महंगाई 23 महीने की ऊंचाई पर: 5.54%, प्याज 108% चढ़ा

सितंबर के महीने का बजट इस बार थाली में अटका। नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस ने सोमवार (12 अक्टूबर) को जो आंकड़े जारी किए, उनके मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई सितंबर में 5.54% पर पहुंच गई। यह 23 महीने का उच्चतम स्तर है। अगस्त में यह दर 4.83% थी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में अगस्त की दर 4.82% बताई गई है, लेकिन फर्क मामूली है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार यह लगातार 11वां महीना है, जब खुदरा महंगाई बढ़ी है। उसी रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई RBI के 4% लक्ष्य से लगातार चौथे महीने ऊपर बनी हुई है।
थाली में उबाल: प्याज 108% महंगा
इस बढ़ोतरी की जड़ खाने-पीने की कीमतों में है। सितंबर में फूड इंफ्लेशन बढ़कर 7.74% हो गया, जो अगस्त के 5.97% से काफी ऊपर है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार यह नई श्रृंखला का सबसे ऊंचा स्तर है।
सबसे बड़ा झटका प्याज से लगा। प्याज की सालाना महंगाई दर 108.09% दर्ज हुई, जबकि अगस्त में यह 48.78% थी। यानी एक साल पहले की तुलना में प्याज की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा हो गई। लहसुन 54.62% महंगा हुआ, जो अगस्त के 43.60% से ऊपर है। नींबू की महंगाई 15.15% से बढ़कर 36.41% पहुंच गई। अदरक 62.85% महंगा रहा, हालांकि अगस्त के 73.82% से इसमें कुछ नरमी आई। चीनी भी दो अंक की महंगाई की सूची में शामिल रही।
राहत की खबर सिर्फ कुछ सब्जियों से आई। आलू सालभर पहले से 11.50% सस्ते मिले, जबकि टमाटर 8.62% सस्ता रहा। ddindia की रिपोर्ट के अनुसार भिंडी और नारियल भी सस्ते हुए। बाहर खाना भी महंगा हुआ है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार फूड और पेय पदार्थ परोसने वाली सेवाओं की महंगाई 8.41% से बढ़कर 9.39% हो गई।
गांव में महंगाई का असर ज्यादा
शहरों से ज्यादा बोझ गांवों पर पड़ा। NSO के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में CPI महंगाई 6.08% रही, जबकि शहरी इलाकों में 4.88%। अगस्त में ग्रामीण महंगाई 5.24% और शहरी 4.31% थी। खाने-पीने के मोर्चे पर भी यही तस्वीर है: ग्रामीण फूड इंफ्लेशन 8.06% और शहरी 7.18%।
राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई तमिलनाडु, ओडिशा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में दर्ज हुई, जबकि सबसे कम महंगाई मिजोरम में रही। ये आंकड़े dtnext ने NSO डेटा के हवाले से दिए हैं।
RBI की परीक्षा: लक्ष्य से ऊपर चौथा महीना
सरकार ने RBI को महंगाई 4% पर रखने का जिम्मा दिया है, जिसमें दोनों तरफ 2% की छूट है। यानी 2 से 6% के दायरे में रहना ठीक माना जाता है। फिलहाल दर इसी दायरे में है, लेकिन 4% के लक्ष्य से लगातार चौथे महीने ऊपर रहना RBI के लिए दबाव बढ़ाता है।
पिछले हफ्ते RBI की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया था। करीब चार साल में यह पहली बढ़ोतरी थी। अब फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार कुछ अर्थशास्त्री अगले कुछ महीनों में 75 बेसिस पॉइंट तक की और बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं। अगर ऐसा हुआ, तो होम लोन और कार लोन की EMI पर दबाव बढ़ेगा।
RBI ने खुद वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। दूसरी तिमाही में 4.9%, तीसरी तिमाही में 6.0% और चौथी तिमाही में 5.7% महंगाई का अनुमान है।
महंगाई किस चीज़ में कितनी
| चीज़ | सितंबर 2026 महंगाई | अगस्त 2026 |
|---|---|---|
| प्याज | 108.09% | 48.78% |
| चांदी के आभूषण | 87.80% | 106.81% |
| अदरक | 62.85% | 73.82% |
| लहसुन | 54.62% | 43.60% |
| नींबू | 36.41% | 15.15% |
| फूड इंफ्लेशन (कुल) | 7.74% | 5.97% |
| रेस्तरां और होटल | 9.36% | उपलब्ध नहीं |
| पर्सनल केयर व अन्य | 13.75% | उपलब्ध नहीं |
| ट्रांसपोर्ट | 5.01% | उपलब्ध नहीं |
| ईंधन | 7.59% | 7.57% |
| कोर महंगाई | 4.3% | 4.2% |
| मोबाइल फोन | 5.82% | 3.49% |
| कंप्यूटर/लैपटॉप | 6.47% | 4.48% |
| आलू | -11.50% | -13.15% |
| टमाटर | -8.62% | -31.09% |
तालिका में "उपलब्ध नहीं" उन श्रेणियों के लिए लिखा है, जिनके अगस्त के आंकड़े इन रिपोर्टों में नहीं दिए गए।
खाने के अलावा भी दबाव बढ़ रहा है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार कोर महंगाई, जिसमें खाना और ईंधन शामिल नहीं होते, बढ़कर 4.3% हो गई। यह नई श्रृंखला का सबसे ऊंचा स्तर है। CareEdge रेटिंग्स के CPI डिफ्यूजन इंडेक्स के मुताबिक महंगाई अब ज्यादा व्यापक हो रही है: अगस्त में 72 से बढ़कर सितंबर में यह 82 पर पहुंच गया।
मोबाइल फोन 5.82% महंगे हुए, जबकि कंप्यूटर और लैपटॉप की महंगाई 6.47% रही। पेन ड्राइव और एक्सटर्नल हार्ड डिस्क 19.26% महंगे हुए। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मांग से मेमोरी और चिप की वैश्विक कीमतों में उछाल है। ईंधन की महंगाई 7.59% पर स्थिर रही, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियों ने मई से खुदरा ईंधन की कीमतें स्थिर रखी हैं, जबकि Jio-bp और नायरा एनर्जी ने इस महीने पंप की कीमतें बढ़ा दी हैं।
अर्थशास्त्री क्या कह रहे हैं
कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज के अनुसार प्रतिकूल आधार प्रभाव और खाने-पीने की कीमतों के झटकों के चलते अगले कुछ महीनों में महंगाई 6% से ऊपर बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि RBI के संशोधित महंगाई अनुमान यथार्थवादी हैं।
कैपिटल इकोनॉमिक्स के शीलन शाह का अनुमान है कि खुदरा महंगाई अक्टूबर में ही 6% से ऊपर जा सकती है। उनके अनुसार प्रतिकूल आधार और एल नीनो के कारण कमजोर मानसूनी बारिश आने वाले महीनों में फूड इंफ्लेशन को और बढ़ाएगी।
नवंबर तक हेडलाइन महंगाई 6% के अहम स्तर से ऊपर जाएगी। यह अनुमान इंडसइंड बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री गौरव कपूर का है, जिन्होंने यह भी कहा कि यह दर कम से कम 3-4 महीने इसी स्तर पर रह सकती है।
कमजोर बारिश से कृषि उत्पादन पर असर पड़ेगा, और इसीलिए फूड इंफ्लेशन आने वाले महीनों में मजबूत बना रह सकता है। CRISIL की मुख्य अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें वित्त वर्ष 2027 में औसतन 88 से 93 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले से 25 से 32% ज्यादा है। इससे खुदरा ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी।
इंडिया रेटिंग्स के देवेंद्र पंत के अनुसार फूड इंफ्लेशन में 21 महीने की सबसे तेज सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई। उन्होंने तीन कारण गिनाए: मौसमी बढ़त, प्रतिकूल आधार प्रभाव (सितंबर 2025 में फूड इंफ्लेशन -2.33% था) और एल नीनो।
एमके ग्लोबल की माधव अरोड़ा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही में महंगाई औसतन 6.1% के करीब रहेगी।
आगे क्या
आगे का रास्ता सीधा नहीं है। एक तरफ खाने-पीने की कीमतें मौसम पर टिकी हैं, दूसरी तरफ कच्चे तेल और रुपये की कमजोरी का दबाव है। RBI पहले ही दरें बढ़ा चुका है और अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 6% महंगाई का अनुमान लगा चुका है।
निगाहें अब दो जगह होंगी। पहला, क्या RBI अगले मौद्रिक नीति फैसले में फिर रेट बढ़ाता है। दूसरा, NSO के कार्यक्रम के अनुसार 12 नवंबर को अक्टूबर के CPI आंकड़े जारी होंगे (IANS के हवाले से)। अगर महंगाई 6% के ऊपर गई, तो आम आदमी के बजट और RBI दोनों की मुश्किल बढ़ सकती है।
Questions people ask
- क्या 5.54% की महंगाई चिंता की बात है?
- सरकार ने RBI को 4% महंगाई का लक्ष्य दिया है, जिसमें 2 से 6% की छूट सीमा है। 5.54% इस दायरे के अंदर है, लेकिन लगातार चौथे महीने 4% लक्ष्य से ऊपर रहना चिंता बढ़ाता है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में यह दर 6% को पार कर सकती है।
- सितंबर में प्याज इतना महंगा क्यों हुआ?
- NSO डेटा में प्याज की सालाना महंगाई 108.09% दर्ज हुई, जबकि अगस्त में यह 48.78% थी। इंडिया रेटिंग्स के देवेंद्र पंत के अनुसार इसके तीन कारण हैं: मौसमी बढ़ोतरी, प्रतिकूल आधार प्रभाव और एल नीनो। सितंबर 2025 में फूड इंफ्लेशन -2.33% था, इसलिए इस साल तुलना में बढ़ोतरी तेज दिख रही है।
- क्या कर्ज़ और महंगा होगा?
- RBI ने पिछले हफ्ते रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया, जो करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी थी। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार कुछ अर्थशास्त्री अगले कुछ महीनों में 75 बेसिस पॉइंट तक की और बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं। ऐसा हुआ तो होम लोन और कार लोन की EMI बढ़ सकती है।
- महंगाई कब तक घट सकती है?
- RBI ने वित्त वर्ष 2027 में महंगाई का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। तीसरी तिमाही में 6.0% और चौथी तिमाही में 5.7% का अनुमान है। CRISIL की दीप्ति देशपांडे के अनुसार कमजोर बारिश से फूड इंफ्लेशन आने वाले महीनों में ऊंचा बना रह सकता है। अक्टूबर के आंकड़े 12 नवंबर को आएंगे।
Sources
- Financial Express: Food prices push retail inflation to near 2-year high of 5.54% in Sept (financialexpress.com)
- DT Next: Retail inflation rises to 5.54 pc in Sept on high onion prices (dtnext.in)
- IANS: India's retail inflation stands at 5.54 pc in September (ianslive.in)
- DD India: Retail inflation rises to 5.54% in September (ddindia.co.in)
- Financial Express: India's retail inflation rises to 5.54% in September, food inflation jumps to 7.74% (financialexpress.com)
Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.
This story is informational only and is not financial advice. Decisions about money belong with a registered adviser — the sources above are a good place to start reading.
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