किडनैप हुआ मैं: ध्रुव राठी का पुलिस पर सनसनीखेज आरोप

शनिवार सुबह 7 बजे का दावा
शनिवार, 10 अक्टूबर। गुरुग्राम के सेक्टर 56 में ध्रुव राठी अपने घर में सो रहे थे। सुबह करीब 7 बजे उनकी नींद खुली तो देखा कि कमरे में कई लोग खड़े हैं। कोई वर्दी नहीं, कोई नेमप्लेट नहीं, कोई कागज नहीं।
राठी के मुताबिक करीब 20 लोग सादे कपड़ों में घर के अंदर आ चुके थे। उनकी मां ने दरवाजा खोला था। लोगों ने उन्हें धक्का दिया, मां चीखीं। इससे पहले कि राठी कुछ समझ पाते, वे लोग उन्हें बेडरूम से घसीटते हुए सीढ़ियों से नीचे ले गए।
"वहां कोई पुलिस की वर्दी नहीं थी, कोई वारंट नहीं था, कुछ भी नहीं था," राठी ने रविवार को रिहाई के बाद जारी वीडियो में कहा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें उठाते समय उनके फोन के साथ-साथ माता-पिता के फोन भी छीन लिए गए, और वकील से संपर्क करने की इजाजत नहीं मिली।
हिरासत या किडनैप?
यहीं से शब्दों की लड़ाई शुरू होती है। दिल्ली पुलिस इसे हिरासत बताती है। राठी कहते हैं, यह किडनैप था।
उनका तर्क सीधा है। प्रदर्शन स्थल पर होते तो पुलिस की हिरासत एक बात होती। गिरफ्तार होते तो वर्दी, नेमप्लेट, धारा और कागज दिखता। लेकिन घर से सोते हुए उठाना और एक थाने से दूसरे थाने ले जाना। इसे वे गिरफ्तारी या हिरासत नहीं मानते।
गुरुग्राम पुलिस के अधिकारियों ने आउटलुक से कहा कि उन्हें प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया गया था और बाद में परिवार को सौंप दिया गया। लेकिन राठी ने एक और दावा ठोका। उनके मुताबिक पुलिस वाले बार-बार कहते रहे कि वह न तो हिरासत में हैं, न ही गिरफ्तार।
यहां एक पेंच है। द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक राठी ने कहा कि वह करीब 20 से 23 घंटे थाने में रहे। अगर उन्हें सुबह 7 बजे उठाया गया तो रिहाई देर रात या रविवार सुबह के शुरुआती घंटों में हुई। एनडीटीवी को एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि राठी को शनिवार देर रात छोड़ दिया गया था। समय को लेकर यह फर्क अभी बना हुआ है।
समय और संख्या पर बिखरे बयान
फर्क सिर्फ रिहाई के समय पर नहीं है। राठी कह रहे हैं, शनिवार सुबह 7 बजे, करीब 20 लोग। वहीं सीजेपी ने अपने एक्स पोस्ट में दावा किया कि 50 सादी वर्दी वाले पुलिसकर्मी सुबह 8 बजे उनके घर पहुंचे। गल्फ न्यूज़ ने लिखा कि इन अलग-अलग बयानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की संख्या पर भी बयान बिखरे हुए हैं। एनडीटीवी की खबर कहती है कि शनिवार को 3,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और देर रात छोड़ा गया। आउटलुक की रिपोर्ट में 7,000 से ज्यादा हिरासत का जिक्र है। गल्फ न्यूज़ ने दर्ज किया कि खुद राठी ने 7,000 से ज्यादा हिरासत का दावा किया, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।
राठी बनाम पुलिस: कौन क्या कहता है
| बात | राठी का दावा | पुलिस और सूत्रों का कहना |
|---|---|---|
| घर पहुंचना | सुबह करीब 7 बजे, लगभग 20 सादे लोग | पुष्टि नहीं |
| कागज | न वर्दी, न वारंट, न नेमप्लेट | हिरासत में लिया, परिवार को सौंपा (गुरुग्राम पुलिस, आउटलुक) |
| हिरासत की अवधि | 20 से 23 घंटे | शनिवार देर रात रिहा (पुलिस अधिकारी, एनडीटीवी) |
| प्रदर्शनकारियों की संख्या | 7,000 से ज्यादा (असत्यापित) | 3,000 से ज्यादा (एनडीटीवी) |
पासपोर्ट उठाकर जवाब
इस मामले में एक और पेंच नागरिकता वाला था। कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि राठी की नागरिकता को लेकर सवाल थे और इसी वजह से उन्हें हिरासत में लिया गया।
राठी ने वीडियो में अपना भारतीय पासपोर्ट कैमरे के सामने लहराया। "मैं भारतीय नागरिक हूं, और मेरे वही अधिकार हैं जो एक आम नागरिक को हैं," उन्होंने कहा। उन्होंने उस मीडिया को "गोदी मीडिया" कहकर खारिज किया जिसने उनकी नागरिकता को कारण बताया था।
पुलिस का पक्ष: चेतावनी भी शामिल
पुलिस ने राठी को छोड़ तो दिया, लेकिन चेतावनी भी दी। समाचार एजेंसी पीटीआई से एक अधिकारी ने कहा: "अगर वह प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद जंतर-मंतर जाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें दोबारा हिरासत में लिया जा सकता है या आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है।"
इसका मतलब साफ है। शनिवार के बाद कहानी खत्म नहीं हुई। अगर राठी दोबारा प्रदर्शन की ओर बढ़े तो कार्रवाई हो सकती है।
सीधा हमला: "तनाशाही" का आरोप
राठी ने अपने वीडियो में राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "कोई लोकतांत्रिक देश ऐसा नहीं करता।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारत को तनाशाही में बदला जा रहा है और हालात "अघोषित आपातकाल" जैसे हैं। उन्होंने आपातकाल के दौरान हुई सामूहिक हिरासत और उत्तर कोरिया से भी तुलना की।
वीडियो के आखिरी हिस्से में राठी ने मोदी को सीधे संबोधित किया। उन्होंने एडोल्फ हिटलर और बेनिटो मुसोलिनी का जिक्र करते हुए कहा: "तनाशाही में तनाशाह का अंत भी अच्छा नहीं होता है।" उन्होंने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी आभार जताया, जिन्होंने उनका और सीजेपी नेताओं का समर्थन किया था।
यह सारे आरोप राठी के अपने बयान हैं। पुलिस ने इन पर अभी तक सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आंदोलन की बड़ी तस्वीर
राठी की कहानी शनिवार के बड़े आंदोलन से जुड़ी है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। मांग एक ही थी: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बीच।
शनिवार को दिल्ली पुलिस ने राजधानी को छावनी में तब्दील कर दिया था। अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को एहतियाती हिरासत में लिया गया। रविवार सुबह एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद तीनों को छोड़ दिया गया। सीजेपी के विधि प्रकोष्ठ के प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक रिहाई की शर्त यह है कि तीनों एक साल तक शांति बनाए रखें।
दिल्ली पुलिस ने शनिवार के प्रदर्शन को लेकर 20 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं। रविवार को सुप्रीम कोर्ट की विशेष बैठक में शनिवार को मेट्रो स्टेशनों के बंद होने और हिरासत के मामलों पर सुनवाई भी हुई।
वीडियो वायरल क्यों हो रहा
राठी के वीडियो को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। ब्रूट इंडिया की फेसबुक रील पर 25,000 से ज्यादा लाइक और 3,900 से ज्यादा कमेंट आ चुके हैं। न्यूज़24 के इंस्टाग्राम रील पर 18,000 लाइक और अनफिल्टर्ड भारत के पोस्ट पर 2,600 लाइक हैं।
यह राठी के फॉलोअर्स की संख्या और जंतर-मंतर आंदोलन के बड़े संदर्भ की वजह से हो रहा है।
अब आगे क्या
सोमवार को इंडिया गठबंधन के नेता मुख्य न्यायाधीश से मिलने वाले हैं, ऐसा कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है। सीजेपी ने मुंबई के शिवाजी पार्क और लखनऊ में नए प्रदर्शन की घोषणा की है। राठी ने कहा है कि उन्हें "अनौपचारिक नजरबंदी" में रखा गया है और 10 से 15 लोग हर जगह उनका पीछा कर रहे हैं।
यह बयान सिर्फ उनके अपने हैं, और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। लेकिन एक बात तय है: दिल्ली पुलिस की चेतावनी और राठी के आरोप, दोनों के बीच यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।
📷 फोटो: NewsClickin, Wikimedia Commons (CC BY 3.0)
Questions people ask
- ध्रुव राठी को पुलिस ने क्यों हिरासत में लिया?
- शनिवार, 10 अक्टूबर को सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम के उनके घर से उन्हें हिरासत में लिया। पुलिस ने पीटीआई से कहा कि प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद जंतर-मंतर जाने पर दोबारा हिरासत या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। राठी ने इसे हिरासत मानने से इनकार करते हुए "किडनैप" बताया।
- राठी खुद क्या कहते हैं?
- राठी के मुताबिक सुबह करीब 7 बजे 20 सादे लोग उनके बेडरूम में घुसे, उन्हें घसीटकर ले गए, फोन छीन लिए और वकील से मिलने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि थाने में 20 से 23 घंटे रखा गया, जहां अधिकारियों ने कहा कि वह न हिरासत में हैं, न गिरफ्तार। उन्होंने चोट लगने का भी दावा किया।
- नागरिकता विवाद क्या है?
- कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि राठी की नागरिकता पर सवाल थे। राठी ने वीडियो में अपना भारतीय पासपोर्ट दिखाते हुए कहा कि वह भारतीय नागरिक हैं और उन्हें आम नागरिक के बराबर अधिकार हैं। उन्होंने इन दावों को "गोदी मीडिया" का प्रचार कहकर खारिज किया।
- सीजेपी के बाकी नेता कहां हैं?
- अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को शनिवार को एहतियाती हिरासत में लिया गया था। रविवार सुबह कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद तीनों को इस शर्त पर छोड़ा गया कि वे एक साल तक शांति बनाए रखें। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन पर 20 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं।
Sources
- NDTV — "I Was Kidnapped": YouTuber Dhruv Rathee After Being Released From Detention (ndtv.com)
- The Indian Express — 'I was not arrested, I was kidnapped': YouTuber Dhruv Rathee recounts 24-hour ordeal after police raid (indianexpress.com)
- Outlook India — 'Not Detained, I was Kidnapped': Dhruv Rathee Shows Indian Passport, Criticises Govt After Release (outlookindia.com)
- Gulf News — Dhruv Rathee Alleges Kidnapping and Assault During 23-Hour Police Custody in Delhi (gulfnews.com)
- News9Live — Breaking News LIVE Updates, October 11, 2026 (FIRs, fresh protest announcements, CJI meeting plan) (news9live.com)
Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.
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