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आज रात 11:51 बजे GSLV-F18 से उड़ेगा NVS-03 उपग्रह

By Gagariya Editorial Desk•30 Oct 2026 IST•5 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
आज रात 11:51 बजे GSLV-F18 से उड़ेगा NVS-03 उपग्रह
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भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली को मजबूत करने वाला एक अहम प्रक्षेपण आज रात होने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने कहा है कि GSLV-F18/NVS-03 मिशन 30 अक्टूबर 2026 को रात 11:51 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC SHAR) के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा। लाइव वेबकास्ट रात 11:20 बजे से शुरू होगा।

क्या बदला है: NVS-02 की विफलता के बाद यह उड़ान क्यों खास है

इस मिशन की अहमियत सिर्फ एक और उपग्रह के प्रक्षेपण में नहीं है। यह पिछली विफलता के बाद NavIC के लिए एक सुधार की उड़ान भी है। NVS-02 को 29 जनवरी 2025 को GSLV-F15 से प्रक्षेपित किया गया था और रॉकेट ने उसे सही ट्रांसफर कक्षा में पहुंचा दिया था। लेकिन उसके बाद उपग्रह अपनी कक्षा ऊंची नहीं कर सका, क्योंकि कक्षा ऊंची करने वाले इंजन की ऑक्सीडाइजर लाइन का पायरो वाल्व खोलने का संकेत उस तक पहुंचा ही नहीं।

ISRO की समीक्षा में फरवरी 2026 में सबसे संभावित कारण कनेक्टर के मुख्य और बैकअप दोनों रास्तों में कम से कम एक संपर्क का अलग हो जाना बताया गया। यानी बैकअप होने के बावजूद संकेत वाल्व तक नहीं पहुंचा। इससे पहले नवंबर 2025 में प्रक्षेपित CMS-03 में पायरो प्रणाली से जुड़े सुधार आजमाए गए थे और वहां पायरो प्रणाली ने संतोषजनक काम किया।

NVS-03 के लिए एक अलग रास्ता अपनाया गया है। अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, NVS-03 को उसके पायरो वाल्व पहले से खुले हुए अवस्था में उड़ाया जाएगा, ताकि प्रक्षेपण के बाद वाल्व खोलने के संकेत पर निर्भरता ही न रहे। पायरो वाल्व एक बार इस्तेमाल होने वाला तंत्र है, जो खुलने के बाद दोबारा बंद नहीं किया जा सकता। इसलिए यह फैसला तकनीकी रूप से साहसिक माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद अलगाव की जिम्मेदारी नीचे की लैच वाल्व पर रहेगी। यह बदलाव पिछली विफलता से सीखा गया सबक है, लेकिन यह सफलता की गारंटी नहीं है। उपग्रह को अभी भी अपनी कक्षा ऊंची करनी होगी और अपने पेलोड को चालू करना होगा।

मिशन के आंकड़े

GSLV-F18 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 20वीं उड़ान है। रॉकेट करीब 50 मीटर ऊंचा और तीन चरणों वाला है, जिसका लिफ्ट-ऑफ भार लगभग 420 टन बताया गया है। NVS-03 का भार लगभग 2,250 किलोग्राम बताया गया है, जो ISRO के मिशन ब्रोशर का अनुमानित आंकड़ा है। कुछ रिपोर्टों में 2,232 किलोग्राम का आंकड़ा भी है, इसलिए किसी एक आंकड़े को अंतिम मानने से पहले ब्रोशर का अनुमानित आंकड़ा ही आधार है।

रॉकेट उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में पहुंचाएगा। इस लक्ष्य कक्षा का सबसे निचला बिंदु (पेरिजी) 170 किलोमीटर, सबसे ऊंचा बिंदु (अपोजी) 37,023 किलोमीटर और झुकाव 20.75 डिग्री होगा। वहां से उपग्रह को अपने इंजन से कक्षा ऊंची करके अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचना होगा।

24 घंटे की उलटी गिनती 29 अक्टूबर को रात 11:51 बजे शुरू हुई थी और प्रक्षेपण के दिन ISRO ने कहा कि उलटी गिनती आगे बढ़ रही है।

NavIC यानी Navigation with Indian Constellation भारत की क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली है। यह भारत और उसकी सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर बाहर के क्षेत्र को कवर करती है। यह प्रणाली नागरिकों, परिवहन, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े कामों में स्थिति और समय की सटीक जानकारी देती है।

इस मिशन की जरूरत का अंदाजा इस आंकड़े से लगता है। अंतरिक्ष मंत्री ने जुलाई 2026 में संसद को बताया था कि NavIC के सात नियोजित उपग्रहों में से केवल तीन ही नेविगेशन सेवा दे रहे थे, जबकि बुनियादी स्थिति निर्धारण के लिए कम से कम चार उपग्रह जरूरी हैं। NVS-03 के चालू होने के बाद यह संख्या चार हो जाएगी, यानी न्यूनतम सीमा पूरी होगी। लेकिन पूरी क्षमता से यह अभी भी तीन उपग्रह कम रहेगी।

NVS-03 दूसरी पीढ़ी की NavIC श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। ISRO ने कहा है कि दूसरी पीढ़ी के कुल पांच उपग्रहों की योजना है, ताकि मौजूदा तारामंडल को मजबूत किया जा सके और सेवाओं की निरंतरता बनी रहे। इस उपग्रह में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र में विकसित स्वदेशी रुबिडियम परमाणु घड़ी लगी है, साथ ही यह L1, L5 और S बैंड में संकेत भेजेगा।

शब्दावली: आसान भाषा में

  • NavIC: भारत की अपनी क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली, जो भारत और आसपास के करीब 1,500 किलोमीटर क्षेत्र में स्थिति बताती है।
  • GTO (जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट): वह अंडाकार कक्षा जिसमें रॉकेट उपग्रह को पहले पहुंचाता है। वहां से उपग्रह अपने इंजन से अंतिम कक्षा तक जाता है।
  • परमाणु घड़ी: बेहद सटीक समय बताने वाला उपकरण। नेविगेशन उपग्रहों के लिए सटीक समय ही सटीक स्थिति का आधार है।
  • पायरो वाल्व: विस्फोटक चार्ज से एक बार खुलने वाला वाल्व। खुलने के बाद इसे दोबारा बंद नहीं किया जा सकता।

समयरेखा

  • 29 जनवरी 2025: NVS-02 का प्रक्षेपण, ट्रांसफर कक्षा में पहुंचा लेकिन कक्षा ऊंची नहीं कर सका।
  • 2 नवंबर 2025: CMS-03 का प्रक्षेपण, जिसमें पायरो प्रणाली से जुड़े सुधार आजमाए गए और प्रणाली ने सही काम किया।
  • फरवरी 2026: ISRO की समीक्षा ने NVS-02 विफलता का सबसे संभावित कारण कनेक्टर संपर्क का अलग होना बताया।
  • 28 अक्टूबर 2026: ISRO ने GSLV-F18/NVS-03 मिशन की जानकारी प्रकाशित की।
  • 29 अक्टूबर 2026, रात 11:51 बजे: 24 घंटे की उलटी गिनती शुरू हुई।
  • 30 अक्टूबर 2026, रात 11:20 बजे: लाइव वेबकास्ट शुरू होगा।
  • 30 अक्टूबर 2026, रात 11:51 बजे: श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से प्रक्षेपण का लक्ष्य।

आगे क्या देखना होगा, यह प्रक्षेपण के बाद तय होगा। सबसे पहले यह देखना होगा कि रॉकेट उपग्रह को तय ट्रांसफर कक्षा में पहुंचाता है या नहीं। उसके बाद असली परीक्षा कक्षा ऊंची करने की होगी, वही चरण जहां NVS-02 अटक गया था। ISRO ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि NVS-03 के नेविगेशन सेवा में शामिल होने की समयसीमा क्या होगी। इसलिए प्रक्षेपण की सफलता को ही सेवा की शुरुआत नहीं माना जा सकता। कक्षा ऊंची करने और पेलोड चालू होने की पुष्टि के बाद ही यह पता चलेगा कि NavIC को अपना चौथा सक्रिय उपग्रह मिल गया है या नहीं।

स्रोत

📷 Illustration: AI-generated

Questions people ask

GSLV-F18/NVS-03 का प्रक्षेपण कब होगा?
30 अक्टूबर 2026 को रात 11:51 बजे श्रीहरिकोटा से। लाइव वेबकास्ट रात 11:20 बजे से शुरू होगा।
NVS-03 क्या है?
यह NavIC की दूसरी पीढ़ी का तीसरा नेविगेशन उपग्रह है, जिसमें स्वदेशी रुबिडियम परमाणु घड़ी लगी है।
NavIC कितने क्षेत्र को कवर करता है?
भारत और उसकी सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर बाहर तक। यह क्षेत्रीय प्रणाली है, वैश्विक नहीं।
NVS-02 के साथ क्या हुआ था?
जनवरी 2025 में वह ट्रांसफर कक्षा तक पहुंचा लेकिन पायरो वाल्व तक संकेत न पहुंचने से कक्षा ऊंची नहीं कर सका।
प्रक्षेपण के बाद क्या होगा?
उपग्रह को अपनी कक्षा ऊंची करनी होगी और पेलोड चालू करना होगा। ISRO ने सेवा में शामिल होने की तारीख अभी घोषित नहीं की है

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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