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J&K मेडिकल इंटर्न की हड़ताल: ₹25,000 स्टाइपेंड का लिखित आदेश नहीं, तो काम बंद जारी

By Gagariya Editorial Desk•21 Oct 2026 IST•4 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
J&K मेडिकल इंटर्न की हड़ताल: ₹25,000 स्टाइपेंड का लिखित आदेश नहीं, तो काम बंद जारी
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लिखित आदेश नहीं, तो हड़ताल नहीं

द कश्मीर होराइजन के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत मेडिकल इंटर्न अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनकी मांग अब पैसे से ज्यादा भरोसे की है — बढ़ोतरी की सिर्फ घोषणा नहीं, सरकार का लिखित आदेश चाहिए।

ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने कहा, "No written order, no end to the strike." उनके अनुसार, सरकार ने पहले भी कई बार आश्वासन दिए, लेकिन वे किसी औपचारिक निर्णय में बदले नहीं। इसलिए इस बार जुबानी वादा या सार्वजनिक घोषणा हड़ताल खत्म कराने के लिए काफी नहीं मानी जाएगी।

आधिकारिक सूत्रों के हवाले से खबर है कि MBBS और BDS इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹25,000 करने का आदेश बुधवार (21 अक्टूबर) को जारी हो सकता है। प्रस्तावित अधिसूचना ही तय करेगी कि हड़ताल थमेगी या आगे बढ़ेगी।

30 दिन की डेडलाइन कैसे टूटी

इंटर्न का कहना है कि सरकार ने लिखित में 30 दिन की समय-सीमा दी थी, जिसमें स्टाइपेंड संशोधन सुलझाने का वादा था। इंटर्न ने 4 और 9 सितंबर की सरकारी रिकॉर्ड टिप्पणियों का हवाला दिया है, जिनमें अधिकारी 30 दिनों के भीतर मामला सुलझाने पर राजी हुए थे।

डेडलाइन बीत गई, आदेश नहीं आया। नतीजा — हड़ताल तेज हुई और इंटर्न अनिश्चितकालीन धरने पर चले गए। उनका कहना है कि अब मुद्दा नई चर्चा का नहीं, सरकार द्वारा पहले किए गए वादे को निभाने का है।

पृष्ठभूमि लंबी है। हेल्थ एंड फैमिली की रिपोर्ट के अनुसार, हड़ताल 31 अगस्त 2026 को शुरू हुई थी। इंटर्न अभी ₹12,300 प्रति माह पा रहे हैं — यह रकम करीब सात साल से नहीं बदली। 2023 में ही स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्टाइपेंड समीक्षा के लिए समिति बनाई थी, जिसने ₹25,000 प्रति माह की सिफारिश की। फरवरी 2026 में विधानसभा में यह सिफारिश सरकार ने स्वीकार भी की, लेकिन फाइल वित्त विभाग और प्रशासनिक चक्रव्यूह में अटकी रही।

इंटर्न अब अपनी मांग ₹30,000 प्रति माह तक ले गए हैं, ताकि केंद्रीय संस्थानों के स्तर से बराबरी हो सके।

₹12,300 बनाम ₹25,000 बनाम ₹30,000

मुद्दा स्थिति
मौजूदा स्टाइपेंड ₹12,300 प्रति माह (करीब 7 साल से स्थिर)
सरकार का प्रस्तावित आदेश ₹25,000 प्रति माह (बुधवार को अधिसूचित हो सकता है)
इंटर्न की मांग (PTI के अनुसार) ₹30,000 प्रति माह (केंद्रीय संस्थानों से बराबरी)
अन्य राज्यों में स्टाइपेंड तेलंगाना ~₹25,900; अरुणाचल प्रदेश व उत्तर प्रदेश ~₹25,000; हरियाणा ~₹24,310 (इंटर्न के हवाले से)

इंटर्न का कहना है कि ₹12,300 रोज़ाना करीब ₹400 बैठता है — दिहाड़ी मजदूर से भी कम, जबकि वे इमरजेंसी, ओपीडी, वार्ड और नाइट ड्यूटी संभालते हैं।

एक मतभेद: ₹25,000 या ₹30,000

PTI के हवाले से जम्मू न्यूज़ पोर्टल की रिपोर्ट में इंटर्न की मांग ₹30,000 बताई गई है, जबकि आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सरकार ₹25,000 के आदेश की तैयारी कर रही है। यानी आदेश आ भी जाए, तो रकम पर मतभेद बचा रहेगा। फिलहाल इंटर्न का रुख साफ है — आदेश लिखित में चाहिए, वही तय करेगा कि धरना थमेगा या नहीं।

आगे क्या देखें

  • बुधवार (21 अक्टूबर) को सरकार लिखित आदेश जारी करती है या नहीं — यही हड़ताल का फैसला करेगा
  • आदेश में रकम ₹25,000 ही रहेगी या ₹30,000 की मांग पर भी बात होगी
  • सरकारी अस्पतालों में नियमित ड्यूटी पर पड़ रहा असर और प्रशासन की प्रतिक्रिया

Questions people ask

जम्मू-कश्मीर के मेडिकल इंटर्न हड़ताल क्यों कर रहे हैं?
वे अपने मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। मौजूदा स्टाइपेंड ₹12,300 प्रति माह है, जो करीब सात साल से नहीं बदला। इंटर्न का कहना है कि बढ़ती महंगाई और काम के बोझ के मुकाबले यह रकम नाकाफी है।
सरकार ने क्या कहा है?
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹25,000 करने का आदेश बुधवार (21 अक्टूबर) को जारी हो सकता है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित बढ़ोतरी की घोषणा का जिक्र भी सामने आया है, लेकिन बिना लिखित आदेश के उसकी स्थिति साफ नहीं है।
इंटर्न घोषणा पर भरोसा क्यों नहीं कर रहे?
AIMSA अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान के अनुसार, सरकार ने पहले भी कई बार आश्वासन दिए, लेकिन वे औपचारिक निर्णय में नहीं बदले। 30 दिन की लिखित डेडलाइन भी बीत गई। इसलिए अब सिर्फ लिखित आदेश पर हड़ताल खत्म होगी।
इंटर्न कितने स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं?
इंटर्न की मांग ₹30,000 प्रति माह की है, ताकि उनका स्टाइपेंड केंद्रीय संस्थानों के स्तर पर आ सके। सरकार का प्रस्तावित आदेश फिलहाल ₹25,000 का है — रकम पर मतभेद बचा हुआ है।
यह विवाद कब से चल रहा है?
हड़ताल 31 अगस्त 2026 को शुरू हुई। इससे पहले 48 घंटे की भूख हड़ताल के बाद 8 सितंबर को अधिकारियों ने 30 दिन में नतीजे का लिखित आश्वासन दिया था। डेडलाइन बीतने के बाद आंदोलन अनिश्चितकालीन हो गया।
क्या अस्पताल सेवाएं प्रभावित हुई हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, इंटर्न ने नियमित ड्यूटी रोक रखी है, हालांकि इमरजेंसी सेवाएं चालू रखने की बात कही गई है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में काम पर असर पड़ रहा है।

Sources

  1. द कश्मीर होराइजन: इंटर्न लिखित आदेश के बिना हड़ताल खत्म नहीं करेंगे (thekashmirhorizon.com)
  2. जम्मू न्यूज़ पोर्टल: MBBS, BDS इंटर्न का प्रदर्शन जारी, लिखित आदेश की मांग (jammunewsportal.com)
  3. PTI/टाइम्स ऑफ इंडिया (न्यूज़पॉइंट): ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल (newspointapp.com)
  4. हेल्थ एंड फैमिली: भूख हड़ताल के बाद सरकार के आश्वासन पर विवाद की पृष्ठभूमि (healthandfamily.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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