए UPSC जैसा नतीजा प्रकाशन भी सुझाया गया है। समिति ने कहा है कि 2024 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जारी किए गए केंद्र-वार आंकड़ों से सार्वजनिक जांच संभव हुई थी। यही रास्ता आगे भी अपनाया जाए।
भरोसा लौटाने के लिए समिति ने लिखा है कि "लगातार, पारदर्शी और दो-तरफा संवाद" की ज़रूरत है, न कि सिर्फ पोर्टल और अधिसूचनाओं तक सीमित जुड़ाव की। परीक्षा सुरक्षा का स्वतंत्र ऑडिट करने, उम्मीदवारों की शिकायतों की जांच करने और शिक्षा मंत्रालय को सीधे रिपोर्ट करने वाली व्यवस्था भी मांगी गई है।
| पेपर-पेंसिल परीक्षा | कंप्यूटर आधारित परीक्षा |
|---|---|
| पर्चा छपता, भंडारित और केंद्रों तक पहुंचता है | प्रश्न बैंक से पर्चा बनता है, लीक की सतह कम होती है |
| एक ही दिन, एक ही पर्चा, बड़े लॉजिस्टिक दबाव | चरणबद्ध परीक्षा संभव, लेकिन नॉर्मलाइज़ेशन की ज़रूरत |
| निजी केंद्रों की कमज़ोर कड़ी बड़ी समस्या | सरकारी मानकीकृत केंद्रों की मांग, ग्रामीण पहुंच की चिंता |
मुआवज़े और शिकायतों का मुद्दा
जिन विद्यार्थियों की परीक्षा प्रशासनिक कारणों से रद्द होती है, उनके बारे में भी रिपोर्ट में बात है। समिति ने कहा है कि ऐसे उम्मीदवारों को मुआवज़े पर विचार किया जाए। साथ ही शिकायत निपटान की समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए।
यह मांग उस हालत की ओर इशारा करती है जहां परीक्षा रद्द होने पर लाखों विद्यार्थियों का साल, तैयारी और खर्च दांव पर लग जाता है। NTA की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट में ही 474 अदालती मामले दर्ज थे। इनमें से 356 नीट-यूजी 2024 से जुड़े थे। समिति के अनुसार NTA हर साल लगभग 1.2 करोड़ उम्मीदवारों की परीक्षाएं कराता है। इतने बड़े तंत्र में एक भी गड़बड़ी का असर लाखों घरों तक पहुंचता है।
आगे क्या होगा
सबसे अहम सवाल अब भी बाकी है। कंप्यूटर परीक्षा का अंतिम फैसला किस रिपोर्ट के बाद होगा? टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलकेणि के नेतृत्व वाली एक उच्चस्तरीय कार्यदल की रिपोर्ट आना बाकी है। यह कार्यदल सार्वजनिक परीक्षाओं को मज़बूत करने और पर्चे लीक रोकने के उपाय सुझाने के लिए बनाया गया था।
इसी बीच, 30 सितंबर को अधिकारियों ने बताया था कि शिक्षा मंत्रालय परीक्षा-योग्य कंप्यूटर ढांचे की राष्ट्रीय रणनीति बना रहा है। इससे नीट को पेन-पेपर से ऑनलाइन मोड में लाने का रास्ता खुल सकता है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इस बदलाव के लिए पर्याप्त ढांचा, मानकीकृत परीक्षा केंद्र और सुरक्षा उपाय चाहिए, ताकि खासकर ग्रामीण और कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों के उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।
समिति की 35 सिफारिशें अब शिक्षा मंत्रालय की मेज़ पर हैं। ग्रामीण इलाकों में सरकार द्वारा संचालित कंप्यूटर केंद्रों की ठोस योजना, प्रश्न बैंक का निर्माण और NTA की जवाबदेही का ढांचा, तीनों एक साथ बढ़ेंगे या नहीं, यही आने वाले महीनों का असली इम्तिहान होगा।
Questions people ask
- क्या नीट अब कंप्यूटर पर होगी?
- संसदीय समिति ने नीट-यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने की सिफारिश की है, चरणबद्ध तरीके से। हालांकि अंतिम फैसला नंदन नीलकेणि के नेतृत्व वाले कार्यदल की रिपोर्ट के बाद होगा। शिक्षा मंत्रालय 30 सितंबर से परीक्षा-योग्य कंप्यूटर ढांचे की राष्ट्रीय रणनीति भी बना रहा है।
- क्या नीट दो चरणों की परीक्षा होगी?
- समिति ने सिफारिश की है कि NTA दो-चरण प्रारूप की व्यवहार्यता जांचे। प्रस्ताव है कि सभी चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए एक सामान्य प्रारंभिक परीक्षा हो और MBBS, नर्सिंग, AYUSH जैसे विशिष्ट पाठ्यक्रमों के लिए अलग मुख्य परीक्षा हो। इससे अलग-अलग पाठ्यक्रम चाहने वालों की प्रतिस्पर्धा अलग-अलग होगी।
- NTA को संसद के प्रति जवाबदेह क्यों बनाना चाहते हैं?
- समिति के अनुसार NTA एक पंजीकृत संस्था है और अपनी वार्षिक रिपोर्ट संसद के सामने नहीं रखता। वैधानिक संस्था के मुकाबले इस पर निगरानी कम होती है। समिति चाहती है कि एक विधायी व्यवस्था बने, ताकि एजेंसी दोनों सदनों के प्रति जवाबदेह हो और परीक्षा में भरोसा दोबारा बन सके।
- परीक्षा रद्द होने पर विद्यार्थियों को मुआवज़ा मिलेगा?
- समिति ने सुझाव दिया है कि प्रशासनिक कारणों से परीक्षा रद्द होने पर प्रभावित उम्मीदवारों को मुआवज़े पर विचार किया जाए। साथ ही शिकायतों के समयबद्ध निपटान की व्यवस्था भी मांगी गई है। यह सिफारिश है, नीति नहीं। इस पर शिक्षा मंत्रालय को फैसला लेना होगा।
- प्रश्न पत्र लीक रोकने के लिए क्या सुझाया गया?
- समिति ने बड़ा, विविध और लगातार अद्यतन प्रश्न बैंक बनाने की सिफारिश की है। IIT, AIIMS और IIM के विशेषज्ञों से प्रश्न बैंक बनवाया जाए, उनकी ईमानदारी और हित-संघर्ष की जांच हो। निजी परीक्षा केंद्रों पर निर्भरता घटाई जाए, बेईमान कंपनियों का राष्ट्रीय रजिस्टर बनाया जाए और सरकारी परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएं।
Sources
- NEET UG paper leak: Par panel for mechanism to ensure NTA's accountability to Parliament (PTI via DT Next) (dtnext.in)
- NEET UG paper leak: Par panel for mechanism to ensure NTA's accountability to Parliament (PTI via ThePrint) (theprint.in)
- NEET cancellation despite security overhaul exposes gaps in NTA reforms: House panel (Times of India) (timesofindia.indiatimes.com)
- NEET-UG 2026 cancellation exposes need for reforms, parliamentary panel recommends CBT (Times of India) (timesofindia.indiatimes.com)
Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.
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