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होर्मुज़ में 2 टैंकरों पर हमला, 2 भारतीय लापता

By Gagariya Editorial Desk•12 Oct 2026 IST•5 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
होर्मुज़ में 2 टैंकरों पर हमला, 2 भारतीय लापता
Photo: Own or licensed by the publisher

रविवार की शाम होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास समुद्र में आग लगी। खबर दिल्ली तक पहुंची तो समय था सोमवार की आधी रात के आसपास। दो टैंकर, दोनों पर भारतीय नाविक, और दोनों पर हमला एक ही दिन।

एक जहाज़ ओमान के सोहार एंकरेज पर था। दूसरा होर्मुज़ के अंदर। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर दोनों हमलों की निंदा की और कहा कि व्यावसायिक जहाज़ों, नाविकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले तुरंत बंद होने चाहिए। इस वक्त सबसे बड़ी चिंता दो लापता भारतीय नाविकों की है।

पेट्रो डॉल्फिन: सोहार एंकरेज पर ड्रोन गिरा

निकारागुआ के ध्वज वाला टैंकर एमटी पेट्रो डॉल्फिन ओमान के सोहार एंकरेज पर खड़ा था। रविवार को उस पर ड्रोन गिरा। जहाज़ पर 11 भारतीय नाविक थे।

इनमें से 9 को सुरक्षित बचा लिया गया। दो नाविक अब भी लापता हैं।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने X पर जानकारी दी कि स्थानीय तटरक्षक बल की तलाशी और बचाव मुहिम चल रही है। उन्होंने कहा कि बचाव प्रयासों में मदद के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय हो रहा है। यह बात विदेश मंत्रालय के बयान में भी दोहराई गई है।

बिज़नेस टुडे के अनुसार शुरुआती जानकारी में पता चला है कि हमले के समय जहाज़ पर कुल 12 चालक दल के सदस्य थे। इनमें 11 भारतीय नागरिक और एक बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे। यह आंकड़ा अभी शुरुआती रिपोर्ट पर आधारित है।

वालथेरा: प्रोजेक्टाइल से आग, सभी 11 सुरक्षित

दूसरा हमला होर्मुज़ जलडमरूमध्य के अंदर हुआ। मार्शल आइलैंड के ध्वज वाला टैंकर एमटी वालथेरा अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया। जहाज़ पर आग लग गई।

राहत की बात यह है कि इस जहाज़ के सभी 11 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। विदेश मंत्रालय के बयान और सोनोवाल के अपडेट, दोनों में यही कहा गया है।

मंत्रालय ने साफ किया कि मस्कट स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है। दूतावास ओमान के अधिकारियों और संबंधित जहाज़ प्रबंधन कंपनियों के साथ समन्वय कर लापता नाविकों की तलाश में मदद दे रहा है और चालक दल को हरसंभव सहायता पहुंचा रहा है।

यहां एक बात स्पष्ट करना ज़रूरी है। विदेश मंत्रालय का बयान दोनों हमलों को "होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्षेत्र" में हुआ बताता है। लेकिन सोनोवाल के अपडेट के मुताबिक पेट्रो डॉल्फिन पर ड्रोन ओमान के सोहार एंकरेज पर गिरा था, जो जलडमरूमध्य से कुछ दूरी पर है।

मंत्रालय का बयान: 'हमले तुरंत बंद हों'

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "हम 11 अक्टूबर 2026 को होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्षेत्र में व्यावसायिक जहाज़ों पर हुए हमलों की निंदा करते हैं।" मंत्रालय ने पेट्रो डॉल्फिन पर ड्रोन गिरने और दो भारतीय नाविकों के लापता होने की पुष्टि की।

बयान में आगे कहा गया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। मंत्रालय ने क्षेत्र में व्यावसायिक पोत परिवहन पर बार-बार हो रहे हमलों को "गहरी चिंता का विषय" बताया और चेताया कि ये हमले पहले से अस्थिर स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।

भारत ने तुरंत तनाव कम करने और बातचीत व कूटनीति से मौजूदा संघर्ष का समाधान निकालने की अपील दोहराई है। मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री व्यापार का निर्बाध प्रवाह कायम रहना चाहिए।

एक हफ़्ते में तीसरी घटना, तलाश पर नज़र

यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। पिछले कुछ दिनों में इस क्षेत्र में भारतीय चालक दल वाले जहाज़ों पर कई हमले हो चुके हैं।

तारीख जहाज़ क्या हुआ भारतीय चालक दल की स्थिति
6 अक्टूबर एमटी ऑन पीस (पनामा ध्वज) होर्मुज़ के पास प्रोजेक्टाइल गिरा 11 समेत 12 घायल; 19 में से 17 भारतीय, ओमान के खसाब में इलाज (बिज़नेस टुडे)
9 अक्टूबर एमटी जेम नंबर 2 (पनामा ध्वज) शारजाह एंकरेज पर ड्रोन हमला सभी 22 भारतीय सुरक्षित (सोनोवाल)
11 अक्टूबर एमटी पेट्रो डॉल्फिन (निकारागुआ ध्वज) सोहार एंकरेज पर ड्रोन गिरा 9 बचाए गए, 2 लापता; तलाश जारी
11 अक्टूबर एमटी वालथेरा (मार्शल आइलैंड ध्वज) होर्मुज़ में प्रोजेक्टाइल से आग सभी 11 भारतीय सुरक्षित

तालिका में दिख रहा है कि एक हफ़्ते के अंदर चार घटनाएं हुईं और हर बार भारतीय नाविक निशाने पर रहे। यही वजह है कि विदेश मंत्रालय ने इस बार "बार-बार हो रहे हमले" शब्दों का इस्तेमाल किया।

बिज़नेस टुडे के अनुसार अक्टूबर के पहले हफ़्ते में कम से कम सात टैंकर हमले दर्ज हुए, जिनमें कुवैत-ध्वजधारी एमटी काज़िमाह 3 और लाइबेरिया-ध्वजधारी लिप्सी पर हमले भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के टूटने और अमेरिकी नाकेबंदी के बीच इन हमलों में इज़ाफ़ा हुआ है। हालांकि उसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की ढुलाई लगभग युद्ध से पहले के स्तर पर बनी हुई है।

भारतीय नाविक क्यों निशाने पर दिख रहे हैं

यहां संदर्भ समझना ज़रूरी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े नाविक आपूर्तिकर्ता देशों में है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पोत परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के 3,20,000 से ज़्यादा सक्रिय नाविक हैं। इतनी बड़ी संख्या का मतलब है कि इस क्षेत्र में चलने वाले लगभग हर दूसरे जहाज़ पर भारतीय चालक दल मौजूद होता है।

एएफपी के मुताबिक 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हुए हमलों में कई भारतीय नाविक मारे जा चुके हैं। यही पृष्ठभूमि इस हमले को गंभीर बनाती है।

भारत ने समुद्री सुरक्षा के लिए कूटनीतिक कदम भी उठाए हैं। एएनआई के अनुसार भारत और लाइबेरिया ने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर "ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयर्स" की शुरुआत की है। इस समूह का मकसद समुद्री हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाना और व्यावसायिक जहाज़ों व नाविकों की सुरक्षा को वैश्विक चर्चा के केंद्र में रखना है। रविवार के हमलों के बाद इस पहल की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।

आगे क्या: तलाश जारी, कोई नाम नहीं

इस वक्त सबसे अहम सवाल दो लापता नाविकों का है। ओमान का तटरक्षक बल उनकी तलाश में लगा है। मस्कट दूतावास ओमानी अधिकारियों के संपर्क में है। जब तक दोनों नहीं मिल जाते, सरकार की नज़र इसी पर रहेगी।

एक बात ध्यान देने लायक है। विदेश मंत्रालय या सोनोवाल, दोनों में से किसी ने भी यह नहीं बताया कि हमला किसने किया। रिपोर्टों में हमलावर का नाम कहीं नहीं है। निंदा और निंदा के बाद तनाव कम करने की अपील हुई है, पर आरोप किसी पर नहीं लगाया गया।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा अब भारत के लिए सीधा घरेलू मुद्दा बन गई है। एक हफ़्ते में चार हमले, दर्जनों भारतीय नाविक प्रभावित। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि तलाशी में क्या मिलता है और क्या भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को और सख्ती से उठाता है।

📷 फोटो: Drunken_sailor_mn, Wikimedia Commons (public domain)

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होर्मुज़ क्षेत्र में किन जहाज़ों पर हमला हुआ?
11 अक्टूबर को दो टैंकरों पर हमले हुए। पहला एमटी पेट्रो डॉल्फिन था, जो निकारागुआ के ध्वज वाला टैंकर है और ओमान के सोहार एंकरेज पर ड्रोन की चपेट में आया। दूसरा एमटी वालथेरा था, जो मार्शल आइलैंड के ध्वज वाला टैंकर है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अज्ञात प्रोजेक्टाइल लगने से उसमें आग लग गई।
लापता भारतीय नाविकों की तलाश कहां तक पहुंची?
पेट्रो डॉल्फिन के 11 भारतीय नाविकों में से 9 को सुरक्षित बचा लिया गया है और 2 अब भी लापता हैं। मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के अनुसार ओमान का तटरक्षक बल तलाशी अभियान चला रहा है। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ओमानी अधिकारियों और जहाज़ प्रबंधन कंपनियों के साथ समन्वय कर रहा है।
विदेश मंत्रालय ने हमलों पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने 11 अक्टूबर को बयान जारी कर दोनों हमलों की निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और व्यावसायिक पोत परिवहन पर बार-बार हो रहे हमले गहरी चिंता का विषय हैं। भारत ने तुरंत तनाव कम करने और कूटनीति से समाधान की अपील दोहराई है।
क्या पिछले हफ़्ते भी ऐसे हमले हुए थे?
हां। 6 अक्टूबर को एमटी ऑन पीस पर प्रोजेक्टाइल गिरा था, जिसमें 11 भारतीय समेत 12 चालक दल के सदस्य घायल हुए। 9 अक्टूबर को शारजाह एंकरेज पर एमटी जेम नंबर 2 पर ड्रोन हमला हुआ, पर उसके सभी 22 भारतीय सुरक्षित थे। बिज़नेस टुडे के अनुसार अक्टूबर के पहले हफ़्ते में कम से कम सात टैंकर हमले दर्ज हुए।
ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी ऑफ शिपिंग क्या है?
एएनआई के अनुसार भारत और लाइबेरिया ने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर यह समूह शुरू किया है। इसका मकसद समुद्री हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाना और व्यावसायिक जहाज़ों व नाविकों की सुरक्षा को वैश्विक चर्चा के केंद्र में रखना है। होर्मुज़ क्षेत्र में बढ़ते हमलों के बीच यह पहल अहम मानी जा रही है।

Sources

  1. Indian Express (indianexpress.com)
  2. Hindustan Times (hindustantimes.com)
  3. Business Today (businesstoday.in)
  4. The Tribune (ANI) (tribuneindia.com)
  5. Straits Times (AFP) (straitstimes.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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