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एचडीएफसी बैंक के नए सीईओ अनूप बागची, 27 अक्टूबर से कमान

By Gagariya Editorial Desk•5 Oct 2026 IST•5 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
एचडीएफसी बैंक के नए सीईओ अनूप बागची, 27 अक्टूबर से कमान
Photo: Own or licensed by the publisher

32 साल में पहली बार बाहरी चेहरा

एचडीएफसी बैंक ने अपने अगले प्रमुख के नाम का फैसला कर लिया है। आईसीआईसीआई ग्रुप के दिग्गज अनूप बागची बैंक के नए प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे। तीन साल के कार्यकाल के साथ वे 27 अक्टूबर 2026 को यह जिम्मेदारी संभालेंगे।

इस नियुक्ति को भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी मिल चुकी है। नियुक्ति की घोषणा के बाद सोमवार को शेयर बाजार में एचडीएफसी बैंक के शेयरों में करीब एक फीसदी की तेजी आई और शेयर 728.3 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों ने नए नेतृत्व को भरोसे के संकेत के तौर पर लिया है।

यह फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक है। द हिंदू बिजनेसलाइन के अनुसार, करीब 32 साल के अस्तित्व में पहली बार एचडीएफसी बैंक का नेतृत्व कोई बाहरी व्यक्ति संभालेगा। अब तक बैंक के शीर्ष पद पर हमेशा घर के ही लोग रहे हैं। अनूप बागची बैंक के इतिहास के तीसरे प्रमुख होंगे।

शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे बागची

बागची वर्तमान एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे। जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, उन्होंने अगस्त में बैंक के बोर्ड को सूचित किया था कि वह दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद तीसरी बार इस पद के लिए आवेदन नहीं करेंगे।

जगदीशन 27 अक्टूबर 2020 से बैंक की कमान संभाले हुए थे। उनसे पहले बैंक की स्थापना के समय से 26 अक्टूबर 2020 तक आदित्य पुरी सबसे लंबे समय तक एचडीएफसी बैंक के प्रमुख रहे थे।

बोर्ड ने नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पहले बागची को 2 अक्टूबर से अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किया। गवर्नेंस, नामांकन और पारिश्रमिक समिति की सिफारिश के आधार पर एमडी और सीईओ की नियुक्ति को मंजूरी मिली। अब यह नियुक्ति कंपनीज अधिनियम के तहत शेयरधारकों की स्वीकृति पर निर्भर है। उनका तीन साल का कार्यकाल 27 अक्टूबर 2026 से 26 अक्टूबर 2029 तक चलेगा।

कौन हैं अनूप बागची

अनूप बागची भारतीय बैंकिंग जगत का जाना-पहचाना नाम है। वह 1992 से आईसीआईसीआई ग्रुप से जुड़े हैं। ट्रैक डॉट इन की रिपोर्ट के अनुसार, वह जून 2023 से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ के पद पर हैं।

बैंकिंग में उनका अनुभव बहुत व्यापक है। आईसीआईसीआई बैंक में वह 2017 से 2023 तक कार्यकारी निदेशक रहे। इस दौरान उन्होंने खुदरा, व्यावसायिक और ग्रामीण बैंकिंग के साथ-साथ थोक बैंकिंग जैसे बड़े खंड भी संभाले। बाद में वह आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और सीईओ भी बने।

शिक्षा के मामले में भी उनका रिकॉर्ड मजबूत है। उन्होंने आईआईटी कानपुर से पढ़ाई की और फिर आईआईएम बेंगलुरु से प्रबंधन की डिग्री हासिल की। आईआईएम बेंगलुरु के अनुसार, वह संस्थान के 1992 बैच के पूर्व छात्र हैं।

तीन दशक से अधिक के करियर में बागची ने ट्रेजरी, खुदरा बैंकिंग, थोक बैंकिंग, निवेश बैंकिंग, धन प्रबंधन, बीमा और डिजिटल वित्तीय सेवाओं जैसे लगभग हर खंड में काम किया है।

दो नाम भेजे गए थे, बागची का चुनाव

ट्रैक डॉट इन के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक ने शीर्ष पद के लिए दो नाम रिजर्व बैंक को भेजे थे। दूसरा नाम बैंक के डिप्टी प्रबंध निदेशक कैजाद भारुचा का बताया गया था। भारुचा 2014 से बैंक के बोर्ड में हैं और उन्हें इस पद के प्रबल दावेदारों में माना जा रहा था। आखिर में रिजर्व बैंक ने बागची के नाम पर मुहर लगाई।

नियुक्ति की पृष्ठभूमि में कुछ विवाद भी रहा है। द हिंदू बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में बैंक के अंशकालिक चेयरमैन के अचानक इस्तीफे से शुरू हुए विवाद के बीच यह घोषणा आई है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि अब यह साफ नहीं है कि डिप्टी एमडी कैजाद भारुचा बैंक में बने रहेंगे या नहीं।

निवेशकों की उम्मीद क्या है

सोमवार को शेयर में आई तेजी की सबसे बड़ी वजह साफ है: नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता खत्म हो गई है। जगदीशन के तीसरी पारी से इनकार के बाद से बाजार यह सवाल पूछ रहा था कि देश के सबसे बड़े निजी बैंक की कमान कौन संभालेगा।

लेकिन इंडमनी के विश्लेषण के मुताबिक, अनिश्चितता का खत्म होना भावुक असर डालता है, कारोबार नहीं बढ़ाता। स्थायी बदलाव के लिए बागची को ऋण वृद्धि, जमा, मार्जिन और लाभप्रदता के असली आंकड़ों में सुधार करना होगा।

दरअसल, एचडीएफसी लिमिटेड के विलय के बाद बैंक की बैलेंस शीट पर दबाव बना हुआ है। विलय से बैंक को बड़ा कर्ज पोर्टफोलियो मिला, लेकिन उतना बड़ा जमा आधार नहीं मिला। जमा से ही कर्ज का भुगतान होता है, और अगर जमा की वृद्धि कर्ज से पीछे रहे तो फंडिंग महंगी हो जाती है।

क्यू2 के आंकड़े उम्मीद बढ़ाते हैं

नए सीईओ के लिए अच्छी खबर यह है कि बैंक के ताजा आंकड़े काफी मजबूत हैं। रॉयटर्स के अनुसार, सितंबर तिमाही के कारोबार अपडेट में जमा में करीब 18.8 फीसदी और सकल अग्रिम में 16.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

इंडमनी के मुताबिक, क्यू2 के आंकड़े कुछ इस तरह रहे:

पैमाना राशि वार्षिक वृद्धि
सकल अग्रिम 32.19 लाख करोड़ रुपये 16.3%
कुल जमा (तिमाही अंत) 33.27 लाख करोड़ रुपये 18.8%
औसत जमा 31.67 लाख करोड़ रुपये 16.8%
कासा जमा 10.52 लाख करोड़ रुपये 10.8%

सबसे उत्साहजनक बात यह है कि जमा की वृद्धि अब कर्ज की वृद्धि से तेज है। इसका मतलब है कि विलय के बाद का सबसे बड़ा दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। लेकिन एक चिंता भी है। कासा जमा, यानी चालू और बचत खाते की जमा, केवल 10.8 फीसदी बढ़ी। ये सस्ती फंडिंग का स्रोत होते हैं। बैंक जमा तो आकर्षित कर रहा है, लेकिन उनकी लागत पर भी नजर रखनी होगी।

प्रतिद्वंद्वी के घर से आए नेता

नियुक्ति की सबसे रोचक परत यह है कि बागची अपने प्रतिद्वंद्वी के ही घर से आए हैं। आईसीआईसीआई बैंक पिछले कुछ सालों में एचडीएफसी बैंक का सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरा है।

एक समय एचडीएफसी बैंक निवेशकों के लिए निजी बैंकों का मानक माना जाता था। लगातार ऋण वृद्धि, मजबूत संपत्ति गुणवत्ता और अनुमानित लाभ ने शेयर को प्रीमियम मूल्यांकन दिलाया था। लेकिन पिछले एक साल में बैंक का शेयर करीब 26 फीसदी गिरा है और 52 सप्ताह के उच्च स्तर से काफी नीचे है।

इंडमनी के विश्लेषण में कहा गया है कि प्रभुदास लीलाधर के अनुमानों के अनुसार, एचडीएफसी बैंक आईसीआईसीआई बैंक की तुलना में करीब 30 फीसदी की छूट पर कारोबार कर रहा है। अब बागची को निवेशकों का वह भरोसा दोबारा हासिल करना होगा, जिससे बैंक अपना पुराना प्रीमियम वापस पा सके।

आगे क्या देखना होगा

बागची की सफलता का पैमाना सोमवार के शेयर की तेजी नहीं होगी। असली परीक्षा आने वाली तिमाहियों के आंकड़ों में होगी। जमा की वृद्धि बनी रहती है या नहीं, कासा का हिस्सा बढ़ता है या नहीं, शुद्ध ब्याज मार्जिन में सुधार होता है या नहीं, और नई शाखाओं की उत्पादकता कैसी रहती है।

बाहरी सीईओ होने की वजह से वरिष्ठ प्रबंधन में होने वाले बदलाव भी शुरुआती संकेत देंगे कि रणनीतिक बदलाव कितना बड़ा होगा। और सबसे अहम, नियुक्ति अभी शेयरधारकों की स्वीकृति पर निर्भर है। औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 अक्टूबर को देश के सबसे बड़े निजी बैंक की कमान एक आईसीआईसीआई वेटरन के हाथ में होगी।

Questions people ask

अनूप बागची एचडीएफसी बैंक का कार्यभार कब संभालेंगे?
अनूप बागची 27 अक्टूबर 2026 को एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ का पदभार ग्रहण करेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। तीन साल का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2029 तक चलेगा, बशर्ते शेयरधारकों की स्वीकृति मिल जाए।
अनूप बागची कौन हैं और उनका अनुभव क्या है?
बागची 1992 से आईसीआईसीआई ग्रुप से जुड़े हैं। वह जून 2023 से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ हैं। इससे पहले वह आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ और आईसीआईसीआई बैंक के कार्यकारी निदेशक रहे। उन्होंने आईआईटी कानपुर और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई की है।
एचडीएफसी बैंक के लिए यह नियुक्ति ऐतिहासिक क्यों है?
यह पहली बार है कि एचडीएफसी बैंक का नेतृत्व कोई बाहरी व्यक्ति संभालेगा। बैंक की स्थापना 1994 में हुई थी और अब तक आदित्य पुरी और शशिधर जगदीशन जैसे घर के लोग ही शीर्ष पद पर रहे। बागची बैंक के 32 साल के इतिहास के तीसरे प्रमुख होंगे।
शशिधर जगदीशन की जगह क्यों बदल रही है?
जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, उन्होंने अगस्त में बोर्ड को बताया था कि वह दूसरी तीन साल की पारी पूरी होने के बाद तीसरी बार इस पद के लिए आवेदन नहीं करेंगे। वह अक्टूबर 2020 से बैंक के एमडी और सीईओ थे।
नए सीईओ के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
एचडीएफसी लिमिटेड के विलय के बाद बैंक के सामने जमा वृद्धि को कर्ज वृद्धि से आगे रखना, शुद्ध ब्याज मार्जिन सुधारना और शाखा उत्पादकता बढ़ाना जैसी चुनौतियां हैं। बैंक का शेयर पिछले एक साल में करीब 26 फीसदी गिरा है, इसलिए लाभप्रद वृद्धि से मूल्यांकन का पुराना प्रीमियम दोबारा हासिल करना होगा।

Sources

  1. Reuters: India's HDFC Bank rises after CEO appointment (reuters.com)
  2. The Hindu BusinessLine: ICICI Group veteran Anup Bagchi to head HDFC Bank (thehindubusinessline.com)
  3. Trak.in: HDFC Bank Appoints Anup Bagchi As MD & CEO For 3 Years (trak.in)
  4. IndMoney: HDFC Bank Appoints Anup Bagchi as CEO (indmoney.com)
  5. IIM Bangalore: Anup Bagchi appointed MD & CEO of HDFC Bank (iimb.ac.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

This story is informational only and is not financial advice. Decisions about money belong with a registered adviser — the sources above are a good place to start reading.

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