gagariya.

Orionid meteor shower: 21-22 अक्टूबर की रात भारत में दिखेगी उल्कावर्षा, सबसे अच्छा समय सुबह 3:30 से 5:15

By Gagariya Editorial Desk•20 Oct 2026 IST•4 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
Orionid meteor shower: 21-22 अक्टूबर की रात भारत में दिखेगी उल्कावर्षा, सबसे अच्छा समय सुबह 3:30 से 5:15
Photo: Own or licensed by the publisher

21-22 अक्टूबर की रात आसमान में साल की सबसे तेज़ उल्कावर्षाओं में से एक — Orionids — अपने पीक पर होगी। भारत में सबसे अच्छा नज़ारा 22 अक्टूबर की सुबह मिलेगा: चांद डूबने के बाद, लगभग 3:30 से 5:15 बजे तक। साफ और अंधेरे आसमान में हर घंटे 10 से 20 उल्कापिंड दिख सकते हैं। अच्छी खबर: टेलिस्कोप या दूरबीन की कोई जरूरत नहीं — नंगी आंखों से ही दिखेगा।

सबसे अच्छा समय — चांद डूबने के बाद का घंटा

इस साल की सबसे बड़ी बाधा चांद है। पीक की रात आसमान में चमकता हुआ gibbous चांद रहेगा, जो हल्के उल्कापिंडों को धो देगा — digit.in और educationtimes (Times of India) दोनों यही चेतावनी देते हैं।

लेकिन उम्मीद बाकी है। चांद सुबह करीब 3 बजे डूब जाएगा, trends.glance.com के अनुसार — और उसके बाद भोर तक आसमान अंधेरा रहेगा। educationtimes के अनुसार भारत में यह सुनहरा समय लगभग सुबह 3:30 से 5:15 बजे तक है। (स्रोतों में मामूली अंतर है: कुछ 3 बजे से भोर तक कहते हैं, educationtimes 3:30-5:15 का सटीक window देता है।)

Orionids देर रात की उल्कावर्षा है — radiant (वह बिंदु जहां से उल्कापिंड निकलते लगते हैं) रात 10-11 बजे के आसपास क्षितिज से ऊपर उठता है, educationtimes के अनुसार, और रात बढ़ने के साथ ऊंचा चढ़ता जाता है। इसलिए आधी रात के बाद हालात बेहतर होते जाते हैं।

भारत में देखने का सही तरीका

educationtimes और digit.in (NASA के हवाले से) की सलाह:

  • अंधेरी, खुली जगह चुनें: शहर की कृत्रिम रोशनी हल्के उल्कापिंडों को छिपा देती है। गांव या कस्बे के बाहर की जगह सबसे अच्छी; शहर में हैं तो ऊंची इमारत की छत काम चलाएगी।
  • टेलिस्कोप न लें: उल्कापिंड आसमान में कहीं भी चमक सकते हैं — नंगी आंखों से ज्यादा आसमान दिखता है।
  • चांद डूबने से पहले: पूरब या उत्तर-पूरब की ओर मुंह करके देखें, चांद पीठ के पीछे रहे।
  • चांद डूबने के बाद: सीधे ऊपर और पूरब की ओर देखें — जितना खुला आसमान, उतना बेहतर।
  • सिर्फ radiant को न घूरें: उल्कापिंड कहीं भी दिख सकते हैं; radiant के आसपास देखने से लंबी पूंछ वाले उल्कापिंड छूट सकते हैं।
  • लेटकर देखें: NASA की सलाह (digit.in के हवाले से): उत्तरी गोलार्ध में पैर दक्षिण-पूरब की ओर करके चित लेट जाएं — गर्दन नहीं दुखेगी।

Radiant को खोजना हो तो: वह Orion (मृग/शिकारी तारामंडल) के ऊपरी हिस्से में है — लाल तारे Betelgeuse के पास, Gemini की सीमा के करीब। Orion को उसकी तीन चमकीली belt वाली तारों से पहचानें, फिर ऊपर की ओर Betelgeuse देखें — educationtimes के अनुसार।

उल्कावर्षा होती क्या है — 30 सेकंड में

धूमकेतु सूरज के पास से गुजरते हुए कण और मलबा छोड़ जाते हैं। जब धरती अपनी कक्षा में उस मलबे के बादल से गुजरती है, तो कण वायुमंडल में 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ़्तार से टकराते हैं (NASA के हवाले से digit.in) — और जलकर चमकीली लकीरें बनाते हैं। यही उल्कापिंड है।

Orionids के कण उसी धूमकेतु के छोड़े हुए हैं जो 2061 में ही हमारे आसमान में दोबारा दिखेगा, trends.glance.com के अनुसार। digit.in के अनुसार ये उल्कापिंड अपनी रफ़्तार और चमक के लिए जाने जाते हैं — कुछ तो fireball बनकर कुछ सेकंड तक रोशनी का विस्फोट करते हैं, और कुछ के पीछे चमकती पूंछ कुछ सेकंड तक टिकी रहती है।

कितने उल्कापिंड दिखेंगे — उम्मीद और हकीकत

NASA के अनुसार साफ, अंधेरे आसमान में हर घंटे 10 से 20 उल्कापिंड दिख सकते हैं (digit.in और thelivingdraft के हवाले से)। लेकिन यह गारंटी नहीं — thelivingdraft साफ कहता है कि यह पक्की गिनती नहीं है।

गिनती घटाने वाले कारक:

  • चांद की रोशनी — इस साल की सबसे बड़ी बाधा (ऊपर बताया)
  • शहर की रोशनी — कृत्रिम रोशनी हल्के उल्कापिंड छिपा देती है
  • बादल — एक बादल वाली रात सब बराबर कर देती है

अच्छी खबर: पीक की रात के बाद भी उल्कावर्षा 7 नवंबर तक सक्रिय रहती है (thelivingdraft, NASA के हवाले से) — तो 22 की सुबह बादल हों, तो अगले 2-3 दिन भी कोशिश कर सकते हैं, हालांकि दर घटती जाएगी।

काम की बातें — एक नज़र में

  • पीक नाइट: 21-22 अक्टूबर 2026 (NASA)।
  • भारत में सबसे अच्छा समय: 22 अक्टूबर सुबह लगभग 3:30 से 5:15 बजे — चांद डूबने के बाद।
  • दर: अंधेरे आसमान में हर घंटे 10-20 उल्कापिंड (गारंटी नहीं)।
  • रफ़्तार: 66 km/second — इसलिए लकीरें तेज़ और चमकीली।
  • उपकरण: कोई नहीं — नंगी आंखें, खुली जगह, और 15-20 मिनट आंखों को अंधेरे की आदत डालने दें।
  • बाधा: चमकता चांद और शहर की रोशनी; चांद ~3 बजे डूबेगा।

Questions people ask

Orionid meteor shower 2026 की पीक नाइट कब है?
21-22 अक्टूबर 2026। NASA के अनुसार यही वह रात है जब सबसे ज्यादा उल्कापिंड दिखने की उम्मीद है। उल्कावर्षा 2 अक्टूबर से 7 नवंबर तक सक्रिय रहती है (thelivingdraft, NASA के हवाले से)।
भारत में देखने का सही समय क्या है?
22 अक्टूबर की सुबह लगभग 3:30 से 5:15 बजे तक, educationtimes (Times of India) के अनुसार। चांद सुबह करीब 3 बजे डूबता है (trends.glance.com), और उसके बाद भोर तक का अंधेरा सबसे अच्छा समय है।
क्या बिना टेलिस्कोप उल्कावर्षा देखी जा सकती है?
हां — टेलिस्कोप की जरूरत ही नहीं है। उल्कापिंड आसमान में कहीं भी चमक सकते हैं, इसलिए नंगी आंखों से देखना बेहतर है। बस अंधेरी, खुली जगह चाहिए।
चांद की रोशनी से क्या फर्क पड़ता है?
बड़ा फर्क। पीक की रात चमकता gibbous चांद रहेगा, जो हल्के उल्कापिंडों को धो देगा (digit.in, educationtimes)। चांद डूबने के बाद ही असली मौका है।
Radiant कहां है — किस दिशा में देखें?
Radiant Orion तारामंडल के ऊपरी हिस्से में है — लाल तारे Betelgeuse के पास, Gemini की सीमा के करीब। पहले यह पूरब/उत्तर-पूरब में रहेगा, बाद में ऊपर और पूरब की ओर (educationtimes)।
कितने उल्कापिंड दिखेंगे?
NASA के अनुसार अंधेरे आसमान में हर घंटे 10-20 (digit.in)। लेकिन चांद, शहर की रोशनी और बादल यह गिनती घटा देते हैं — thelivingdraft स्पष्ट करता है कि यह गारंटी नहीं है।

Sources

  1. Digit.in: Orionid meteor shower 2026 set to peak this week (digit.in)
  2. Education Times (Times of India): Orionid meteor shower 2026 peaks on October 21-22 (educationtimes.com)
  3. trends.glance.com: When to see Orionid meteor shower in India (trends.glance.com)
  4. thelivingdraft.com: Orionid Meteor Shower 2026: Date, Time and India Visibility (thelivingdraft.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

Keep reading

The day’s verified stories, one email, 7 am IST. No noise.