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Indore Metro: पेड़ चरणों में कटेंगे, पक्षी विशेषज्ञ निगरानी

By Gagariya Editorial Desk•26 Oct 2026 IST•4 min read•Human Reviewed & Fact-Checked

कोर्ट ने क्या फ़ैसला दिया

Madhya Pradesh High Court की Indore Bench ने 24 अक्टूबर 2026 को Indore Metro परियोजना के लिए पेड़ काटने के ख़िलाफ़ दायर जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। न्यायमूर्ति Subodh Abhyankar और न्यायमूर्ति Jai Kumar Pillai की पीठ ने मेट्रो का काम रोकने से इनकार कर दिया, लेकिन पेड़ काटने के तरीके पर सख़्त शर्तें लगा दीं। पेड़ एक साथ नहीं काटे जाएँगे। कटाई चरणों में होगी, और वह भी कम से कम दो पक्षी विशेषज्ञों की देखरेख और सलाह से। यह फ़ैसला Priyanshu Jain बनाम Union of India (WP 954/2026) में आया है। याचिका में Rani Sarai की ज़मीन पर पेड़ काटने पर रोक, पक्षियों के घोंसलों और आवास की सुरक्षा, Wildlife (Protection) Act, 1972 का पालन और पेड़ों के प्रत्यारोपण की नीति की माँग की गई थी।

मामला क्या था

याचिकाकर्ता का कहना था कि जिस जगह मेट्रो स्टेशन बनना है, वहाँ हज़ारों पक्षी बसेरा करते हैं। इनमें तोते भी हैं, जो Wildlife (Protection) Act, 1972 के तहत संरक्षित प्रजातियों में गिने जाते हैं। याचिका में स्टेशन के लिए Regal Talkies, Gandhi Hall और Pritamlal Dua Sabhagrah के पास की ज़मीन जैसे विकल्प भी सुझाए गए थे। हस्तक्षेपकर्ता के रूप में Nature Volunteers' Society के अध्यक्ष और Padma Shri से सम्मानित पर्यावरणविद् Bhalchandra Mondhe भी इस मामले में शामिल थे। दूसरी ओर, MP Metro Rail Corporation ने कहा कि मेट्रो का संरेखण पहले से मंज़ूर है, वन विभाग की ज़रूरी अनुमतियाँ ली जा चुकी हैं, और कोई और उपयुक्त खाली ज़मीन उपलब्ध नहीं है। Corporation ने यह भी कहा कि स्टेशन की लंबाई 180 मीटर से घटाकर 150 मीटर कर दी गई है, और काटे गए पेड़ों की जगह 2,500 पेड़ लगाए जाएँगे।

कोर्ट ने पूरी रोक क्यों नहीं लगाई

पीठ ने कहा कि इसी संरेखण पर 2024 में Raj Lakshmi Foundation बनाम Madhya Pradesh मामले में समन्वय पीठ पहले ही विचार कर चुकी है, और वह आदेश अंतिम हो चुका है। इसलिए उसी संरेखण को चुनौती देने वाली नई याचिका पर अलग आदेश देना, पहले के आदेश से आगे बढ़ना होगा। पीठ ने कहा कि जो काम सीधे नहीं किया जा सकता, वह परोक्ष रूप से भी नहीं किया जा सकता। पीठ ने उत्तरदाताओं की भी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि पहले के फ़ैसले की जानकारी पहले दी जाती, तो कोर्ट का समय बचता और याचिकाकर्ता झूठी उम्मीद नहीं पालते। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता यह याचिका दायर करने से पहले ही हार चुके थे, क्योंकि पहले का आदेश उनके रास्ते में खड़ा था।

पक्षियों के लिए कोर्ट के निर्देश

कोर्ट ने पक्षियों की तकलीफ़ कम करने के लिए ये निर्देश दिए:

  1. पेड़ एक साथ या बेतरतीब तरीके से नहीं काटे जाएँगे। कटाई धीरे-धीरे, चरणों में होगी।
  2. कटाई कम से कम दो ornithologist या पक्षी विशेषज्ञों की देखरेख और सलाह से होगी। विशेषज्ञ यह बताएँगे कि पेड़ कैसे काटे जाएँ या शाखाएँ किस क्रम में छाँटी जाएँ।
  3. Bhalchandra Mondhe यह सुझाव दे सकते हैं कि पक्षियों को पास के पेड़ों पर कम से कम तकलीफ़ के साथ बसने के लिए क्या उपाय किए जाएँ, विशेषज्ञों के नाम क्या हों, और शाखाएँ किस क्रम में छाँटी जाएँ।
  4. राज्य सरकार हर पक्षी विशेषज्ञ को ₹10,000 पारिश्रमिक देगी।
  5. 2,500 पेड़ लगाने का वचन निभाना होगा। इस बारे में एक साल के भीतर कोर्ट की रजिस्ट्री में रिपोर्ट देनी होगी, और उसके बाद हर साल अप्रैल में रिपोर्ट के साथ गूगल तस्वीरें भी दाखिल करनी होंगी। पीठ ने यह भी दर्ज किया कि उसने मौके पर हज़ारों पक्षियों को देखा है, जिनमें ज़्यादातर तोते हैं। कोर्ट ने कहा कि ज़्यादातर पक्षी वहाँ सिर्फ़ शाम को बसेरा करने आते हैं, और कुछ ने ही घोंसले बनाए हैं। पीठ ने कहा कि पक्षियों की तकलीफ़ के प्रति सचेत होकर वह उनकी परेशानी कम करने की पूरी कोशिश करने के लिए बाध्य है।

आँकड़ों में फ़ैसला

बात आँकड़ा
हटाए जाने वाले पेड़ (Corporation के पक्ष के अनुसार) 182
मुआवज़े के तौर पर लगाए जाने वाले पेड़ 2,500
कटाई की देखरेख के लिए कम से कम पक्षी विशेषज्ञ 2
हर विशेषज्ञ का पारिश्रमिक ₹10,000
पहली रिपोर्ट की समय-सीमा एक साल के भीतर
उसके बाद रिपोर्ट हर साल अप्रैल में, गूगल तस्वीरों के साथ
स्टेशन की लंबाई 180 मीटर से घटाकर 150 मीटर

इस फ़ैसले से क्या बदला

पहली नज़र में यह फ़ैसला याचिकाकर्ता की हार जैसा लगता है, क्योंकि मेट्रो स्टेशन वहीं बनेगा और पेड़ कटेंगे। लेकिन फ़ैसले का दूसरा हिस्सा भी उतना ही अहम है। पहले कटाई बिना शर्त हो सकती थी। अब कटाई का तरीका, उसकी गति और उसकी निगरानी, तीनों कोर्ट के निर्देशों से बंध गए हैं। पक्षियों को एक ही दिन में बेघर करने के बजाय, उन्हें धीरे-धीरे पास के पेड़ों पर बसने का समय मिलेगा। दूसरा बदलाव जवाबदेही का है। 2,500 पेड़ लगाने का वचन अब सिर्फ़ बयान नहीं रहा। उसकी रिपोर्ट कोर्ट की रजिस्ट्री में देनी होगी, और हर साल अप्रैल में उसकी प्रगति गूगल तस्वीरों के साथ दिखानी होगी। इसका मतलब यह है कि मुआवज़ा वृक्षारोपण की जाँच सिर्फ़ एक बार नहीं, हर साल होगी।

आगे क्या होगा

अब निगाहें तीन बातों पर रहेंगी। पहली, पक्षी विशेषज्ञों के नाम और कटाई का क्रम कब तय होता है। दूसरी, चरणबद्ध कटाई सच में कितनी धीमी और व्यवस्थित रहती है। तीसरी, एक साल के भीतर आने वाली पहली रिपोर्ट में 2,500 पेड़ों का क्या हाल बताया जाता है। अगर रिपोर्ट में देर हुई या पेड़ों की देखभाल कमज़ोर मिली, तो यह मामला फिर कोर्ट के सामने आ सकता है। मेट्रो का काम आगे बढ़ेगा, लेकिन अब उसकी रफ़्तार पक्षियों की रफ़्तार से भी तय होगी। 📷 फोटो: Dilip kabiraj, Wikimedia (CC BY-SA 4.0)

Questions people ask

क्या कोर्ट ने Indore Metro का काम रोक दिया है?
नहीं। कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है और काम जारी रह सकता है, लेकिन पेड़ों की कटाई चरणों में और पक्षी विशेषज्ञों की देखरेख में ही होगी।
2,500 पेड़ लगाने की ज़िम्मेदारी किसकी है?
उत्तरदाताओं को दिए गए वचन के अनुसार 2,500 पेड़ लगाने होंगे, और एक साल में कोर्ट की रजिस्ट्री में रिपोर्ट देनी होगी।
पक्षी विशेषज्ञों को कितना पैसा मिलेगा?
राज्य सरकार हर पक्षी विशेषज्ञ को ₹10,000 पारिश्रमिक देगी।

Sources

  1. Live Law, MP High Court ने Indore Metro के लिए PIL का निपटारा किया (livelaw.in)
  2. Verdictum, चरणबद्ध कटाई और 2,500 पेड़ों का आदेश (verdictum.in)
  3. LawChakra, Indore Metro पेड़ कटाई पर कोर्ट के निर्देश (lawchakra.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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