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नागपुर विजयादशमी उत्सव में मोहन भागवत की चेतावनी: "रेजीम चेंज कभी काम नहीं किया, न करेगा"

By Gagariya Editorial Desk•20 Oct 2026 IST•3 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
नागपुर विजयादशमी उत्सव में मोहन भागवत की चेतावनी: "रेजीम चेंज कभी काम नहीं किया, न करेगा"
Photo: Own or licensed by the publisher

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के संबोधन में चेतावनी दी कि कुछ वैश्विक ताकतें भारत में "रेजीम चेंज" के जरिए अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार उन्होंने कहा, "रेजीम बदलने से हालात बदल जाएंगे — ऐसा सोचना गलत है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, आगे भी नहीं होगा।"

क्या कहा भागवत ने

भागवत का कहना था कि सत्ता बदलने का दावा करने वाली ताकतें दरअसल अपने हित साधती हैं, और ऐसे प्रयासों से कभी वांछित नतीजे नहीं मिले। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार उन्होंने कहा, "वे कहते हैं कि सत्ता बदलने से हालात बदल जाएंगे, लेकिन ऐसा कभी हुआ ही नहीं।"

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ वैश्विक शक्तियां भारत को विकसित तो देखना चाहती हैं, लेकिन बहुत शक्तिशाली नहीं — क्योंकि मजबूत भारत उनकी पकड़ को चुनौती दे सकता है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार भागवत ने पश्चिम से आ रही एक "आंधी" का जिक्र किया, जो संस्कृति, व्यवस्था और सुरक्षा के खिलाफ है।

किन देशों का उदाहरण दिया

भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश में हालिया उथल-पुथल का हवाला दिया। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार उनका तर्क था कि विदेशी हितों वाली ताकतें "रेजीम चेंज" को राजनीतिक हालात बदलने का हथियार बनाती हैं, लेकिन उससे किसी देश की बुनियादी समस्याएं कभी हल नहीं हुईं।

विरोध-प्रदर्शनों पर क्या बोले

लोकतंत्र में प्रदर्शनों को अपरिहार्य बताते हुए भागवत ने कहा कि उनका मकसद समाधान होना चाहिए, विभाजन नहीं। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार उन्होंने चेताया कि जब प्रदर्शन जनकल्याण के बजाय राजनीतिक हितों से प्रेरित होते हैं, तो वे लोगों और विचारधाराओं के प्रति कटुता फैलाने का जरिया बन जाते हैं।

उन्होंने नेताओं, प्रदर्शनकारियों और प्रशासन — तीनों से अपील की कि चाहे भावनाएं कितनी भी तीव्र हों, संविधान की सीमाओं, सभ्य सार्वजनिक संवाद और शालीन आचरण का सम्मान रखा जाए। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार यह बयान मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आया है।

शताब्दी वर्ष का विशेष आयोजन

इस बार का विजयादशमी उत्सव RSS के लिए खास है — 1925 में स्थापित संगठन ने 2025 में अपने 100 साल पूरे किए हैं, और यह कार्यक्रम उसी शताब्दी वर्ष का हिस्सा है (नागपुर टुडे)। परंपरा के अनुसार समारोह की शुरुआत शस्त्र पूजा से हुई।

पावर कॉरिडोर्स के अनुसार पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे, और संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की गई।

मुख्य बातें

  • भागवत का दावा: भारत में "रेजीम चेंज" के प्रयास कामयाब नहीं होंगे।
  • उदाहरण के तौर पर फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश का जिक्र।
  • प्रदर्शनों पर राय: मकसद समाधान हो, न कि विभाजन और कटुता।
  • RSS शताब्दी वर्ष: 1925 में स्थापना, 2025 में 100 साल पूरे।

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उन्होंने कहा कि वैश्विक ताकतें भारत में "रेजीम चेंज" के जरिए अस्थिरता फैलाना चाहती हैं, लेकिन भारत में ऐसा नहीं होगा।
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भागवत के अनुसार कुछ विदेशी ताकतें सत्ता बदलवाकर किसी देश के हालात अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करती हैं।
bhagwat ne kin deshon ka udaharan diya
फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश।
rss ke 100 saal kab pure hue
RSS की स्थापना 1925 में हुई थी; 2025 में 100 साल पूरे हुए।

Sources

  1. इकोनॉमिक टाइम्स (economictimes.indiatimes.com)
  2. हिंदुस्तान टाइम्स (hindustantimes.com)
  3. नागपुर टुडे (nagpurtoday.in)
  4. पावर कॉरिडोर्स (powercorridors.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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