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ईरान ने भारत को कहा शुक्रिया, नौसेना ने बचाए 20 नाविक

By Gagariya Editorial Desk•3 Nov 2026 IST•4 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
ईरान ने भारत को कहा शुक्रिया, नौसेना ने बचाए 20 नाविक
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3,000 किलोमीटर दूर, 48 घंटे का ऑपरेशन

मुंबई से 3,000 किलोमीटर से भी ज़्यादा दूर, अरब सागर में भारतीय नौसेना ने सोमवार, 2 नवंबर को ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज़ अज़ीनी के सभी 20 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित छुड़ा लिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अभियान 48 घंटे तक चला और इसमें भारतीय वायुसेना की मदद भी शामिल थी। नौसेना के अनुसार, किसी के हताहत होने या घायल होने की खबर नहीं है। एक दिन बाद, मंगलवार 3 नवंबर को, नई दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास ने भारत सरकार, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना का सार्वजनिक रूप से आभार जताया। दूतावास ने कहा कि यह अभियान भारत की मानवीय सहायता के प्रति प्रतिबद्धता और सीमाओं से परे जान बचाने की भूमिका को दिखाता है।

अज़ीनी के साथ क्या हुआ था

अज़ीनी एक ईरानी मछली पकड़ने वाला जहाज़ (धो) है। 29 अक्टूबर को सोमालिया के पूर्वोत्तर तट के पास, बंदर बायला और हाफ़ुन के बीच, हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने इसे अपने कब्ज़े में ले लिया। यूरोपीय संघ के समुद्री सुरक्षा केंद्र ने चेतावनी दी थी कि इस जहाज़ को 'मदर शिप' बनाया जा सकता है, यानी एक ऐसा तैरता अड्डा जिससे बड़ी दूरी पर व्यापारिक जहाज़ों पर हमले किए जा सकें। नौसेना के अनुसार, जहाज़ के व्यापारिक जहाज़ों के रास्ते की ओर बढ़ने से खतरा और बढ़ गया था। अगर अज़ीनी मदर शिप बन जाता, तो लुटेरों की पहुंच उन इलाकों तक हो जाती जहां उनकी छोटी स्पीडबोट नहीं पहुंच सकतीं।

ऑपरेशन कैसे चला

नौसेना ने मिशन पर तैनात युद्धपोत INS कोलकाता को अज़ीनी को रोकने के लिए भेजा। समुद्री निगरानी विमान ने जहाज़ पर लगातार नज़र रखी और उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया। नौसेना ने कहा कि पहले गैर-गतिज (non-kinetic) उपायों से जहाज़ की गतिविधि को सीमित किया गया, ताकि वह भाग न सके। आखिरी चरण में भारतीय वायुसेना के C-17 विमान से मरीन कमांडो (MARCOS) की सटीक एयरड्रॉप के ज़रिए तैनाती की गई। इसके बाद नौसेना ने तेज़ और समन्वित कार्रवाई में जहाज़ को सुरक्षित किया, लुटेरों के खतरे को खत्म किया और सभी 20 चालक दल के सदस्यों को छुड़ा लिया। रक्षा मंत्री ने इसे सावधानीपूर्वक समन्वित अभियान बताया और कहा कि यह नौसेना की उच्च परिचालन तत्परता को दिखाता है।

क्या बदला: पहले और बाद में

पहले बाद में
अज़ीनी लुटेरों के कब्ज़े में, व्यापारिक रास्ते की ओर बढ़ रहा था जहाज़ नौसेना के नियंत्रण में, सभी 20 चालक दल सुरक्षित
मदर शिप बनने का खतरा, जिससे और हमले हो सकते थे वह खतरा टल गया, हालांकि समुद्री डकैती की बड़ी समस्या बनी हुई है
चालक दल की सुरक्षा की स्थिति अज्ञात थी कोई हताहत या घायल नहीं, यह नौसेना ने पुष्टि की है

समयरेखा

  • 29 अक्टूबर: सोमालिया के पूर्वोत्तर तट के पास अज़ीनी पर लुटेरों का कब्ज़ा।
  • अपहरण के बाद: जहाज़ पूर्व की ओर व्यापारिक जहाज़ों के रास्ते की तरफ बढ़ा, जिससे चिंता बढ़ी।
  • 2 नवंबर: 48 घंटे के अभियान के बाद नौसेना ने जहाज़ को मुक्त कराया और सभी 20 चालक दल को सुरक्षित छुड़ाया। रक्षा मंत्री ने उसी दिन इसकी घोषणा की।
  • 3 नवंबर: ईरान के दूतावास ने भारत सरकार, नौसेना और वायुसेना का आभार जताया।

जहां स्रोतों में अंतर है

चालक दल की संख्या को लेकर एक अंतर सामने आया है, जिसे साफ़ करना बाकी है। नौसेना ने कहा है कि सभी 20 चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। वहीं, पंटलैंड समुद्री पुलिस के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि जहाज़ पर 21 ईरानी चालक दल के सदस्य और दो सोमाली गार्ड थे, यानी कुल 23 लोग। इस अंतर की वजह अभी स्पष्ट नहीं है, और यह भी नहीं बताया गया है कि पकड़े गए लुटेरों के साथ आगे क्या कानूनी प्रक्रिया होगी।

शब्दावली

  • धो (Dhow): अरब सागर और हिंद महासागर में इस्तेमाल होने वाला पारंपरिक लकड़ी का जहाज़, अक्सर मछली पकड़ने और व्यापार के लिए।
  • मदर शिप: कब्ज़ा किया गया बड़ा जहाज़, जिसका इस्तेमाल लुटेरे दूर-दराज़ के इलाकों में हमले करने के लिए तैरते अड्डे के तौर पर करते हैं।
  • MARCOS: भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो, जो समुद्री विशेष अभियानों के लिए प्रशिक्षित हैं।
  • गैर-गतिज उपाय: बिना हथियार चलाए जहाज़ को रोकने या सीमित करने की कार्रवाई, जैसे निगरानी और घेराबंदी।

यह बड़ी तस्वीर का हिस्सा क्यों है

यह घटना 2026 में सोमाली समुद्री डकैती की वापसी के बीच हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से यह तीसरा ईरानी मछली पकड़ने वाला धो है जिसे सोमालिया के पास कब्ज़े में लिया गया, और अप्रैल से छह व्यापारिक जहाज़ों का अपहरण हो चुका है। सुरक्षा अधिकारियों ने इस वापसी को नौसैनिक गश्त के दबाव से जोड़ा है, क्योंकि युद्धपोत हर्मुज़ जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदेब के पास खतरों पर ध्यान दे रहे हैं।

आगे क्या होगा

अज़ीनी के चालक दल की वापसी और पकड़े गए लुटेरों पर कानूनी कार्रवाई के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। यह भी नहीं बताया गया है कि जहाज़ अब किस बंदरगाह जाएगा। इन सवालों के जवाब के लिए नौसेना या रक्षा मंत्रालय की अगली सूचना का इंतज़ार रहेगा। इस बीच, अरब सागर और अदन की खाड़ी से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों के लिए निगरानी जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि मदर शिप का खतरा टलने के बावजूद समुद्री डकैती की वापसी की वजहें बनी हुई हैं।

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Questions people ask

अज़ीनी क्या है?
अज़ीनी एक ईरानी मछली पकड़ने वाला जहाज़ (धो) है, जिसे 29 अक्टूबर को सोमालिया के पूर्वोत्तर तट के पास हथियारबंद लुटेरों ने कब्ज़े में ले लिया था।
ऑपरेशन कितना लंबा चला और कहां हुआ?
यह अभियान 48 घंटे तक चला और मुंबई से 3,000 किलोमीटर से ज़्यादा दूर, अरब सागर में हुआ। इसकी घोषणा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2 नवंबर को की।
MARCOS की भूमिका क्या थी?
भारतीय वायुसेना के C-17 विमान से मरीन कमांडो (MARCOS) की सटीक एयरड्रॉप की गई, जिसके बाद जहाज़ को सुरक्षित किया गया और सभी 20 चालक दल को छुड़ाया गया।
'मदर शिप' का खतरा क्या था?
यूरोपीय संघ के समुद्री सुरक्षा केंद्र ने चेतावनी दी थी कि अज़ीनी को तैरते अड्डे के तौर पर इस्तेमाल करके दूर-दराज़ के इलाकों में व्यापारिक जहाज़ों पर हमले किए जा सकते थे।
क्या कोई हताहत हुआ?
नहीं। नौसेना ने पुष्टि की है कि सभी 20 चालक दल सुरक्षित हैं और कोई हताहत या घायल नहीं हुआ।

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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