gagariya.

जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं, तीन नई जगहें तय

By Gagariya Editorial Desk•13 Oct 2026 IST•6 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं, तीन नई जगहें तय
Photo: Own or licensed by the publisher

आदेश के बाद सोमवार को क्या हुआ

आदेश जारी होने के बाद सोमवार का दिन हलचल भरा रहा। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता आशुतोष रंका और सौरव दास संसद मार्ग थाने पहुंचे और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की नई तारीख मांगी।

इसी बीच जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। ईटीवी भारत के अनुसार, पुलिस ने पहुंच वाली सड़कों पर बैरिकेड लगाए और प्रमुख चौराहों पर जवान तैनात किए, ताकि बिना अनुमति कोई जमावड़ा न हो सके।

अदालत में भी मामला पहुंच गया है। दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार को इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के समक्ष मंगलवार, यानी आज, सुनवाई होनी है। अदालत ने यह भी नोट किया कि सुप्रीम कोर्ट पहले से इस मुद्दे की जांच कर रहा है और केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।

आदेश में क्या कहा गया

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को स्थायी आदेश जारी कर जंतर-मंतर को प्रदर्शनों के लिए नामित स्थल की सूची से हटा दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, नए आदेश की संख्या 48/2026 है और यह 28 अप्रैल 2022 के पुराने स्थायी आदेश में आंशिक संशोधन करता है।

आदेश में कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन और धरनों के लिए वैकल्पिक जगहों की जांच के लिए एक समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को सूची से हटाया गया और तीन नई जगहें तय की गईं।

नए तीनों स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अलग से जारी की जाएगी। पुलिस ने यह नहीं बताया है कि एसओपी कब तक आएगी।

तीन नई जगहें कौन सी हैं

तीनों नई जगहें जंतर-मंतर से अलग-अलग दूरी पर हैं। रामलीला मैदान मध्य दिल्ली में है और जंतर-मंतर से करीब 4 किलोमीटर दूर है। सीबीडी ग्राउंड पूर्वी दिल्ली के शाहदरा में है, जिसकी दूरी 12 से 13 किलोमीटर बताई गई है। बुराड़ी ग्राउंड उत्तरी दिल्ली में है और जंतर-मंतर से करीब 21 किलोमीटर दूर पड़ता है।

स्थल कहां जंतर-मंतर से दूरी खास बात
रामलीला मैदान मध्य दिल्ली करीब 4 किमी दशकों से राजनीतिक रैलियों का गवाह; ईटीवी भारत के अनुसार 12 एकड़ से बड़ा परिसर
बुराड़ी ग्राउंड उत्तरी दिल्ली करीब 21 किमी तीनों में सबसे बड़ा; ईटीवी भारत के अनुसार 50 एकड़ में फैला, निरंकारी ग्राउंड के नाम से मशहूर
सीबीडी ग्राउंड शाहदरा, पूर्वी दिल्ली 12-13 किमी ईटीवी भारत के अनुसार 12 एकड़ में फैला, डीडीए के रखरखाव में; विकास मार्ग से सटा हुआ

तीनों स्थलों के आकार और रखरखाव से जुड़ी जानकारी ईटीवी भारत की रिपोर्ट से है।

फैसला क्यों लिया गया

आदेश के पीछे सुरक्षा और व्यवस्था का तर्क दिया गया है। नई दिल्ली जिला बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसी इलाके में संसद है, कई सरकारी दफ्तर हैं और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मंत्रियों के आवास भी हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, हाल के दिनों में प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के बाद नई दिल्ली जिला लगभग बंद जैसी स्थिति में रहा, जिससे दफ्तर जाने वालों और यात्रियों को परेशानी हुई।

पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहा विरोध भी है। सीजेपी और विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आह्वान किए थे। ईटीवी भारत के अनुसार, कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की योजना बनाई थी।

मिलेनियम पोस्ट के अनुसार, 20 जुलाई को सीजेपी के एक जमावड़े से जुड़ी झड़पों ने भी सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया था।

रामलीला मैदान में जगह की दिक्कत

नए स्थलों की घोषणा के साथ ही जगह की उपलब्धता पर सवाल उठ गए हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रामलीला मैदान में अगले ढाई महीने तक कोई खाली तारीख नहीं है। अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ 29, 30 और 31 दिसंबर की तारीखें खाली हैं। इतना ही नहीं, प्रदर्शन और सभाओं के लिए मैदान का जो छोटा हिस्सा उपलब्ध है, उसकी क्षमता सिर्फ 150 लोगों की बताई गई है।

यह जानकारी इकोनॉमिक टाइम्स की अकेली रिपोर्ट से आई है। दिल्ली पुलिस या नागरिक एजेंसी की ओर से इसकी अलग से पुष्टि नहीं हुई है।

किसने क्या कहा

फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तीखी रहीं। मिलेनियम पोस्ट के अनुसार, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर जनता के विरोध से डरने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे चरम घबराहट का संकेत बताया और कहा कि उनके लिए लोकतंत्र अब मायने नहीं रखता, यह सब डेमोकुर्सी का मामला है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मिलेनियम पोस्ट के अनुसार, जंतर-मंतर का दर्जा छीने जाने को भाजपा सरकार की सबसे बड़ी हार करार दिया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ईटीवी भारत के अनुसार चेतावनी दी कि अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा। पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने मिलेनियम पोस्ट के अनुसार इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार पर हमला बताया और कहा कि वे इस एकतरफा फैसले को स्वीकार नहीं करते।

दूसरी तरफ, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने फैसले का स्वागत किया है। ईटीवी भारत के अनुसार, एसोसिएशन के संयुक्त सचिव अमित गुप्ता ने कहा कि इससे व्यापारिक नुकसान और आम लोगों की परेशानी कम होगी। हाल के प्रदर्शनों से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक पहुंच बाधित हुई थी और मेट्रो स्टेशनों को बंद करना पड़ा था।

जंतर-मंतर का लंबा इतिहास

जंतर-मंतर 1993 से दिल्ली का प्रमुख नामित प्रदर्शन स्थल रहा है। इससे पहले इंडिया गेट के पास बोट क्लब के लॉन प्रदर्शन की मुख्य जगह थी। 1988 में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसानों की विशाल रैली के बाद वहां प्रतिबंध लगा और जंतर-मंतर को यह दर्जा मिला।

इससे पहले भी जंतर-मंतर पर रोक की कोशिश हो चुकी है। द ट्रिब्यून के अनुसार, अक्टूबर 2017 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर रोक लगाकर उन्हें रामलीला मैदान शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पूर्ण प्रतिबंध को रद्द कर दिया और नियमन के अधीन शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी।

मिलेनियम पोस्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में यह स्थल कई बड़े आंदोलनों का गवाह रहा। अप्रैल 2011 में अन्ना हजारे ने यहां जन लोकपाल की मांग को लेकर पांच दिन का अनशन किया। दिसंबर 2012 में दिल्ली में युवती से सामूहिक दुष्कर्म के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतरे। 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने 41 दिन तक प्रदर्शन किया और 2023 में पहलवानों ने तत्कालीन कुश्ती महासंघ प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ धरना दिया। 2024 और 2026 में नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी यहीं प्रदर्शन हुए।

अब आगे क्या होगा

सबसे नजदीकी घटनाक्रम आज का है। हाई कोर्ट की सुनवाई का नतीजा अभी आना बाकी है। अदालत यह तय करेगी कि पुलिस का आदेश कायम रहेगा या नहीं। साथ ही नई जगहों के लिए विस्तृत एसओपी का इंतजार है, जिससे यह साफ होगा कि तीनों स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति कैसे मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट पहले से इस मुद्दे की जांच कर रहा है और केंद्र से हलफनामा मांगा गया है। सोमवार को सीजेपी नेताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की नई तारीख मांगी थी। अब नजरें अदालत और पुलिस, दोनों पर हैं।

📷 फोटो: Alnitak-Alnilam-Mintaka, Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

Questions people ask

क्या जंतर-मंतर पर अब कोई प्रदर्शन नहीं हो सकता?
नहीं, जंतर-मंतर को सिर्फ नामित स्थल की सूची से हटाया गया है। अब वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलेगी, लेकिन रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नई जगहों के तौर पर नामित किया गया है। इन तीनों स्थलों पर प्रदर्शन की विस्तृत प्रक्रिया एसओपी के जरिए बाद में तय होगी।
प्रदर्शन के लिए अब कौन सी जगहें तय की गई हैं?
तीन जगहें तय की गई हैं। रामलीला मैदान मध्य दिल्ली में है और जंतर-मंतर से करीब 4 किलोमीटर दूर है। बुराड़ी ग्राउंड उत्तरी दिल्ली में करीब 21 किलोमीटर दूर है। सीबीडी ग्राउंड पूर्वी दिल्ली के शाहदरा में है, जिसकी दूरी 12 से 13 किलोमीटर बताई गई है। तीनों की विस्तृत एसओपी अलग से जारी होगी।
रामलीला मैदान में तुरंत प्रदर्शन की अनुमति मिलेगी?
तुरंत अनुमति मिलना मुश्किल लग रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रामलीला मैदान में अगले ढाई महीने तक कोई खाली तारीख नहीं है। सिर्फ 29, 30 और 31 दिसंबर की तारीखें खाली बताई गई हैं। प्रदर्शन के लिए उपलब्ध छोटे हिस्से की क्षमता भी सिर्फ 150 लोगों की है। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या पहले भी जंतर-मंतर पर रोक लगी थी?
हां, पहले भी ऐसी कोशिश हो चुकी है। द ट्रिब्यून के अनुसार, अक्टूबर 2017 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर रोक लगाकर उन्हें रामलीला मैदान शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। लेकिन जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पूर्ण प्रतिबंध को रद्द कर दिया और नियमन के अधीन शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दे दी थी।
हाई कोर्ट में इस फैसले को लेकर क्या हो रहा है?
हां, दिल्ली हाई कोर्ट में आज सुनवाई होनी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ सोमवार को याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हुई थी। अदालत ने नोट किया कि सुप्रीम कोर्ट पहले से इस मुद्दे की जांच कर रहा है। सुनवाई का नतीजा अभी आना बाकी है।

Sources

  1. Economic Times — Jantar Mantar locked out as protest site (economictimes.indiatimes.com)
  2. ETV Bharat — Jantar Mantar no longer Delhi's designated protest site (etvbharat.com)
  3. The Tribune — Jantar Mantar de-notified as protest venue (tribuneindia.com)
  4. Times of India — Jantar Mantar no longer a designated protest site (timesofindia.indiatimes.com)
  5. Millennium Post — Jantar Mantar's decades-old role as dissent hub curtailed (millenniumpost.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

Keep reading

The day’s verified stories, one email, 7 am IST. No noise.