8वां वेतन आयोग: 2.92 fitment factor, ₹52,000 की मांग

भारतीय रेल के तकनीकी कर्मचारियों के संगठन ने 8वें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ी मांग रखी है: न्यूनतम वेतन ₹52,000 तक बढ़ाने और fitment factor को लेवल के हिसाब से 2.92 से 4.38 तक ग्रेडेड करने की। यह 7वें आयोग के एक-समान 2.57 factor वाले पुराने फॉर्मूले से बिल्कुल अलग रास्ता है।
संगठन का नाम है IRTSA, यानी Indian Railways Technical Supervisors' Association। उसने आयोग को दिए अपने memorandum में तर्क दिया है कि एक ही multiplier से हर लेवल के काम, जिम्मेदारी और जोखिम का अंतर नहीं झलकता, इसलिए fitment factor पद के लेवल के हिसाब से तय हो।
IRTSA की मांग: नंबर दर नंबर
मांग में factor के पांच स्लैब तय किए गए हैं। लेवल जितना ऊंचा, factor उतना बड़ा:
- लेवल 1 से 5: 2.92
- लेवल 6 से 8: 3.50
- लेवल 9 से 12: 3.80
- लेवल 13 से 16: 4.09
- लेवल 17 और 18: 4.38
साथ में सालाना increment 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने की मांग है। न्यूनतम वेतन का हिसाब Aykroyd formula से करने, परिवार की consumption units 3 की जगह 4.6 मानने और बोतलबंद पानी, internet व health insurance premium जैसी मदों को गिनती में शामिल करने की बात भी memorandum में कही गई है। MACP के तहत 30 साल में पांच वित्तीय अपग्रेडेशन, Junior Engineer और Senior Section Engineer की training period को MACP में गिनने, शहरों की आबादी के हिसाब से HRA के चार स्तर और DA को tax-free करने जैसी मांगें भी सूची में हैं। संगठन ने आयोग के सामने हैदराबाद में 19 मई 2026 को हुए संवाद में pay parity, प्रमोशन के अवसरों और safety से जुड़े काम करने वाले कर्मचारियों के मुआवजे के मुद्दे भी उठाए थे।
fitment factor समझें
यह वह गुणज है जिससे मौजूदा basic pay को गुणा करके नई basic pay तय होती है। 7वें आयोग ने सभी लेवल पर एक जैसा 2.57 factor लगाया था, 6वें आयोग का ₹7,000 न्यूनतम वेतन इसी से बढ़कर ₹18,000 हुआ था। IRTSA इसी एक-समान फॉर्मूले को बदलना चाहता है: entry-level पर 2.92 से शुरुआत हो और लेवल चढ़ने के साथ factor भी चढ़े। संगठन का तर्क है कि technical और safety वाले पदों पर जिम्मेदारी ज्यादा होती है, इसलिए वहां factor और बड़ा होना चाहिए।
7वां बनाम प्रस्ताव: तालिका
पिछले आयोग और नई मांग के बीच फर्क एक नजर में:
| बिंदु | 7वां वेतन आयोग (2016 से) | IRTSA की मांग | | fitment factor | सभी लेवल पर 2.57 | लेवल के हिसाब से 2.92 से 4.38 | | न्यूनतम वेतन | ₹18,000 | ₹52,000 (गणना से ₹52,600) | | सालाना increment | 3% | 5% | | minimum pay की इकाइयां | परिवार की consumption units 3 | 4.6 | | प्रभाव की तारीख | 1 जनवरी 2016 | 1 जनवरी 2026 से उम्मीद; अंतिम तारीख सरकार तय करेगी |
मांग का गणित: तीन उदाहरण
gagariya ने मांग के factor को 7वें आयोग की मौजूदा entry-level basic पर लगाकर हिसाब दिखाया है। ये आधिकारिक आंकड़े नहीं, मांग का गणित है:
- लेवल 1: ₹18,000 × 2.92 = ₹52,560 — यही वह आंकड़ा है जिससे ₹52,000 से ₹52,600 की मांग बनी है।
- लेवल 6: ₹35,400 × 3.50 = ₹1,23,900
- लेवल 13: ₹1,23,100 × 4.09 = ₹5,03,479
फर्क साफ है — लेवल जितना ऊंचा, factor की बढ़त उतनी तेज़। लेकिन दोहरा दें: आयोग ने अभी कोई factor तय या घोषित नहीं किया है, ये सिर्फ कर्मचारी संगठन की मांग है।
फायदा पाने वालों का दायरा
वित्त राज्य मंत्री ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया है कि 8वें वेतन आयोग से 50.14 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनरों को फायदा पहुंचेगा। कुछ मीडिया राउंड-अप में पेंशनरों की संख्या 65 लाख बताई गई है। सरकारी आंकड़े और मीडिया अनुमानों में यही अंतर है। दायरा सिर्फ रेलवे तक सीमित नहीं है — सभी मंत्रालयों के केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर इसके दायरे में आते हैं।
राज्य सरकार के कर्मचारी सीधे दायरे में नहीं आते। कैबिनेट रिलीज़ में कहा गया है कि राज्य सरकारें आमतौर पर सिफारिशों को कुछ बदलाव के साथ अपनाती हैं। यानी राज्यों का फैसला अलग से, अपने बजट के हिसाब से होगा।
आयोग की मौजूदा स्थिति
कैबिनेट रिलीज़ और आयोग की मौजूदा गतिविधियों से बनी टाइमलाइन:
- जनवरी 2025 — आयोग के गठन की घोषणा हुई।
- 28 अक्टूबर 2025 — कैबिनेट ने आयोग के Terms of Reference मंजूर किए।
- नवंबर 2025 — आयोग का औपचारिक गठन; अध्यक्ष बने न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, सदस्य (पार्ट-टाइम) प्रो. पुलक घोष और सदस्य-सचिव पंकज जैन।
- 19 मई 2026 — हैदराबाद में IRTSA ने आयोग के सामने अपना memorandum रखा।
- 2026 — आयोग शहरों में कर्मचारी संगठनों से बातचीत कर रहा है; मुंबई में भी बैठकें तय हैं।
- मई 2027 के आसपास — गठन के 18 महीने के भीतर आयोग को रिपोर्ट सौंपनी है।
रिलीज़ के मुताबिक आयोग आमतौर पर हर दस साल में बनता है और सिफारिशों का प्रभाव 1 जनवरी 2026 से माना जा सकता है। लेकिन वित्त राज्य मंत्री ने लोकसभा में साफ कहा है कि लागू करने की तारीख सरकार तय करेगी।
अभी अनसुलझे बिंदु
इन बिंदुओं पर अलग-अलग आंकड़े और बयान सामने आए हैं, किसी एक को सच मानने से पहले आयोग की रिपोर्ट और सरकार का फैसला देखना होगा:
- न्यूनतम वेतन: ₹52,000 बनाम ₹52,600 — संगठन की गणना ₹18,000 × 2.92 = ₹52,560 पर बनती है।
- पेंशनरों की संख्या: 69 लाख (सरकारी जवाब) बनाम 65 लाख (मीडिया राउंड-अप)।
- लागू होने की तारीख: 1 जनवरी 2026 से प्रभाव की उम्मीद बनाम "तारीख सरकार तय करेगी"।
- fitment factor: कोई भी factor आयोग ने तय या घोषित नहीं किया है।
न्यूनतम वेतन पर संगठनों के बीच भी एकराय नहीं है — NC-JCM और AIDEF ₹69,000 मांग रहे हैं, महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन संगठन ने ₹65,000 की मांग रखी है, जबकि Railway Senior Citizens Welfare Society ने कोई आंकड़ा दिए बिना जनवरी 2026 के price index के आधार पर वैज्ञानिक गणना की मांग की है।
अगले कदम और तारीखें
आयोग फिलहाल हितधारकों के memorandum और शहरों में बैठकें पूरी कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद सिफारिशों पर कैबिनेट फैसला लेगी, और उसी के बाद तय होगा कि fitment factor क्या होगा, न्यूनतम वेतन कहां रुकेगा और नई सैलरी कब से लागू होगी। तारीखें पक्की होने तक कर्मचारियों के लिए सबसे सुरक्षित अनुमान वही है जो रिलीज़ कहती है — प्रभाव 1 जनवरी 2026 से, लागू की तारीख सरकार के फैसले के बाद।
यह खबर केवल जानकारी के लिए है, वित्तीय सलाह नहीं।
📷 Illustration: AI-generated
Questions people ask
- 8वें वेतन आयोग का fitment factor तय हो गया है क्या?
- नहीं। आयोग ने अभी कोई fitment factor घोषित नहीं किया है। 2.92 से 4.38 तक का ग्रेडेड factor सिर्फ IRTSA की मांग है, सिफारिश या फैसला नहीं।
- न्यूनतम वेतन ₹52,000 होगा या ₹52,600?
- दोनों आंकड़े अलग-अलग रिपोर्टों में आए हैं; आधिकारिक फैसला आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अनुमोदन के बाद ही होगा। संगठन की गणना ₹18,000 × 2.92 = ₹52,560 पर बनती है, जिसे सैकड़े पर पूर्णांक कर ₹52,600 लिखा गया है।
- नई सैलरी कब से लागू होगी?
- कैबिनेट रिलीज़ के मुताबिक 1 जनवरी 2026 से प्रभाव की उम्मीद जताई गई है, लेकिन वित्त राज्य मंत्री ने लोकसभा में कहा है कि लागू करने की तारीख सरकार तय करेगी।
- क्या राज्य सरकार के कर्मचारी भी इस दायरे में आएंगे?
- सीधे नहीं। रिलीज़ में कहा गया है कि राज्य सरकारें आमतौर पर सिफारिशों को कुछ बदलाव के साथ अपनाती हैं, इसलिए राज्य कर्मचारियों के लिए अलग फैसला होगा।
- आयोग की रिपोर्ट कब तक आएगी?
- गठन के 18 महीने के भीतर, यानी मई 2027 के आसपास। आयोग चाहे तो बीच में अंतरिम रिपोर्ट भी भेज सकता है।
Sources
- कैबिनेट रिलीज़: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference (PIB, 28 अक्टूबर 2025) (pib.gov.in)
- IRTSA की मांग: 2.92 से 4.38 fitment factor की वजह (Upstox, अक्टूबर 2026) (upstox.com)
- कर्मचारी संगठनों की मांगें: DA मर्जर और न्यूनतम वेतन (Latestly) (latestly.com)
- IRTSA का ₹52,000 न्यूनतम वेतन का प्रस्ताव (Latestly, मई 2026) (latestly.com)
- हैदराबाद में IRTSA का memorandum (Dainik News Live, जून 2026) (dainiknewslive.in)
- 50.14 लाख कर्मचारी, 69 लाख पेंशनर: वित्त राज्य मंत्री का लोकसभा में जवाब (APAC News Network) (apacnewsnetwork.com)
Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.
This story is informational only and is not financial advice. Decisions about money belong with a registered adviser — the sources above are a good place to start reading.
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