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खेलो इंडिया: खेल सामान बनाने को ₹1,856.67 करोड़ की मंजूरी

By Gagariya Editorial Desk•29 Oct 2026 IST•3 min read•Human Reviewed & Fact-Checked

₹1,856.67 करोड़। इतनी रकम से अब भारत सिर्फ खिलाड़ी तैयार नहीं करेगा, बल्कि वह सामान भी बनाएगा जिससे खिलाड़ी खेलते हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने 28 अक्टूबर 2026 को खेलो इंडिया खेल सामान निर्माण योजना को मंजूरी दे दी है, और यह फैसला 2026 से 2033-34 तक लागू रहेगा।

क्या मंजूर हुआ

यह योजना केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित हुई थी, और अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह ज़मीन पर उतरने की ओर बढ़ी है। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, इसका मकसद निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और निर्यात को बढ़ाना है, ताकि भारत खेल सामान के वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह मज़बूत कर सके। सरकार ने इसे खेलो भारत नीति 2025, Make in India और आत्मनिर्भर भारत से जोड़ा है।

खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि यह योजना युवाओं को रोज़गार के नए अवसरों से सशक्त करेगी और निवेश को बढ़ावा देगी। उन्होंने इसे "India Plays, India Manufactures" के रूप में पेश किया है।

पैसा कहाँ जाएगा

योजना की रकम का बंटवारा ही इसकी रणनीति बता देता है।

हिस्सा रकम
एंकर निवेश सहायता और टर्नओवर आधारित सहायता (मिलाकर) ₹1,130 करोड़
अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से सर्टिफिकेशन लेना और नवीनीकरण ₹105 करोड़
क्लस्टर अपग्रेड, रिसर्च, स्किलिंग, स्टार्ट-अप और ब्रांडिंग (हिसाब से बची रकम) लगभग ₹621.67 करोड़

सबसे बड़ा हिस्सा, करीब 61%, उन निर्माताओं और एंकर निवेशकों की ओर जाएगा जो तय ज़ोन में फैक्ट्री लगाएँगे और उत्पादन बढ़ाएँगे। एंकर निवेश सहायता के तहत बड़े घरेलू और वैश्विक निर्माताओं, ब्रांडों और रिटेल चेन को Sports Goods Manufacturing Zones (SGMZs) में इकाई लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। टर्नओवर आधारित सहायता ज़्यादा उत्पादन और क्षमता विस्तार पर इनाम देगी।

दूसरी ओर, ₹105 करोड़ सर्टिफिकेशन के लिए रखे गए हैं। निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से सर्टिफिकेट लेने और उसे नवीनीकृत करने में मदद मिलेगी, ताकि भारतीय सामान अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भरोसे के साथ बिक सके।

मेरठ और जालंधर क्यों अहम हैं

भारत के खेल सामान का नक्शा दो शहरों के बिना अधूरा है: उत्तर प्रदेश का मेरठ और पंजाब का जालंधर। ये दोनों क्लस्टर क्रिकेट सामान और फुटबॉल जैसे सामान के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं, और इनमें ज़्यादातर छोटी और मझोली इकाइयाँ (MSMEs) काम करती हैं।

योजना में इन्हीं पुराने क्लस्टरों के अपग्रेड की बात है, जिसमें साझा सुविधाएँ और साझा बुनियादी ढाँचा बनेगा। साथ ही, नए ज़ोन में निर्माता, सप्लायर, टेस्टिंग सुविधा, डिज़ाइन और प्रोटोटाइप केंद्र और सहायक इकाइयाँ एक ही जगह होंगी। ये ज़ोन BHAVYA योजना और NICDC इंडस्ट्रियल पार्कों के मौजूदा ढाँचे से जुड़कर बनेंगे।

रिसर्च के लिए प्रमुख शिक्षण और शोध संस्थानों में Centres of Excellence बनेंगे, जहाँ खेल उपकरण, मटीरियल साइंस, सुरक्षा गियर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर काम होगा। अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (Anusandhan National Research Foundation) से भी जोड़ा जाएगा। Startup India के तहत स्टार्ट-अप को नई तकनीक विकसित करने, टेस्ट करने और बाज़ार तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।

किसे क्या करना है

अगर आप इस क्षेत्र से जुड़े हैं, तो अभी इंतज़ार का चरण है, लेकिन तैयारी अभी से हो सकती है।

  • MSME निर्माता: अपने क्लस्टर की साझा सुविधाओं और सर्टिफिकेशन सहायता पर नज़र रखें। सर्टिफिकेशन के लिए ₹105 करोड़ का प्रावधान है, लेकिन आवेदन की प्रक्रिया अभी घोषित नहीं हुई है।
  • बड़े निर्माता और ब्रांड: SGMZ में एंकर निवेश की शर्तें और ज़ोन की सूची आने पर ही फैसला होगा। निवेश की न्यूनतम सीमा अभी तय स्रोतों से पुष्ट नहीं हुई है, इसलिए किसी आँकड़े पर भरोसा न करें।
  • युवा और कारीगर: स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम कौशल विकास मंत्रालय के साथ चलेंगे। स्थानीय आईटीआई और उद्योग संगठनों से जुड़े रहना फायदेमंद होगा।
  • खिलाड़ी और खेल संस्थाएँ: सीधा फायदा बेहतर और सस्ते भारतीय उपकरण के रूप में आएगा, लेकिन यह तभी होगा जब उत्पादन और क्वालिटी दोनों बढ़ें।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 28 अक्टूबर को इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे खेल उपकरण निर्माण, आधुनिक तकनीक और रोज़गार को बढ़ावा मिलेगा और खिलाड़ियों को बेहतर खेल सामग्री मिलेगी।

आगे क्या होगा

अगला कदम सरकार की ओर से आएगा: योजना के लागू करने के दिशा-निर्देश, ज़ोन की सूची और आवेदन प्रक्रिया अभी घोषित नहीं हुई है। इन्हीं दिशा-निर्देशों से तय होगा कि छोटे निर्माताओं तक पैसा कितनी आसानी से पहुँचता है, या बड़ी कंपनियों को ही ज़्यादा फायदा होता है। 2033-34 तक चलने वाली इस योजना की असली परीक्षा पहले एक-दो साल में होगी, जब यह साफ होगा कि मेरठ और जालंधर जैसे क्लस्टर सिर्फ वॉल्यूम के लिए जाने जाएँगे या हाई-परफॉर्मेंस उपकरण के लिए भी।

📷 Illustration: AI-generated

Questions people ask

खेलो इंडिया खेल सामान निर्माण योजना क्या है?
यह केंद्रीय कैबिनेट से 28 अक्टूबर 2026 को मंजूर योजना है, जिसमें 2026 से 2033-34 तक ₹1,856.67 करोड़ खर्च होंगे ताकि भारत में खेल सामान का निर्माण, सर्टिफिकेशन, रिसर्च और निर्यात बढ़े।
इस योजना से किसे फायदा होगा?
बड़े निर्माताओं और एंकर निवेशकों को ज़ोन में इकाई लगाने के लिए सहायता मिलेगी, MSME क्लस्टरों को अपग्रेड और साझा सुविधाएँ मिलेंगी, और निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन के लिए ₹105 करोड़ की मदद मिलेगी।
क्या मेरठ और जालंधर को इस योजना से फायदा होगा?
ये दोनों भारत के सबसे बड़े खेल सामान क्लस्टर हैं और योजना में पुराने क्लस्टरों के अपग्रेड की बात है, लेकिन ज़ोन की अंतिम सूची अभी घोषित नहीं हुई है।
इस योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
आवेदन प्रक्रिया अभी घोषित नहीं हुई है। दिशा-निर्देश आने के बाद ही यह साफ होगा कि निर्माता, MSME और स्टार्ट-अप कैसे आवेदन कर सकेंगे।
यह योजना पहले की खेलो इंडिया योजना से कैसे अलग है?
खेलो इंडिया 2017 में ज़मीनी स्तर के खेल और बुनियादी ढाँचे के लिए शुरू हुई थी। नई योजना उसी ब्रांड को फैक्ट्रियों और सप्लाई चेन तक ले जाती है।

Sources

  1. IANS: Cabinet approves Khelo India Sports Goods Manufacturing Scheme (ianslive.in)
  2. BusinessLine: Khelo India scheme gets ₹1,856.67 crore (thehindubusinessline.com)
  3. Nation Press: Cabinet clears ₹1,857 cr sports goods scheme (nationpress.com)
  4. Nation Press: CM Mohan Yadav hails scheme (nationpress.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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