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8वां वेतन आयोग: एक साल बाद क्या तय हुआ, क्या नहीं

By Gagariya Editorial Desk•28 Oct 2026 IST•6 min read•Human Reviewed & Fact-Checked

केंद्रीय कैबिनेट ने 8th Pay Commission के Terms of Reference, यानी ToR, को 28 October 2025 को मंज़ूरी दी थी, यानी आज से ठीक एक साल पहले। उसके कुछ दिन बाद, 3 November 2025 को, वित्त मंत्रालय के Department of Expenditure ने रेज़ोल्यूशन जारी करके आयोग का गठन किया। आयोग की अध्यक्ष रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज Justice Ranjana Prakash Desai हैं, पार्ट-टाइम सदस्य Professor Pulak Ghosh हैं, और सदस्य-सचिव Pankaj Jain हैं। आयोग का काम केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनरों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़ी सिफ़ारिशें तैयार करना है।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि अभी तक कुछ तय नहीं हुआ है। वित्त मंत्रालय ने 10 August 2026 को Lok Sabha में लिखित जवाब में कहा था कि आयोग ने अभी तक अपनी सिफ़ारिशें सरकार को नहीं सौंपी हैं। उस जवाब में न कोई इम्प्लीमेंटेशन डेट तय की गई थी और न कोई फ़िटमेंट फ़ैक्टर। आयोग को गठन की तारीख़ से 18 महीने के अंदर रिपोर्ट देनी है, इसलिए रिपोर्ट की आख़िरी सीमा May 2027 के आसपास बनती है। October 2025 में Press Information Bureau ने कहा था कि नए वेतन का असर नॉर्मली 1 January 2026 से एक्सपेक्टेड है। यह दस साल के पैटर्न पर आधारित एक एक्सपेक्टेशन थी, कोई फ़ैसला नहीं। सरकार ने अभी तक इम्प्लीमेंटेशन डेट फ़िक्स नहीं की है, इसलिए एरियर्स या लागू होने की तारीख़ पर कोई पक्का दावा करना सही नहीं होगा।

आयोग अभी कंसल्टेशन के दौर में है। उसने देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी संघों और पेंशनर संगठनों से बात की है। बेंगलुरु में 7 और 8 October 2026 को बैठक हुई, और उसके बाद मुंबई में 22 और 23 October 2026 को कंसल्टेशन हुआ। मुंबई दौरे के बाद आयोग के गठन को एक साल पूरा होने में सिर्फ़ कुछ दिन बचे हैं, लेकिन रिपोर्ट आने में अभी भी करीब छह महीने का वक़्त है। कंसल्टेशन का मतलब यह नहीं है कि माँगें मान ली गई हैं। कंसल्टेशन में संघ अपनी माँगें रखते हैं, आयोग उन पर विचार करता है, फिर रिपोर्ट बनती है, और उसके बाद सरकार तय करती है कि कौनसी सिफ़ारिश मंज़ूर होगी और कब लागू होगी।

7th Commission से क्या बदला

7th Pay Commission ने 2.57 का फ़्लैट फ़िटमेंट फ़ैक्टर दिया था, यानी हर लेवल पर एक ही मल्टिप्लायर लगा था। 8th Commission के लिए अभी तक माँगें इस पैटर्न से अलग हैं। National Council-Joint Consultative Machinery, यानी NC-JCM, के स्टाफ़ साइड ने मिनिमम बेसिक पे ₹69,000 और फ़िटमेंट फ़ैक्टर 3.833 की माँग रखी है। उनका तर्क यह है कि 7th Commission का मिनिमम ₹18,000 था, और ₹18,000 को 3.833 से गुणा करने पर करीब ₹69,000 बनता है। भारतीय प्रतिरक्षा मज़दूर संघ, यानी BPMS, ने मिनिमम बेसिक पे ₹72,000 और फ़िटमेंट फ़ैक्टर 4 की माँग रखी है। दोनों संघों ने एनुअल इंक्रीमेंट भी 3 percent से बढ़ाकर 6 percent करने की माँग की है। यह सब माँगें हैं, फ़ैसले नहीं।

रेलवे टेक्निकल सुपरवाइज़रों के संघ IRTSA ने इससे भी अलग तरीक़ा सुझाया है। IRTSA ने मिनिमम बेसिक पे ₹52,600 की माँग रखी है, जो उसके हिसाब से 7th Commission के मिनिमम का 2.92 गुणा है। लेकिन उसका असली सुझाव ग्रेडेड फ़िटमेंट फ़ैक्टर का है। Levels 1 से 5 के लिए 2.92, Levels 6 से 8 के लिए 3.50, Levels 9 से 12 के लिए 3.80, Levels 13 से 16 के लिए 4.09, और Levels 17 और 18 के लिए 4.38। IRTSA का तर्क है कि एक ही मल्टिप्लायर जूनियर और सीनियर कर्मचारियों के बीच ज़िम्मेदारी के फ़र्क़ को नहीं दिखाता। मीडिया में 1.83 से 2.86 गुणा तक के प्रोजेक्शन भी घूम रहे हैं, लेकिन यह प्रोजेक्शन हैं, आयोग की सिफ़ारिश या सरकार का फ़ैसला नहीं। इस पैक में इन प्रोजेक्शन का कोई एक सोर्स फ़ाइनल नहीं माना गया है, इसलिए इन्हें सिर्फ़ मीडिया प्रोजेक्शन के रूप में लिखा गया है।

फ़िटमेंट फ़ैक्टर का हिसाब: ₹18,000 पर एक मिसाल

फ़िटमेंट फ़ैक्टर का मतलब सीधा है। पुराने बेसिक पे को नए फ़ैक्टर से गुणा किया जाता है, और वही रिवाइज़्ड बेसिक पे बनता है। यह मिसाल सिर्फ़ माँगों को समझने के लिए है, कोई फ़ैसला नहीं। 7th Commission के मिनिमम ₹18,000 पर IRTSA के 2.92 फ़ैक्टर से रिवाइज़्ड बेसिक ₹52,560 बनता है, जो उसके ₹52,600 के दावे के करीब है, फ़र्क़ राउंडिंग का है। NC-JCM के 3.833 फ़ैक्टर से ₹18,000 का रिवाइज़्ड बेसिक ₹68,994 बनता है, जो ₹69,000 के करीब है। BPMS के 4 फ़ैक्टर से यह ₹72,000 बनता है। तीनों मिसालों में फ़र्क़ साफ़ है, लेकिन तीनों में से कोई भी आँकड़ा अभी लागू नहीं हुआ है। असली वेतन पर DA, HRA जैसे भत्ते और सर्विस रूल्स भी असर डालेंगे, जो रिपोर्ट और सरकार के फ़ैसले के बाद ही तय होंगे।

DA को Pay Commission से कन्फ़्यूज़ न करें

यह ग़लती सबसे ज़्यादा होती है, इसलिए इस पर अलग से लिखना ज़रूरी है। 1 January 2026 से सेंट्रल कर्मचारियों का डियरनेस अलाउंस 58 percent से बढ़कर 60 percent हुआ है। यह वित्त मंत्रालय के Department of Expenditure के 22 April 2026 के ऑफ़िस मेमोरेंडम से लागू हुआ। DA महँगाई के हिसाब से हर छह महीने में बढ़ने वाला भत्ता है, जो 7th Pay Commission के फ़ॉर्मूला पर आधारित है। यह Pay Commission का वेतन रिविज़न नहीं है। DA बढ़ने से हाथ में आने वाली रकम बढ़ती है, लेकिन बेसिक पे का स्ट्रक्चर वही रहता है जो 7th Commission ने दिया था। जब तक 8th Commission की रिपोर्ट नहीं आती और सरकार उसे मंज़ूर नहीं करती, तब तक बेसिक पे में कोई बदलाव नहीं होगा। DA और पे रिविज़न को एक समझ लेना ही वह ग़लती है जिससे हर महीने नए वेतन की अफ़वाह फैलती है।

Timeline: अब तक क्या हुआ

तारीख़ क्या हुआ स्टेटस
January 2025 आयोग बनाने की घोषणा पूरा
28 October 2025 कैबिनेट ने Terms of Reference मंज़ूर किए पूरा, आज एक साल
3 November 2025 रेज़ोल्यूशन से आयोग का गठन पूरा
10 August 2026 Lok Sabha में जवाब: रिपोर्ट अभी जमा नहीं हुई सरकार का बयान
7-8 October 2026 बेंगलुरु में कंसल्टेशन पूरा
22-23 October 2026 मुंबई में कंसल्टेशन पूरा
3 November 2026 गठन को एक साल पूरा आने वाला
May 2027 के आसपास 18 महीने की सीमा में रिपोर्ट आने वाला
रिपोर्ट के बाद सरकार का फ़ैसला और इम्प्लीमेंटेशन डेट अभी तय नहीं
कुछ रिपोर्ट्स में कर्मचारियों और पेंशनरों की संख्या 50.46 लाख और 68.27 लाख लिखी गई है, जबकि इस पैक में करीब 50 लाख और करीब 69 लाख के आँकड़े इस्तेमाल किए गए हैं। यह फ़र्क़ राउंडिंग और अलग तारीख़ के डेटा का है, कोई विवाद नहीं।

कौन क्या कह रहा है: माँग, आयोग, अफ़वाह

तीन चीज़ें अलग रखनी चाहिए। पहली, यूनियन की माँगें: NC-JCM का ₹69,000 और 3.833, BPMS का ₹72,000 और 4, IRTSA का ₹52,600 और ग्रेडेड फ़ैक्टर। दूसरी, आयोग की पोज़िशन: कंसल्टेशन चल रही है, रिपोर्ट May 2027 तक आनी है, और अभी तक कोई सिफ़ारिश सरकार को नहीं सौंपी गई है। तीसरी, मीडिया प्रोजेक्शन और सोशल मीडिया के दावे, जैसे 1.83 से 2.86 गुणा तक के प्रोजेक्शन। इनमें से किसी को भी आयोग का फ़ैसला नहीं माना जा सकता। जो ख़बर यह कहे कि नया वेतन लागू हो गया है, उस पर तब तक भरोसा न करें जब तक आयोग की रिपोर्ट और सरकार का फ़ैसला दोनों सामने न आ जाएँ।

पेंशनरों के लिए भी वही नियम लागू होता है। पेंशन रिविज़न भी आयोग की सिफ़ारिश और सरकार के फ़ैसले के बाद ही होगा। Dearness Relief, यानी DR, का बढ़ना पेंशन का रूटीन एडजस्टमेंट है, पेंशन रिविज़न नहीं।

आगे क्या देखना है, यह अब साफ़ है। आयोग की रिपोर्ट May 2027 तक आनी है, और उससे पहले और कंसल्टेशन दौर हो सकते हैं। रिपोर्ट आने के बाद सरकार उसे देखेगी, कौनसी सिफ़ारिश मंज़ूर करनी है यह तय करेगी, और इम्प्लीमेंटेशन डेट और एरियर्स पर फ़ैसला लेगी। तब तक कर्मचारियों के लिए सबसे भरोसेमंद जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और Parliament में दिए गए सरकार के जवाब हैं। कोई कैलकुलेटर या वायरल पोस्ट नया वेतन तय नहीं करता। 📷 Illustration: AI-generated

Questions people ask

क्या 8th Pay Commission का वेतन 1 January 2026 से लागू हो गया है?
नहीं। 1 January 2026 से सिर्फ़ DA 60 percent हुआ है, जो रूटीन डियरनेस अलाउंस है। Pay Commission का वेतन रिविज़न अभी तय नहीं हुआ है, और सरकार ने इम्प्लीमेंटेशन डेट फ़िक्स नहीं की है।
8th Pay Commission की रिपोर्ट कब आएगी?
आयोग को गठन से 18 महीने के अंदर रिपोर्ट देनी है, इसलिए रिपोर्ट May 2027 के आसपास आनी है। 10 August 2026 को सरकार ने Parliament में कहा था कि रिपोर्ट अभी जमा नहीं हुई है।
NC-JCM का ₹69,000 और 3.833 फ़ैक्टर क्या है?
यह NC-JCM स्टाफ़ साइड की माँग है, फ़ैसला नहीं। उनका कहना है कि मिनिमम बेसिक पे ₹69,000 होना चाहिए, जो ₹18,000 का 3.833 गुणा है। आयोग ने अभी कोई फ़ैक्टर तय नहीं किया है।
DA और Pay Commission में क्या फ़र्क़ है?
DA महँगाई के हिसाब से हर छह महीने में बढ़ने वाला भत्ता है, जबकि Pay Commission बेसिक पे के स्ट्रक्चर को बदलता है। DA बढ़ना पे रिविज़न नहीं है।
आयोग का अध्यक्ष कौन है और इसका दायरा कितना बड़ा है?
अध्यक्ष Justice Ranjana Prakash Desai हैं, सदस्य-सचिव Pankaj Jain हैं। आयोग करीब 50 लाख सेंट्रल कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनरों से जुड़ी सिफ़ारिशें तैयार कर रहा है।

Sources

  1. Lok Sabha written reply, 10 August 2026 (sansad.in)
  2. Rajya Sabha written reply, 11 August 2026 (sansad.in)
  3. LiveMint: DA rise shaping fitment demands (livemint.com)
  4. LiveMint: Mumbai consultations 22-23 October 2026 (livemint.com)
  5. IRTSA graded fitment demand (upstox.com)
  6. DA order: 58 percent to 60 percent from 1 January 2026 (staffnews.in)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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