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भूटान में ग्लेशियल झील फटी, बंगाल-असम में अलर्ट

By Gagariya Editorial Desk•31 Oct 2026 IST•4 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
भूटान में ग्लेशियल झील फटी, बंगाल-असम में अलर्ट
Photo: Own or licensed by the publisher

क्या हुआ

भूटान के उत्तर-पश्चिमी गासा जिले में, वाकिला पहाड़ के नीचे स्थित शिंताफू झील गुरुवार, 29 अक्टूबर की शाम को फट गई। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, यानी GLOF कहते हैं। गासा त्साचू गर्म पानी के झरनों के पास बने ढांचे को नुकसान हुआ। लाया गांव तक जाने वाली सड़क का एक हिस्सा बह गया और उसे अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया। गर्म पानी के झरनों वाला इलाका पानी पहुंचने से पहले ही खाली करा लिया गया था। भूटान में किसी मौत की खबर नहीं आई। फिर भी, झील क्यों फटी, कितना पानी बाहर निकला और नुकसान का पूरा दायरा क्या है, यह अब तक पुष्ट नहीं हुआ है।

भारत में अलर्ट कैसे पहुंचा

झील से निकला पानी ऊपरी पुनात्सांगछू नदी में गया। यही नदी भारत में प्रवेश करने के बाद संकोश कहलाती है। केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ पूर्वानुमान निगरानी निदेशालय ने 29 अक्टूबर को एक विशेष सलाह जारी की। इसमें कहा गया कि भूटान में ऊपरी पुनात्सांगछू में अचानक बाढ़ आई है और पानी के भारत-भूटान सीमा तक पहुंचने में 6 से 8 घंटे लगेंगे। सलाह में पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और असम के धुबरी में नदी के स्तर में अचानक बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई। संकोश किनारे के अधिकारियों से जलस्तर पर नजर रखने और एहतियात बरतने को कहा गया।

अलीपुरद्वार में रात भर क्या हुआ

अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शॉ ने बताया कि करीब 4,000 से 5,000 लोगों को आश्रय स्थलों में पहुंचाया गया, जिनमें ज्यादातर स्कूल की इमारतें थीं। इसके अलावा 6,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजा गया। दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर कुल संख्या करीब 10,000 से 12,000 बनती है। कुछ रिपोर्टों में 10,000 और कुछ में 12,000 का आंकड़ा है। यह फर्क इसी जोड़ से समझ आता है। राज्य आपदा मोचन बल तैनात किया गया, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की एक टीम रास्ते में थी, और नागरिक सुरक्षा कर्मी भी लगाए गए। आश्रयों में सूखा भोजन, पीने का पानी और शौचालय की सुविधा का इंतजाम किया गया। संकोश के लिए रेड अलर्ट लागू था। पुलिस अधीक्षक ने लोगों से घबराने से बचने की अपील की और कहा कि प्रशासन भूटानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।

असम की स्थिति

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और धुबरी में टीम जमीन पर मौजूद है। शुक्रवार की सुबह तक असम से किसी नुकसान या विस्थापन की खबर नहीं थी। सुबह तक हालात नियंत्रण में बताए गए।

30 अक्टूबर की शाम तक क्या बदला

30 अक्टूबर की शाम तक अधिकारियों ने कहा कि तत्काल खतरा टल गया है। संकोश खतरे के निशान से नीचे बह रही थी। सीमा के दोनों ओर किसी मौत की खबर नहीं थी। लापता लोगों से जुड़ी खबरों का समाधान हो गया और सभी लोग सुरक्षित पाए गए। यह बदलाव एक दिन के भीतर आया। 29 अक्टूबर की शाम झील फटी, रात में भारत में अलर्ट और निकासी हुई, और अगले दिन शाम तक नदी का स्तर नीचे आ गया। फिर भी, भूटान में सड़क और झरनों के पास हुए नुकसान की मरम्मत बाकी है।

प्रभावित लोगों के लिए इसका क्या मतलब है

सबसे सीधा असर संकोश किनारे रहने वाले लोगों पर पड़ा, खासकर अलीपुरद्वार और धुबरी में। रेड अलर्ट का मतलब था कि नदी का स्तर तेजी से बढ़ सकता है और निचले इलाकों में पानी घुस सकता है। इसलिए प्रशासन ने लोगों को स्कूलों जैसी सुरक्षित इमारतों में पहुंचाया, जहां भोजन, पानी और शौचालय का इंतजाम था। नदी किनारे रहने वालों के लिए सबक साफ है। अलर्ट पर प्रशासन के निर्देश मानें, जरूरी कागजात और दवाएं साथ रखें, और बहते पानी के पास जाने से बचें। लाया गांव की सड़क अनिश्चितकाल के लिए बंद है, इसलिए उस रास्ते की यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन से ताजा जानकारी लें।

शब्दावली

GLOF का पूरा नाम ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड है। हिमनद के पिघलने से बनी झील जब अचानक टूटती है, तो बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहता है। पुनात्सांगछू वह नदी है जो भूटान में बहती है। भारत में प्रवेश करने के बाद यही नदी संकोश कहलाती है। इसलिए भूटान की खबरों में पुनात्सांगछू और भारत की खबरों में संकोश नाम आता है, लेकिन नदी एक ही है। शिंताफू उन 17 हिमनद झीलों में से एक है, जिन्हें भूटान में संभावित रूप से खतरनाक माना गया है।

आगे क्या होगा

अगले दिनों में भूटान में नुकसान का आकलन और लाया गांव की सड़क की मरम्मत पर नजर रहेगी। भारत में प्रशासन संकोश के जलस्तर पर नजर बनाए रखेगा, भले ही 30 अक्टूबर की शाम तक नदी खतरे के निशान से नीचे थी। झील फटने की वजह और छोड़े गए पानी की मात्रा की पुष्ट जानकारी आने पर ही इस घटना की पूरी तस्वीर साफ होगी।

Sources:

Questions people ask

शिंताफू झील कहां है और कब फटी?
शिंताफू झील भूटान के गासा जिले में वाकिला पहाड़ के नीचे है। यह 29 अक्टूबर 2026 की शाम को फटी, जिससे नीचे की ओर GLOF आया।
भारत में किन जिलों को अलर्ट पर रखा गया?
केंद्रीय जल आयोग की सलाह में पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और असम के धुबरी में नदी के स्तर में अचानक बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई थी।
कितने लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया?
अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक के अनुसार करीब 4,000 से 5,000 लोग आश्रय स्थलों में गए और 6,000 से अधिक लोग दूसरी सुरक्षित जगहों पर भेजे गए। कुल संख्या करीब 10,000 से 12,000 बनती है।
क्या किसी की मौत हुई?
30 अक्टूबर की शाम तक अधिकारियों के अनुसार सीमा के दोनों ओर किसी मौत की खबर नहीं थी, और लापता बताए गए सभी लोग सुरक्षित मिले।
क्या खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है?
30 अक्टूबर की शाम तक तत्काल खतरा टल गया था और संकोश खतरे के निशान से नीचे बह रही थी। लेकिन झील फटने की वजह, छोड़े गए पानी की मात्रा और भूटान में नुकसान का पूरा ब्योरा अब तक पुष्ट नहीं हुआ है।

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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