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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ठिठकी, अब छूट देना मुश्किल

By Gagariya Editorial Desk•6 Oct 2026 IST•5 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ठिठकी, अब छूट देना मुश्किल
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"व्यापार संतुलन इस समय पूरी तरह हमारे पक्ष में है," वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा। और इसी के साथ उन्होंने वह बात स्वीकार की, जिससे नई दिल्ली महीनों से बचती आ रही थी — भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत ठिठक गई है।

आईएएनएस और आउटलुक बिजनेस के अनुसार, म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि वार्ता बहुत कड़ी मेहनत और पूरी गंभीरता से हुई है। लेकिन अब दोनों पक्ष ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जहां "आगे देना या लेना बहुत, बहुत मुश्किल" होगा।

रायटर के अनुसार, यह नई दिल्ली की ओर से बातचीत के रुकने की अब तक की सबसे खुली स्वीकृति है। फरवरी 2025 से दोनों देश इस समझौते पर काम कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य आर्थिक रिश्तों को गहरा करना और बाजार पहुंच के पेचीदा मसलों को सुलझाना था।

सीतारमण ने दरवाजा बंद नहीं किया। उन्होंने साफ कहा कि वार्ता अभी जारी है। अगर दोनों में से किसी को भी थोड़ी सी गुंजाइश मिली, तो उसका इस्तेमाल किया जाएगा।

रूसी तेल बना सबसे बड़ी अड़चन

समझौते के रास्ते में सबसे बड़ा पत्थर अब रूस से तेल की खरीद है। रायटर की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उस कांग्रेस विधेयक को कानून का रूप दे दिया है, जिससे उन्हें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलता है। इन देशों में भारत और चीन का नाम खास तौर पर लिया गया है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रायटर के अनुसार, रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में गिना जाता है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण हमले के बाद पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद मास्को के लिए भारत की खरीद एक अहम सहारा बनी रही।

यहीं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ऊर्जा नीति की उलझन शुरू होती है। रायटर के विश्लेषण के मुताबिक, अगर भारत रूसी तेल की खरीद घटाता है, तो घरेलू ईंधन कीमतें बढ़ सकती हैं और सरकारी खजाने पर दबाव आएगा। वहीं, अगर खरीद जारी रखता है, तो अमेरिका — जो भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है — को होने वाले निर्यात पर गंभीर चोट लग सकती है।

भारत पहले ही चेतावनी दे चुका है कि वाशिंगटन के ये नए कदम दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

पिछले हफ्ते अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने भी उम्मीदों पर पानी फेरा था। रायटर के अनुसार, अमेरिका में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद ग्रीर ने कहा कि व्यापार समझौता फिलहाल "सन्निकट नहीं" है।

टैरिफ को हथियार बनाने की आलोचना

सीतारमण ने व्यापार घाटा कम करने के लिए टैरिफ के बढ़ते इस्तेमाल की भी तीखी आलोचना की। उन्होंने इसे टैरिफ को "हथियार" बनाने जैसा बताया और कहा कि अब ये शुल्क बातचीत के औजार की अपनी भूमिका से कहीं आगे निकल चुके हैं।

इस दौरान उन्होंने भारत के अपने व्यापार घाटे का भी जिक्र किया — चीन के साथ। रायटर के अनुसार, उन्होंने कहा, "क्या मैं चीन के साथ वही रुख नहीं अपना सकती? वहां हालात इतने एकतरफा हैं, इतने मेरे खिलाफ हैं, लेकिन नहीं — आपको बातचीत करनी पड़ती है, देना-लेना करना पड़ता है।"

नई दिल्ली के थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक और पूर्व व्यापार अधिकारी अजय श्रीवास्तव ने रायटर से कहा, "जब तक अमेरिका के साथ व्यापार समझौता पूरा नहीं हो जाता, भारत को छूटें देना बंद कर देना चाहिए।"

बातचीत अब तक: चार अहम मोड़

  1. फरवरी 2025 — भारत और अमेरिका व्यापार समझौते की कोशिश शुरू करते हैं। रायटर के अनुसार, इसका मकसद आर्थिक रिश्ते मजबूत करना और बाजार पहुंच के पेचीदा सवाल सुलझाना था।
  2. फरवरी 2026 — अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा होती है (आईएएनएस)। आउटलुक बिजनेस के अनुसार, वाशिंगटन की ओर से दी गई तरजीही टैरिफ व्यवस्था का कानूनी आधार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया, इसलिए हस्ताक्षर नहीं हो सके। दोनों पक्ष अब अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा करने पर काम कर रहे हैं।
  3. 30 सितंबर 2026 — प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात की। आउटलुक बिजनेस के अनुसार, मोदी ने एक्स पर बताया कि व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और अहम तकनीकों में सहयोग की समीक्षा हुई और व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
  4. पिछला हफ्ता — वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मिलवॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के इतर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर से मुलाकात की (आउटलुक बिजनेस)। ग्रीर ने कहा कि समझौता फिलहाल सन्निकट नहीं है।

यूरोपीय संघ के साथ डील की मिसाल

अपनी व्यापार नीति की शैली समझाने के लिए सीतारमण ने भारत-यूरोपीय संघ समझौते का हवाला दिया। आईएएनएस के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह समझौता करीब दो अरब लोगों और दुनिया की जीडीपी के लगभग एक-चौथाई हिस्से वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करेगा।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इसे "मदर ऑफ ऑल डील्स" कहा था — सीतारमण बोलीं कि यह वर्णन बिल्कुल सही है। आईएएनएस के मुताबिक, इस समझौते के तहत भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और करीब 97 प्रतिशत व्यापार मूल्य पर बाजार खोला है, जबकि यूरोपीय संघ ने करीब 99 प्रतिशत व्यापार मूल्य और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोला है।

रूसी तेल की खरीद यूरोपीय वार्ता में भी अड़चन बनेगी या नहीं — इस सवाल पर सीतारमण ने कहा कि अभी तक उन्हें "लिंडसे ग्राहम विधेयक" जैसा कोई यूरोपीय प्रावधान मालूम नहीं है, जो यूरोपीय संघ के साथ बातचीत को प्रभावित कर सके (आउटलुक बिजनेस)।

आगे क्या होगा

संख्याएं बताती हैं कि दांव कितना बड़ा है। रायटर के अनुसार, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। अप्रैल से अगस्त के बीच भारत का माल निर्यात 42.79 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले की इसी अवधि के 40.39 अरब डॉलर से ज्यादा है।

उधर, अमेरिका की ओर से भारत पर पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ लगे हुए हैं (बिजनेसलाइन मॉर्निंग रिपोर्ट)। अगर रूसी तेल पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार इस्तेमाल में आया, तो भारतीय निर्यातकों पर दोहरी मार पड़ेगी — लागत भी बढ़ेगी और अमेरिकी बाजार में भारतीय माल महंगा भी होगा।

फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी जगह अड़े हैं। सीतारमण के शब्दों में — बातचीत ठिठक गई है, लेकिन खत्म नहीं हुई। अगर कहीं गुंजाइश निकली, तो बात आगे बढ़ेगी। और अगर नहीं निकली, तो भारत यूरोपीय संघ जैसे वैकल्पिक रास्तों पर दांव लगाएगा। सबकी निगाहें अब इस बात पर हैं कि वाशिंगटन रूसी तेल पर टैरिफ के नए अधिकार का इस्तेमाल करता है या नहीं।

Questions people ask

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत क्यों ठिठक गई?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, दोनों पक्ष अपनी-अपनी छूट की सीमा तक पहुंच चुके हैं, जिससे आगे देना-लेना बहुत मुश्किल हो गया है। रायटर के अनुसार, रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ का अमेरिकी अधिकार सबसे बड़ी अड़चन है। व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है, जिसे अमेरिका कम करना चाहता है।
रूसी तेल पर 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव क्या है?
रायटर के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कांग्रेस विधेयक को कानून बनाया है, जिससे उन्हें रूसी तेल खरीदने वाले देशों — भारत और चीन सहित — पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, इसलिए यह प्रस्ताव भारत की ऊर्जा नीति के लिए दोहरी चुनौती बन गया है।
क्या भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पूरी तरह खत्म हो गया है?
नहीं। सीतारमण ने साफ कहा है कि वार्ता जारी है और अगर किसी भी पक्ष को थोड़ी सी गुंजाइश मिली, तो उसका इस्तेमाल किया जाएगा। फरवरी 2026 में अंतरिम समझौते के ढांचे की घोषणा हुई थी। हालांकि, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ग्रीर ने कहा है कि समझौता फिलहाल सन्निकट नहीं है।
भारतीय निर्यातकों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है — अप्रैल से अगस्त के बीच निर्यात 42.79 अरब डॉलर रहा (रायटर)। भारत पर पहले से 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगे हैं (बिजनेसलाइन)। अगर रूसी तेल पर अतिरिक्त टैरिफ लगा, तो निर्यातकों की लागत बढ़ेगी और अमेरिकी बाजार में भारतीय माल और महंगा होगा।

Sources

  1. Reuters (northlandnewsradio.com)
  2. Outlook Business (outlookbusiness.com)
  3. IANS via The Freedom Press (thefreedompress.in)
  4. BusinessLine (thehindubusinessline.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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