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गुजरात में UCC को राष्ट्रपति की मंजूरी, दूसरा राज्य

By Gagariya Editorial Desk•5 Oct 2026 IST•6 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
गुजरात में UCC को राष्ट्रपति की मंजूरी, दूसरा राज्य
Photo: Own or licensed by the publisher

राष्ट्रपति भवन के रिकॉर्ड में तारीख 17 सितंबर दर्ज है। उसी दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पर हस्ताक्षर किए। राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर को इसे राजपत्र में प्रकाशित कर दिया। पेच सिर्फ इतना है कि दस्तखत सितंबर में हुए और खबर अक्टूबर में आई। 2 अक्टूबर को जब यह खबर सुर्खियों में आई, तो कई रिपोर्टों ने इसे उसी दिन की मंजूरी की तरह पेश किया। सरकारी रिकॉर्ड की तारीख अलग कहती है। दोनों तारीखों को एक साथ पढ़ना जरूरी है, वरना भ्रम होगा।

इस एक दस्तखत के साथ गुजरात देश का दूसरा राज्य बन गया, जिसके पास समान नागरिक संहिता का कानून है। उत्तराखंड पहला राज्य था, जहां UCC जनवरी 2025 से लागू है। लेटेस्टली की रिपोर्ट के अनुसार असम के UCC विधेयक को भी 29 सितंबर को राष्ट्रपति की सहमति मिली है। यानी अब तीन राज्य इस रास्ते पर हैं। फिर भी तीनों के कानून एक जैसे नहीं हैं। इसी फर्क पर सबसे तीखी बहस छिड़ी हुई है।

कानून अभी लागू नहीं हुआ

राजपत्र में छपने का मतलब यह नहीं कि कानून कल से लागू हो गया। गुजरात सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी, जिसमें कानून के लागू होने की तारीख तय होगी। तब तक यह कागज पर मौजूद है, जमीन पर नहीं। नियम भी अभी बनने बाकी हैं।

विधानसभा ने विधेयक 24 मार्च 2026 को पारित किया था। बहस सात घंटे से ज्यादा चली थी। कांग्रेस के सदस्य बहस के दौरान सदन से बाहर चले गए थे और मांग की थी कि विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजा जाए। विधेयक विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पेश किया था। इससे पहले न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

कानून में क्या-क्या है

UCC का सीधा मतलब है कि शादी, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और लिव-इन संबंधों के लिए एक ही कानून होगा, चाहे व्यक्ति किसी भी धर्म का हो। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार यह कानून पूरे राज्य में लागू होगा और राज्य के बाहर रहने वाले गुजरात के निवासियों पर भी।

शादी का पंजीकरण अनिवार्य होगा। डेली जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक शादी के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण के लिए ज्ञापन देना होगा। न करने पर जुर्माने का प्रावधान है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार शादी और तलाक के पंजीकरण में चूक पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

बहुविवाह पर प्रतिबंध होगा। बेटों और बेटियों को विरासत में बराबर का हक मिलेगा। अगर कोई व्यक्ति बिना वसीयत के मर जाता है, तो उत्तराधिकार के नियम भी इसी कानून में तय होंगे। गोद लिए गए बच्चों और सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक से जन्मे बच्चों को कानून में संतान माना जाएगा। ये ब्योरे लेटेस्टली की रिपोर्ट में दिए गए हैं।

जबर्दस्ती शादी कराने पर सात साल तक की कैद हो सकती है। अगर तलाक सक्षम अदालत के आदेश के बिना लिया गया, तो वह अवैध माना जाएगा और तीन साल तक की कैद का प्रावधान है। तलाकशुदा जोड़ों को बेवजह की रोक के बिना दोबारा शादी का अधिकार होगा। हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक होगी। ये प्रावधान डेली जागरण की रिपोर्ट में दर्ज हैं।

लिव-इन संबंधों के लिए पूरी प्रक्रिया

लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। साथ रहने वाले जोड़े को तय रजिस्ट्रार के पास बयान देना होगा। रिश्ता खत्म होने पर भी अधिकारियों को सूचित करना होगा। लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध संतान माना जाएगा। जिस महिला को लिव-इन साथी छोड़ दे, उसे भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा।

पंजीकरण में गलत जानकारी देने पर तीन महीने तक की कैद या 25,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। नाबालिगों से जुड़े लिव-इन संबंधों के लिए और सख्त प्रावधान रखे गए हैं। ये प्रावधान डेली जागरण की रिपोर्ट में दर्ज हैं। यह मोटे तौर पर उत्तराखंड के ढांचे पर बना है, हालांकि दोनों राज्यों के प्रावधान पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं।

आदिवासी समुदाय कानून से बाहर

UCC संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत आने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों पर लागू नहीं होगा। जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकार संविधान के भाग 21 के तहत सुरक्षित हैं, वे भी इसके दायरे से बाहर रहेंगे। यह छूट उत्तराखंड के कानून में भी थी।

पूरा घटनाक्रम

  1. फरवरी 2024: एक रिपोर्ट के अनुसार गुजरात सरकार ने न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में UCC पर समिति गठित की।
  2. मार्च 2026: समिति की रिपोर्ट के बाद विधानसभा में विधेयक पेश हुआ।
  3. 24 मार्च 2026: सात घंटे से ज्यादा बहस के बाद विधानसभा ने विधेयक पारित किया।
  4. 17 सितंबर 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक को सहमति दी। यह तारीख राष्ट्रपति भवन के रिकॉर्ड के अनुसार है।
  5. 29 सितंबर 2026: एक रिपोर्ट के अनुसार असम के UCC विधेयक को भी राष्ट्रपति की सहमति मिली।
  6. 1 अक्टूबर 2026: गुजरात सरकार ने कानून को राजपत्र में प्रकाशित किया।
  7. तारीख तय नहीं: लागू होने की तारीख अलग अधिसूचना से तय होगी।

एक ही कानून पर दो नजरिए

2 अक्टूबर को गुवाहाटी में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “Where is the Uniform Civil Code? Every state has a separate UCC, so why call it UCC? It should be called a 'State Civil Code'.” यानी जब हर राज्य का कानून अलग है, तो उसे समान कहना कैसे सही है। खुर्शीद ने कहा कि असम, उत्तराखंड और गुजरात में अलग-अलग प्रावधान हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड UCC के खिलाफ नैनीताल हाई कोर्ट में कई रिट याचिकाएं और जनहित याचिकाएं दायर हैं, जिन पर फैसला आना बाकी है। ये बातें नेशन प्रेस की रिपोर्ट में दर्ज हैं।

दूसरी तरफ भाजपा नेताओं ने फैसले का स्वागत किया। एएनआई से बातचीत में नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “This was a resolution of the Gujarat government. The Gujarat government has fulfilled its promise...” बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सराओगी ने कहा, “UCC is not against any religion… it gives equality to all”, यानी UCC किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, यह सबको बराबरी देता है।

गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा की आपत्ति अलग दिशा से है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक उनका कहना है कि सरकार को कानून लाने से पहले राज्य के विविध समुदायों से सलाह करनी चाहिए थी। चावड़ा ने बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, महंगाई और किसान आत्महत्या जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार UCC से ध्यान भटका रही है।

आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने UCC को धर्मों के बीच सद्भाव का कानून बताया। नेशन प्रेस के मुताबिक उन्होंने कहा, “Uniform Civil Code is a law that protects and respects every religion.”

विधेयक पेश करते समय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा था कि इसका मकसद “social harmony and national unity”, यानी सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि UCC महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करेगा। यह ब्योरा एक रिपोर्ट में दर्ज है।

अब आगे क्या देखना है

पहली नजर लागू होने की तारीख पर रहेगी। गुजरात सरकार को नियम बनाने होंगे और अधिसूचना जारी करनी होगी। बिना अधिसूचना के कानून सिर्फ किताब में रहेगा। दूसरी नजर नैनीताल हाई कोर्ट पर है, जहां उत्तराखंड UCC को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला आना है। वह फैसला राज्य-स्तरीय UCC की कानूनी बुनियाद तय कर सकता है।

तीसरी नजर दूसरे राज्यों पर। गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि 2029 से पहले भाजपा-एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू होगा। अगर हर राज्य का कानून अलग होता गया, तो खुर्शीद वाला सवाल और तेज होगा: समान कहां है?

Questions people ask

क्या गुजरात में UCC अब लागू हो गया है?
नहीं। राष्ट्रपति की मंजूरी और राजपत्र में प्रकाशन के बाद भी कानून अपने आप लागू नहीं हुआ है। गुजरात सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी, जिसमें लागू होने की तारीख तय होगी। नियम भी अभी बनने बाकी हैं। तब तक यह कानून सिर्फ कागज पर मौजूद है।
UCC से आदिवासी समुदाय को क्यों बाहर रखा गया है?
कानून संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत आने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों पर लागू नहीं होगा। जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकार संविधान के भाग 21 के तहत सुरक्षित हैं, वे भी दायरे से बाहर हैं। यह छूट उत्तराखंड के UCC में भी दी गई थी।
लिव-इन संबंधों के लिए क्या नियम होंगे?
लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और रिश्ता खत्म होने पर भी अधिकारियों को बताना होगा। गलत जानकारी पर तीन महीने तक की कैद या 25,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। लिव-इन से जन्मे बच्चे वैध माने जाएंगे और छोड़ी गई महिला को भरण-पोषण का हक मिलेगा।
हर राज्य का UCC अलग क्यों है?
केंद्र का एक कानून नहीं बना है, इसलिए हर राज्य अपनी विधानसभा से अलग विधेयक पारित कर रहा है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद का तर्क है कि असम, उत्तराखंड और गुजरात के प्रावधान अलग-अलग हैं, इसलिए इसे समान कहना गलत है और यह स्टेट सिविल कोड है।

Sources

  1. LatestLY (latestly.com)
  2. Live Law (livelaw.in)
  3. Daily Jagran (thedailyjagran.com)
  4. 7Globe (7globe.in)
  5. Prime24Seven (prime24seven.com)
  6. Nation Press (nationpress.com)
  7. ANI via APNA MA TV (apnamatvchannel.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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