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मुरुगन ने छोड़ा मंत्रिपद, 2029 लोकसभा की तैयारी में उतरेंगे

By Gagariya Editorial Desk•13 Oct 2026 IST•4 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
मुरुगन ने छोड़ा मंत्रिपद, 2029 लोकसभा की तैयारी में उतरेंगे
Photo: Own or licensed by the publisher

मंगलवार की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास एक इस्तीफ़े का पत्र पहुंचा। भेजने वाले थे केंद्रीय राज्यमंत्री एल. मुरुगन। उन्होंने लिखा कि वे मंत्रिपरिषद छोड़ना चाहते हैं। साथ ही मध्य प्रदेश से मिली राज्यसभा की सीट भी उन्होंने छोड़ दी।

खबर की जानकारी मुरुगन ने खुद दी। उन्होंने अपना इस्तीफ़े का पत्र सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया। उसी के साथ लिखा कि भारत माता और तमिलनाडु की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में काम करने को अपने जीवन का सौभाग्य बताया।

पत्र की भाषा साफ थी। कोई गोलमोल बात नहीं। उन्होंने लिखा, "अब मैं ज़मीनी स्तर पर लौटना चाहता हूं, अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहना चाहता हूं और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मज़बूत करने में अपना पूरा समय देना चाहता हूं।" अंत में तीन शब्द जोड़े: "Nation First. Party Next. Self Last." यानी राष्ट्र पहले, पार्टी बाद में, स्वयं सबसे अंत में।

पत्र में तमिलनाडु के काम का ज़िक्र

इस्तीफ़े के पत्र में मुरुगन ने मोदी सरकार के तमिलनाडु से जुड़े कामों की सराहना की। टाइम्स नाउ के अनुसार, उन्होंने चेन्नई मेट्रो, तूतीकोरिन बंदरगाह के विस्तार, राजमार्गों और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 26 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी लिखा कि वे प्रधानमंत्री के "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" के संदेश को तमिलनाडु के लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह अनुरोध मुरुगन ने खुद प्रधानमंत्री मोदी से किया था। उनका कहना था कि उन्हें राज्यमंत्री और राज्यसभा सांसद के पदों से मुक्त किया जाए, ताकि वे तमिलनाडु में पार्टी के काम पर पूरा ध्यान दे सकें। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मुरुगन ने पत्र में तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने का अनुरोध किया है।

एक बात स्पष्ट कर दी जाए। प्रधानमंत्री ने यह इस्तीफ़ा स्वीकार किया या नहीं, इसकी खबर अब तक किसी समाचार संस्थान ने नहीं दी है। वनइंडिया की खबर की सुर्खी भी यही कहती है कि मुरुगन ने मंत्रिपरिषद छोड़ने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की अनुमति मांगी है। यानी मामला अभी अनुरोध के स्तर पर है।

कौन हैं एल. मुरुगन

मुरुगन की कहानी दिल्ली की सियासत में जानी-पहचानी नहीं है। उनके अपने शब्दों में, वे "दिहाड़ी मज़दूरों के बेटे" हैं। वनइंडिया के अनुसार, उन्होंने पत्र में बताया कि उनके माता-पिता दिहाड़ी मज़दूरी और पशु चराने का काम करते थे और आज भी तमिलनाडु के कोंनूर गांव में सादा जीवन जीते हैं।

वनइंडिया के अनुसार ही, मुरुगन का जन्म तमिलनाडु के नमक्कल ज़िले में हुआ। उनके माता-पिता तेलुगुभाषी हैं और वे अरुंधतियार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। राजनीति में उनकी शुरुआत छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई। 2020 में वे भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष बने। जुलाई 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल फेरबदल में उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया। उसके बाद के. अन्नामलाई ने तमिलनाडु भाजपा की कमान संभाली।

मुरुगन मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इंडियन एक्सप्रेस और वनइंडिया दोनों के अनुसार, उनका कार्यकाल 2030 तक चलना था। यानी तय समय से करीब चार साल पहले वे सदन छोड़ रहे हैं।

फेरबदल की अटकलों के बीच इस्तीफ़ा

यह इस्तीफ़ा ऐसे समय आया है जब दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिमंडल के बड़े फेरबदल की चर्चाएं चल रही हैं। एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कई राज्यसभा सांसदों और मंत्रियों को पुनर्नामांकन नहीं मिला, जिनमें पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी है। इसी से अटकलों को हवा मिली है।

वनइंडिया के अनुसार, मुरुगन से पहले इस साल दो और मंत्रियों ने मंत्रिपरिषद छोड़ी थी। जॉर्ज कुरियन ने जून में और रवनीत सिंह बिट्टू ने जुलाई में इस्तीफ़ा दिया था। इन घटनाक्रमों को एक साथ रखकर देखा जा रहा है।

मंत्री इस्तीफ़ा कब किस पद से
जॉर्ज कुरियन जून 2026 केंद्रीय मंत्रिमंडल
रवनीत सिंह बिट्टू जुलाई 2026 केंद्रीय मंत्रिमंडल
एल. मुरुगन 13 अक्टूबर 2026 मंत्रिपरिषद और राज्यसभा, दोनों

(पहली दो पंक्तियां वनइंडिया के अनुसार; मुरुगन की पंक्ति पांच समाचार संस्थानों से पुष्ट।)

चर्चाएं अभी सिर्फ अटकलें हैं। सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मुरुगन ने अपने पत्र में फेरबदल का कोई ज़िक्र नहीं किया। उन्होंने सिर्फ अपना कारण बताया: तमिलनाडु में ज़मीनी काम।

तमिलनाडु में भाजपा की 2029 की तैयारी

तमिलनाडु में भाजपा लंबे समय से अपनी ज़मीन मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। मुरुगन का कहना है कि वे अब राज्य में पार्टी संगठन को मज़बूत करने में पूरा समय देंगे। 2029 के लोकसभा चुनाव को उन्होंने खुद अपनी समय-सीमा बताया है।

तमिलनाडु के समाचार माध्यमों ने इसे प्रमुख खबर के तौर पर दिखाया। पुतिया थलाइमुराई टीवी की ब्रेकिंग रील और न्यूज़18 तमिलनाडु के ग्राफिक पर हज़ारों लाइक और सैकड़ों कमेंट आए।

आगे क्या

सबसे पहला सवाल यही है कि प्रधानमंत्री इस्तीफ़ा स्वीकार करते हैं या नहीं। इस पर अभी कोई जानकारी नहीं है। दूसरा सवाल मुरुगन के विभागों का है। सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य जैसे मंत्रालय किसे मिलेंगे, यह फैसला भी बाकी है।

तीसरा सवाल राज्यसभा की खाली सीट का है। मध्य प्रदेश से मुरुगन की सीट खाली होने पर उसे भरने की प्रक्रिया शुरू होगी। चौथा सवाल फेरबदल का है। क्या यह इस्तीफ़ा किसी बड़े बदलाव की शुरुआत है, या सिर्फ एक नेता का निजी फैसला, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

फिलहाल एक बात तय है। मुरुगन ने अपना इरादा साफ कर दिया है। वे दिल्ली की कुर्सी छोड़कर तमिलनाडु की सियासी ज़मीन पर उतरना चाहते हैं।

Questions people ask

एल. मुरुगन ने इस्तीफ़ा क्यों दिया?
मुरुगन ने खुद अपने इस्तीफ़े का कारण बताया है। उनके अनुसार, वे ज़मीनी स्तर पर लौटकर कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहना चाहते हैं और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मज़बूत करने में अपना पूरा समय देना चाहते हैं। उन्होंने यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र और एक्स पर साझा किए पोस्ट में कही है।
क्या मुरुगन का इस्तीफ़ा स्वीकार हो गया है?
अभी तक इस बारे में कोई खबर नहीं आई है। मुरुगन ने 13 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर मंत्रिपरिषद और राज्यसभा से कार्यमुक्त करने का अनुरोध किया है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उन्होंने तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्ति मांगी है, लेकिन स्वीकृति की सूचना किसी समाचार संस्थान ने अब तक नहीं दी है।
एल. मुरुगन कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर क्या रहा है?
वनइंडिया के अनुसार, मुरुगन का जन्म तमिलनाडु के नमक्कल ज़िले में हुआ और वे अरुंधतियार समुदाय से हैं। उनकी शुरुआत छात्र संगठन एबीवीपी से हुई। 2020 में वे भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष बने और जुलाई 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए। वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे, जिनका कार्यकाल 2030 तक था।
उनकी राज्यसभा सीट का अब क्या होगा?
मुरुगन मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए थे। उनके इस्तीफ़े के बाद यह सीट खाली हो जाएगी। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उनका कार्यकाल 2030 तक चलना था। खाली सीट भरने की प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है; इस पर किसी समाचार संस्थान ने कोई समय-सीमा नहीं दी है।
क्या केंद्र में मंत्रिमंडल फेरबदल होने वाला है?
फेरबदल की सिर्फ अटकलें चल रही हैं, कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि हरदीप सिंह पुरी समेत कई मंत्रियों और सांसदों को पुनर्नामांकन नहीं मिला, जिससे चर्चाएं तेज़ हुईं। वनइंडिया के अनुसार, इस साल जून में जॉर्ज कुरियन और जुलाई में रवनीत सिंह बिट्टू भी मंत्रिमंडल छोड़ चुके हैं।

Sources

  1. Times Now — Union MoS L Murugan Resigns From Union Cabinet, Thanks PM Modi (timesnownews.com)
  2. NDTV — 'Wish To Return To Grassroots': L Murugan Resigns As Union Minister (ndtv.com)
  3. The Indian Express — L Murugan resigns as Minister of State, Rajya Sabha member (indianexpress.com)
  4. Mathrubhumi English — L Murugan resigns from Union Cabinet and Rajya Sabha (english.mathrubhumi.com)
  5. Oneindia — L Murugan Resigns From Rajya Sabha, Seeks PM Modi's Approval To Quit Union Cabinet (oneindia.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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