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2036 ओलंपिक की दौड़ में भारत, सात देशों की सूची जारी

By Gagariya Editorial Desk•7 Oct 2026 IST•4 min read•Human Reviewed & Fact-Checked
2036 ओलंपिक की दौड़ में भारत, सात देशों की सूची जारी
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सूची जारी

सात नाम। सात देश। एक ही मकसद: 2036 का ग्रीष्मकालीन ओलंपिक।

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने मंगलवार को उन देशों की सूची जारी कर दी जो 2036 ओलंपिक की मेज़बानी में रुचि रखते हैं। वर्णमाला के क्रम में ये देश हैं: जर्मनी, हंगरी, भारत, कतर, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्कीए। आईओसी ने इन्हें निरंतर संवाद (continuous dialogue) में शामिल इच्छुक पक्ष कहा है, यानी ये सभी बोली प्रक्रिया के आरंभिक चर्चा-चरण में हैं।

सातों देशों को नवंबर में आईओसी के Future Host Commission के सामने अपने खेल परियोजना प्रस्ताव रखने का न्योता मिला है। और जो देश अब तक इस दौड़ में नहीं हैं, उनके लिए समय ज़्यादा नहीं बचा। 31 अक्टूबर के बाद 2036 के लिए किसी नए दावेदार पर विचार नहीं होगा।

भारत का दांव: अहमदाबाद

भारत ने ओलंपिक की मेज़बानी में दिलचस्पी का औपचारिक इरादा 2024 में जताया था। देश ने इससे पहले कभी ओलंपिक का आयोजन नहीं किया है। प्रस्तावित मेज़बान शहर अहमदाबाद है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भारत की बोली-वार्ता का नेतृत्व भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) करेगा, इसमें गुजरात सरकार सहयोगी होगी और केंद्रीय खेल मंत्रालय का समर्थन रहेगा।

अहमदाबाद के पक्ष में सबसे मज़बूत दलील है: 2030 के राष्ट्रमंडल खेल। ये खेल अहमदाबाद में ही होने हैं और इन्हें 2036 के ओलंपिक की बड़ी रिहर्सल माना जा रहा है। शहर के पास नरेंद्र मोदी स्टेडियम है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बताया जाता है।

दौड़ में कौन-कौन

सातों दावेदारों की एक नज़र:

देश प्रस्तावित शहर मज़बूत पक्ष
भारत अहमदाबाद 2030 राष्ट्रमंडल खेल, दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम
कतर दोहा 2022 फीफा विश्व कप का अनुभव; भीषण गर्मी बड़ी चुनौती
जर्मनी म्यूनिख 1972 ओलंपिक का अनुभव; जर्मन ओलंपिक समिति ने पिछले महीने शहर चुना (अल जज़ीरा के अनुसार)
दक्षिण कोरिया सियोल 1988 ग्रीष्मकालीन और 2018 शीतकालीन ओलंपिक का अनुभव
दक्षिण अफ्रीका केप टाउन आधुनिक दौर में अफ्रीका के पहले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की उम्मीद
हंगरी बुडापेस्ट 2024 की बोली में रहे; कभी ओलंपिक की मेज़बानी नहीं की
तुर्कीए इस्तांबुल पांच असफल प्रयासों के बाद फिर दावेदारी

कतर की बोली दोहा केंद्रित है, हालांकि खबरों के मुताबिक़ आगे चलकर इसमें खाड़ी के पड़ोसी देशों को भी जोड़ा जा सकता है। पर कतर के लिए सबसे बड़ी बाधा है मौसम। एथेंस 2004 से लेकर ब्रिस्बेन 2032 तक हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक जुलाई-अगस्त में ही हुआ है, लेकिन कतर की भीषण गर्मी इस परिपाटी को तोड़ सकती है।

जर्मनी का प्रस्ताव म्यूनिख केंद्रित है, जहां 1972 में ओलंपिक हो चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका की बोली केप टाउन पर टिकी एक राष्ट्रीय बोली है, और इसका लक्ष्य आधुनिक दौर में अफ्रीका का पहला ग्रीष्मकालीन ओलंपिक लाना है। रॉयटर्स के अनुसार, दक्षिण कोरिया के पास सियोल 1988 और प्योंगचांग 2018 का अनुभव है। हंगरी ने सबसे हाल में 2024 की बोली लगाई थी और अब तक कभी ओलंपिक की मेज़बानी नहीं की है। इस्तांबुल पांच असफल प्रयासों के बाद छठी बार किस्मत आज़मा रहा है।

आगे का कैलेंडर

प्रक्रिया लंबी है, और आईओसी ने इसके हर पड़ाव की तारीख़ साफ़ कर दी है।

31 अक्टूबर को नए दावेदारों के लिए दरवाज़ा बंद हो जाएगा। नवंबर में सातों देश Future Host Commission के सामने अपने प्रस्ताव रखेंगे। मार्च 2027 में आईओसी का कार्यकारी बोर्ड शॉर्टलिस्ट को मंज़ूरी देगा। रॉयटर्स के मुताबिक़, संवाद चरण के बाद 2028 में पसंदीदा मेज़बानों के नाम सामने आएंगे और अंतिम फैसला 2029 के मध्य तक होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 2029 में आईओसी के 100 से ज़्यादा सदस्यों के वोट से मेज़बान चुना जाएगा।

आकलन किन बातों पर होगा, यह भी साफ़ है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ आईओसी ने तकनीकी मानदंड बताए हैं: खेल स्थलों का मास्टर प्लान, खिलाड़ियों का अनुभव, फंडिंग की रणनीति, राजनीतिक और जन समर्थन, खेलों के आयोजन की क्षमता और मेज़बान समुदायों के लिए दीर्घकालिक लाभ की रणनीति।

कोवेंट्री का नया दौर

इस प्रक्रिया के पीछे एक बड़ा बदलाव है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, आईओसी अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री ने जून 2025 में पद संभालने के बाद मेज़बान चुनने की फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया को रोक दिया था। उनकी नीति थी कि चयन में आईओसी सदस्यों की भागीदारी बढ़ाना। सदस्यों की इच्छा थी कि मेज़बान का असली विकल्प उनके सामने हो, न कि कार्यकारी बोर्ड की पसंद पर सिर्फ़ मुहर लगाई जाए।

यही वजह है कि 2032 के खेल ब्रिस्बेन को जिस तेज़ और बंद-कमरे वाली प्रक्रिया से दिए गए थे, उसके बाद अब 2036 की दौड़ पारंपरिक और प्रतिस्पर्धी रास्ते पर लौट रही है।

कोवेंट्री ने अपने बयान में कहा: "Wherever the Games take place, one thing must never change: Athletes have to be at the heart of everything we do"। यानी खेल कहीं भी हों, एक चीज़ कभी नहीं बदलनी चाहिए: हर फैसले के केंद्र में खिलाड़ी होने चाहिए।

अब नज़र किस पर

नवंबर की प्रस्तुतियां इस दौड़ का पहला असली इम्तिहान होंगी। कौन-सा शहर खेल गांव, स्टेडियम और परिवहन की सबसे ठोस योजना लेकर आता है, यही देखना होगा।

एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि 2029 के वोट में भारत की नीता अंबानी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी भी भाग लेने के पात्र हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार दोनों आईओसी सदस्य हैं।

दौड़ लंबी है, दावेदार सात हैं, और फैसला तीन साल दूर। लेकिन मंगलवार की घोषणा ने एक बात तय कर दी है: 2036 के ओलंपिक के लिए मैदान सज चुका है, और भारत उस मैदान में खड़ा है।

Questions people ask

2036 ओलंपिक की मेज़बानी के लिए भारत का प्रस्तावित शहर कौन-सा है?
भारत का प्रस्तावित मेज़बान शहर अहमदाबाद है। भारत ने 2024 में मेज़बानी में रुचि का औपचारिक इरादा जताया था। अहमदाबाद में 2030 के राष्ट्रमंडल खेल होने हैं, जिन्हें ओलंपिक बोली की बड़ी रिहर्सल माना जा रहा है। शहर में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, नरेंद्र मोदी स्टेडियम भी है।
2036 ओलंपिक के मेज़बान का अंतिम फैसला कब होगा?
अंतिम फैसला 2029 के मध्य तक होने की उम्मीद है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, आईओसी के 100 से ज़्यादा सदस्य वोट डालकर मेज़बान चुनेंगे। इससे पहले मार्च 2027 में शॉर्टलिस्ट बनेगी और रॉयटर्स के मुताबिक़ 2028 में पसंदीदा मेज़बानों के नाम सामने आएंगे।
आईओसी ने 2036 के लिए कितने देशों की सूची जारी की है?
आईओसी ने सात देशों की सूची जारी की है — वर्णमाला क्रम में जर्मनी, हंगरी, भारत, कतर, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्कीए। ये सभी नवंबर में Future Host Commission के सामने अपने प्रस्ताव रखेंगे। 31 अक्टूबर के बाद किसी नए देश की दावेदारी पर विचार नहीं होगा।
ओलंपिक बोली का आकलन किन मानदंडों पर होगा?
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ आईओसी ने तकनीकी मानदंड बताए हैं — खेल स्थलों का मास्टर प्लान, खिलाड़ियों का अनुभव, फंडिंग की रणनीति, राजनीतिक और जन समर्थन, आयोजन की क्षमता और मेज़बान समुदायों के लिए दीर्घकालिक लाभ की रणनीति। अल जज़ीरा के अनुसार फंडिंग और सार्वजनिक समर्थन पर खास ज़ोर रहेगा।

Sources

  1. The Times of India (timesofindia.indiatimes.com)
  2. The Indian Express (indianexpress.com)
  3. Al Jazeera (aljazeera.com)
  4. Reuters (freemalaysiatoday.com)
  5. Rediff (rediff.com)

Editorial Note: This explainer was researched using verified primary sources and official notifications, then independently fact-checked, reviewed, and finalized under human editorial guidance by the Gagariya desk.

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