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अमेरिका ने TCS-इन्फोसिस समेत 8 कंपनियों पर ग्रीन कार्ड रोक

By Gagariya Editorial Desk•9 Oct 2026 IST•5 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
अमेरिका ने TCS-इन्फोसिस समेत 8 कंपनियों पर ग्रीन कार्ड रोक
Photo: Own or licensed by the publisher

वॉशिंगटन, 8 अक्टूबर। व्हाइट हाउस परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने जिस पल अपने फैसले की घोषणा की, अमेरिका में काम कर रहे लाखों भारतीय पेशेवरों से जुड़ी बड़ी खबर बन गई। ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोब और छह बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों को ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित कर दिया।

रोक के दायरे में चार भारतीय IT दिग्गज हैं: इन्फोसिस, टाटा (TCS), विप्रो और HCL। इनके अलावा कॉग्निजेंट, फ्रांस की कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब भी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग अब इन कंपनियों के नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं करेगा, और पहले से लंबित आवेदन भी आगे नहीं बढ़ेंगे।

वांस ने माइक्रोसॉफ्ट को क्यों बनाया निशाना

वांस ने माइक्रोसॉफ्ट का नाम लेते हुए कहा, "दुर्भाग्य से अमेरिका में ऐसी कोई कंपनी नहीं, जिसने इस व्यवस्था का इससे ज़्यादा दुरुपयोग किया हो।" उनका आरोप: कंपनी ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, यह कहते हुए कि योग्य अमेरिकी कर्मचारी मिल ही नहीं रहे। फिर उसी कंपनी को 6,000 से ज़्यादा H-1B वीज़ा मिले, और 3,682 PERM आवेदन दाखिल किए गए। इनमें लगभग 1,000 आवेदन उन्हीं पदों के लिए थे, जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया गया था।

श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने कहा, "मैं इन कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर रहा हूं।" उनके मुताबिक 2009 से अब तक इन कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए, जिन पर 2.3 लाख से ज़्यादा H-1B मंज़ूरी और एक लाख से ज़्यादा PERM प्रमाणन जारी हुए।

आउटलुक बिज़नेस की रिपोर्ट के अनुसार, वांस ने यह भी दावा किया कि H-1B कर्मचारियों को समान पद पर अमेरिकियों से 20,000 डॉलर कम वेतन मिलता है, और विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के कर्मचारियों को 48,000 डॉलर कम। ध्यान रहे, ये प्रशासन के दावे हैं, स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े नहीं।

PERM क्या है, और H-1B से इसका फर्क

H-1B अस्थायी कार्य वीज़ा है। PERM उससे अलग चीज़ है, रोज़गार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का पहला बड़ा चरण। इसमें कंपनी को अमेरिकी श्रम विभाग के सामने साबित करना होता है कि उस पद के लिए कोई योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला। PERM मंज़ूर होने के बाद ही नियोक्ता किसी कर्मचारी को स्थायी निवास के लिए प्रायोजित कर सकता है।

सबसे अहम बात: PERM पर रोक H-1B पर रोक नहीं है। मौजूदा H-1B वीज़ा रद्द नहीं होंगे, और कंपनियों के H-1B याचिकाओं पर कोई कंबल प्रतिबंध नहीं लगा है। असर उन कर्मचारियों पर है, जिनका ग्रीन कार्ड का सफ़र PERM के चरण में था।

क्या बदला क्या नहीं बदला
आठ कंपनियों के नए और लंबित PERM आवेदनों पर रोक मौजूदा H-1B वीज़ाधारकों की कानूनी स्थिति
माइक्रोसॉफ्ट और एडोब पर चल रही संघीय जांचों के चलते अलग रोक H-1B पेटीशन पर कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं
हार्वर्ड, येल समेत नौ अमेरिकी यूनिवर्सिटी J-1 वीज़ा जांच के घेरे में ग्रीन कार्ड की पूरी प्रक्रिया का अंत नहीं, एक चरण पर रोक
विदेशी कर्मचारियों को तरजीह देने के आरोपों की न्याय विभाग की जांच कंपनियों का अमेरिका में कारोबार जारी

भारतीय IT के लिए इसका क्या मतलब है

अमेरिका भारतीय IT उद्योग का सबसे बड़ा बाज़ार है, और PTI की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय IT उद्योग करीब 300 अरब डॉलर का है। घोषणा के बाद अमेरिकी कारोबार में गुरुवार को इन्फोसिस और विप्रो के ADR करीब 3 प्रतिशत गिर गए। ET Now की रिपोर्ट के अनुसार इन्फोसिस के शेयर छह साल के निचले स्तर के करीब पहुंच गए।

H-1B के आंकड़े बताते हैं कि इस कार्यक्रम से सबसे ज़्यादा जुड़े पेशेवर भारतीय ही हैं। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के हवाले से ET Now ने बताया कि सबसे ज़्यादा H-1B लाभार्थी अमेज़न के हैं (9,337)। दूसरे नंबर पर TCS (4,450) और तीसरे पर इन्फोसिस (4,113) है। वित्त वर्ष 2025 में कुल 4,06,348 H-1B याचिकाएं मंज़ूर हुईं, जिनमें से 2,83,772 लाभार्थी भारत में पैदा हुए थे, यानी करीब 70 प्रतिशत।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार कॉग्निजेंट के PERM आवेदनों पर सितंबर में ही रोक लग चुकी थी, और गुरुवार का फैसला उसी दबाव का विस्तार है।

नैसकॉम ने वॉशिंगटन को क्या जवाब दिया

भारतीय IT उद्योग के निकाय नैसकॉम ने गुरुवार को कहा कि आप्रवासन और कुशल प्रतिभाओं की आवाजाही "दो अलग मुद्दे" हैं, जिन्हें एक ही नज़र से नहीं देखा जाना चाहिए। बयान में कहा गया कि अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले से आप्रवासन का एक खास रास्ता प्रभावित होता है।

नैसकॉम के अनुसार भारतीय IT कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में H-1B वीज़ा पर निर्भरता घटाई है और अमेरिका में स्थानीय भर्ती बढ़ाई है। इसलिए PERM प्रक्रिया के ज़रिए H-1B से स्थायी निवास की ओर जाने वाले कर्मचारियों की संख्या "तुलनात्मक रूप से सीमित" है। निकाय ने यह भी कहा कि ये कंपनियां अमेरिका के अधिकतर फॉर्च्यून 500 समूहों के साथ काम करती हैं और 80 से ज़्यादा देशों में स्थानीय कानूनों का पालन करती आई हैं।

यूनिवर्सिटी भी जांच के घेरे में

रोक कंपनियों तक नहीं रुकी। अमेरिकी श्रम महानिरीक्षक एंथनी डी'एस्पोज़िटो ने हार्वर्ड, येल, स्टैनफोर्ड, ब्राउन, पिट्सबर्ग, कैलिफोर्निया डेविस, कैलटेक, एरिज़ोना स्टेट और MIT समेत नौ बड़ी यूनिवर्सिटी में J-1 वीज़ा धोखाधड़ी की "ऐतिहासिक जांच" की घोषणा की है। आउटलुक बिज़नेस के अनुसार इन जांचों के लिए समन भी जारी किए जा चुके हैं।

अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंश ने अलग से कहा कि न्याय विभाग उन कंपनियों की जांच कर रहा है, जिन पर विदेशी कर्मचारियों को अमेरिकियों पर तरजीह देने का आरोप है। संदेश साफ है: वॉशिंगटन अब सिर्फ़ एक वीज़ा श्रेणी नहीं, भर्ती और प्रायोजन की पूरी व्यवस्था को जांच रहा है।

आगे क्या

टाइम्स नाउ के अनुसार माइक्रोसॉफ्ट ने इस घोषणा पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। नैसकॉम ने रोक को "अस्थायी निलंबन" कहा है, पर अमेरिकी प्रशासन ने इसे और बढ़ाने की गुंजाइश खुली रखी है। वांस ने कहा है कि सरकार चाहती है कि कंपनियां अमेरिका में विस्तार करें, पर अमेरिकी कर्मचारियों को ज़्यादा नियुक्त करें।

अगले कुछ हफ़्तों में दो चीज़ों पर नज़र रहेगी: क्या रोक का दायरा और कंपनियों तक बढ़ता है, और न्याय विभाग की जांच से क्या नतीजे निकलते हैं। भारत में बैठे हज़ारों IT पेशेवरों के लिए, जिनका ग्रीन कार्ड का सपना PERM के दरवाज़े से गुज़रता था, वह दरवाज़ा फ़िलहाल बंद है।

Questions people ask

क्या मौजूदा H-1B वीज़ा रद्द हो जाएंगे?
नहीं। रोक सिर्फ़ PERM चरण पर है, जो रोज़गार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का हिस्सा है। H-1B अस्थायी कार्य वीज़ा है, और प्रशासन ने इसे रद्द करने की घोषणा नहीं की है। असर उन कर्मचारियों पर होगा, जिनके ग्रीन कार्ड के PERM आवेदन नए हैं या अभी लंबित हैं, क्योंकि वे आगे नहीं बढ़ेंगे।
PERM प्रक्रिया आखिर होती क्या है?
Permanent Labour Certification में नियोक्ता अमेरिकी श्रम विभाग को यह साबित करता है कि उस पद के लिए कोई योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला। मंज़ूरी के बाद ही वह किसी कर्मचारी को रोज़गार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए प्रायोजित कर सकता है। अब आठ कंपनियां यह चरण आगे नहीं बढ़ा सकेंगी।
इस रोक के दायरे में कौन-कौन सी कंपनियां हैं?
माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा (TCS), विप्रो, HCL और कैपजेमिनी। श्रम सचिव ने छह आउटसोर्सिंग कंपनियों के नाम लिए, जबकि माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को चल रही संघीय जांचों के कारण अलग से निलंबित किया गया। अटॉर्नी जनरल भी संबंधित आरोपों की जांच कर रहे हैं।
भारतीय कर्मचारियों पर इसका कितना असर पड़ेगा?
नैसकॉम के अनुसार PERM से स्थायी निवास की ओर जाने वाले कर्मचारियों की संख्या सीमित है, क्योंकि भारतीय कंपनियों ने H-1B पर निर्भरता घटाई है। फिर भी असर उन पेशेवरों पर होगा, जिनके ग्रीन कार्ड आवेदन बीच प्रक्रिया में हैं। वित्त वर्ष 2025 में 70 प्रतिशत H-1B लाभार्थी भारत में पैदा हुए थे।

Sources

  1. DT Next — Cognizant, Infosys, Tata, Wipro & HCL among IT firms suspended from US green card programme (dtnext.in)
  2. ET Now — US H1B Visa, Green Card News LIVE: TCS, Infosys among top Indian IT firms (etnownews.com)
  3. Times Now — 'Hire American Workers': JD Vance Hits Microsoft, Adobe, Infosys, TCS, Wipro With US Suspensions (timesnownews.com)
  4. Outlook Business — Infosys, Tata, Wipro, Microsoft, Adobe Suspended From US PERM Programme Over Visa Fraud Claims (outlookbusiness.com)
  5. PTI via ABP Live — Immigration, skilled talent mobility distinct: Nasscom as US suspends IT firms from green card prog (news.abplive.com)
  6. IANS — Employees transitioning from H-1B to permanent residency via PERM relatively limited: Nasscom (ianslive.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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